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News भेजने बाले पत्रकारों से जनसंपर्क अधिकारी, श्रम अधिकारी एवं पुलिस कर्मी मांगेंगे नियुक्ति पत्र,10 वर्ष से अधिक समय से एक ही संस्थान में कार्यरत पत्रकारों को नियुक्ति पत्र एवं वेतन दिलाया जाएगा। मीडिया संस्थानों के द्वारा नियुक्त पत्र न दिए जाने पर कानूनी कार्रवाई के साथ विज्ञापन बंद किए जाय।

News भेजने बाले पत्रकारों से जनसंपर्क अधिकारी, श्रम अधिकारी एवं पुलिस कर्मी मांगेंगे नियुक्ति पत्र,10 वर्ष से अधिक समय से एक ही संस्थान में कार्यरत पत्रकारों को नियुक्ति पत्र एवं वेतन दिलाया जाएगा।
मीडिया संस्थानों के द्वारा नियुक्त पत्र न दिए जाने पर कानूनी कार्रवाई के साथ विज्ञापन बंद किए जाय।

ग्रामीण अंचल के पत्रकारों को नियुक्ति पत्र दिलाने का काम श्रम विभाग का और इसमें मदद करेंगे पुलिस कर्मी, ओर जनसंपर्क अधिकारी,
कारण स्पष्ट है प्रत्येक जिले में श्रम विभाग के अधिकारियों की संख्या सीमित है और पुलिस कर्मी की पहुंच गांव तक है। जनसंपर्क विभाग का नियम है कि प्रकाशित और प्रसारित समाचार पत्र जिला जनसंपर्क कार्यालय में नियमित रूप से जमा होना चाहिए। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को देखना चाहिए कि उनके जिले के समाचार जिन समाचार पत्रों में प्रकाशित हुएं हैं समाचार भेजने बाले से संस्थान का नियुक्ति पत्र मांगे।
समाचार पत्रों के संवाददाता, एजेंट जो कि समाचार पत्र के वितरण से लेकर समाचार भेजने, विज्ञापन लेने, समाचार पत्र की बिक्री कीमत की राशि सहित मालिकों के अन्य कार्य भी करते हैं परन्तु 99 प्रतिशत को संवाददाता का नियुक्ति पत्र संस्थानों द्वारा नहीं दिया जाता है।
मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद के सदस्य होने के नाते मैंने सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि समाचार पत्र छोटा या बड़ा नही होता इसी तरह पत्रकार छोटा या बड़ा नही होता है समाचार भेजने बाला पत्रकार होता है और यह समाचार भेजने का काम वह व्यक्ति भी करता है जो समाचार पत्र वितरण से लेकर उसके बिक्री से प्राप्त राशि समाचार पत्रों के मालिकों को भेजता है अतः उसे पत्रकार माना जाना चाहिए।
*सबसे बड़ा लाभ*
जब पत्रकार को नियुक्ति पत्र मिलेगा तो उसे सम्मान मिलेगा और शासकीय लाभ भी प्राप्त होगा जिसमें सबसे बड़ा लाभ बीमा का जो जनसंपर्क विभाग के माध्यम से होता है।गैर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को बीमा प्रीमियम की लगभग आधी राशि सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा दी जाती है। नियुक्ति पत्र प्राप्त पत्रकारों का बीमा रुपए दो लाख और रुपए चार लाख तक का है। इस बीमा योजना में पत्रकार के परिवार के सदस्यों को भी सामिल किया गया है और यदि पुरानी बीमारी है तो उसका भी इलाज होता है।
कानून सरकार बनाती है उसका पालन दो तरह से होता है।
आम नागरिक का कर्तव्य।
कानून का पालन कराने वाले अधिकारी ।
केंद्र सरकार ने श्रम कानून में संशोधन किया है जिसकी पहली शर्त नियुक्ति पत्र जारी करना।
श्रमिक को नियुक्ति पत्र मिला या नहीं मिला यह काम श्रम विभाग का है।
अब श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा कहा जायेगा कि उन्हें किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई।
बात अपने कर्तव्यों से भागने की है।
पुलिस का काम है चोरी करने वाले को पकडना।
क्या कोई चोर पुलिस के पास जाकर कहेगा कि उसने चोरी की है उसे पकड़ लें।
उत्तर नहीं। अपराधी कभी नहीं कहेगा कि उसने अपराध किया है।
अपराध करने वाले को पकड़ने का काम संबंधित विभाग का है।
श्रम विभाग का दायित्व है कि वह हर संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों के पास जाये और चर्चा कर जानकारी ले कि उसे नियुक्ति पत्र मिला या नहीं।
उसी तरह संस्थान के मालिक के पास जाकर जानकारी ले कि उसके संस्थान में कितने पत्रकार कार्यालय में एवं अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं और क्या उन्हें नियुक्ति पत्र दिया है या नहीं।
दोनों ही प्रक्रियाओं पर काम करना होगा। तभी नियमों का पालन होगा।
श्रम विभाग सबसे पहले ग्रामीण अंचल से समाचार भेजने बाले पत्रकारों से इस महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करें।
मैंने अपने दायित्व को समझते हुए सरकार को सुझाव दिया है कि पुलिस कर्मी की पहुंच हर शहर और गांव में होती है अतः पुलिस कर्मी को यह अधिकार दिया जाये की बह हर उस व्यक्ति से जो समाचार पत्रों को समाचार भेजने का दायित्व निभाता है और जो जिले एवं मुख्यालय में काम करते हैं का उससे नियुक्ति पत्र मांगे, नियुक्ति पत्र न होने की सूचना पुलिस अधीक्षक को दे और पुलिस अधीक्षक इस जानकारी को श्रमायुक्त को दें। जानकारी मिलने के बाद श्रमायुक्त संवधित संस्थान पर कार्यवाही करे और जनसंपर्क विभाग उस मीडिया संस्थान को शासकीय विज्ञापन बंद कर दें इतना ही नहीं नगर परिषद से लेकर वो सभी संस्थान जो राज्य सरकार के अधीन आते हैं के विज्ञापनों पर रोक लगा दें।
राधावल्लभ शारदा
सदस्य
मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद, राज्य सरकार
प्रांतीय अध्यक्ष
असेंबली आफ एमपी जर्नलिस्ट्स मुख्यालय भोपाल
9425609484

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