“बेटियों तक को नहीं छोड़ा… पत्रकार की गुहार: झूठी शिकायतों और धमकियों से टूट रहा परिवार, रीवा आईजी से लगाई सुरक्षा की गुहार”
सतना के पत्रकार ने पुलिस महानिरीक्षक को सौंपा शिकायती पत्र, पत्नी-बेटियों को फोन कर अभद्रता करने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप
सतना। एक पत्रकार द्वारा अपने परिवार की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों से लगाई गई गुहार ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के कोटर निवासी पत्रकार पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी ने रीवा संभाग के पुलिस महानिरीक्षक को शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि कुछ लोग लंबे समय से उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उनकी पत्नी और बेटियों को भी कथित तौर पर फोन कर परेशान किया जा रहा है, जिससे पूरा परिवार भय और तनाव के माहौल में जीने को मजबूर है।
पत्रकार द्वारा दिए गए आवेदन में कहा गया है कि उनके खिलाफ लगातार झूठी और निराधार शिकायतें विभिन्न प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के पास भेजी जा रही हैं। उनका आरोप है कि इन शिकायतों का उद्देश्य उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना, पत्रकारिता कार्य में बाधा उत्पन्न करना और उन्हें मानसिक रूप से तोड़ना है।
“परिवार पर हमला सबसे बड़ा दर्द”
आवेदन में पत्रकार ने सबसे गंभीर आरोप यह लगाया है कि उनकी पत्नी और बेटियों को बार-बार फोन कर अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। परिवार की महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। पत्रकार का कहना है कि इससे उनके परिवार की मानसिक शांति पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है और घर का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है।
उन्होंने लिखा है कि एक जिम्मेदार नागरिक और पत्रकार होने के बावजूद उन्हें बार-बार विभिन्न कार्यालयों और थानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कथित झूठी शिकायतों के कारण उन्हें अपना समय और ऊर्जा सफाई देने में खर्च करनी पड़ रही है।
“पत्रकारिता की कीमत या सुनियोजित प्रताड़ना?”
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि लगातार हो रही घटनाएं किसी सुनियोजित अभियान का हिस्सा प्रतीत होती हैं। पत्रकार का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में यह सब किया जा रहा है, इसलिए मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।
पत्रकार ने पुलिस महानिरीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, मोबाइल कॉल और अन्य माध्यमों से की जा रही कथित अभद्रता एवं उत्पीड़न की जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सुरक्षा की भी मांग
पत्रकार ने आवेदन में यह आशंका भी जताई है कि भविष्य में उनके या उनके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना घट सकती है। इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रशासन की ओर टिकी निगाहें
एक ओर जहां पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यदि कोई पत्रकार स्वयं अपने परिवार की सुरक्षा के लिए दर-दर गुहार लगाने को मजबूर हो जाए तो यह चिंता का विषय बन जाता है। अब निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कितनी गंभीरता से की जाती है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिल पाती है।
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