मेरे प्यारे देशवासियो, आप में से बहुत लोगों की नदी, तालाब या कुएं के पानी से जुड़ी यादें जरूर होंगी | किसी को तालाब में तैरना याद होगा, किसी को दोस्तों के साथ तालाब किनारे खेलना, किसी को उस मिट्टी की खुशबू याद होगी | बचपन की ऐसी यादें जीवन-भर मन में बसी रहती हैं |प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में कहीं
साथियो, ऐसी ही यादों को बचाने की एक प्रेरक गाथा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सामने आई है | बस्ती के आकाश गुप्ता अपने गाँव की मनोरमा नदी को देखकर बहुत दुखी होते थे | क्योंकि जिस नदी को उन्होंने बचपन में साफ और जीवंत देखा था | समय के साथ उस नदी में प्लास्टिक जमा होने लगा था | गंदगी बढ़ती चली जा रही थी | श्रीमान आकाश ने तय किया कि शिकायत नहीं करेंगे, एक नई शुरुआत करेंगे | शिकायत नहीं, शुरुआत मंत्र बन गया | उन्होंने अपने दोस्तों को साथ लिया | सिर्फ जाल था, फावड़ा था, टोकरी थी और सबसे बड़ी ताकत थी, कुछ बदलने का संकल्प | ये युवा नदी में उतरते थे, जलकुंभी निकालते थे | प्लास्टिक और कचरा बाहर लाते थे | कई बार एक दिन में 50-60 किलो तक कचरा नदी से निकाला गया | धीरे- धीरे मनोरमा नदी का वह हिस्सा फिर से साफ दिखने लगा | आसपास के लोगों का ध्यान भी इस काम की तरफ गया | लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी |
साथियो, ऐसी ही एक प्रेरक कहानी गोवा से भी सामने आई है | गोवा के बालकृष्ण अइया जी retired teacher हैं | लेकिन समाज के लिए काम करने का उनका उत्साह आज भी वैसा ही है | उन्हें मड्डी-तोलाप इलाके में पानी की समस्या बहुत परेशान करती थी | उन्होंने भी समाधान के लिए काम शुरू किया | बालकृष्ण जी ने pipeline बिछाने के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | इससे कई घरों तक पानी पहुंचा | जिन परिवारों को पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ता था, उनके लिए यह बहुत बड़ी राहत बनी |
साथियो, पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ | इसका संबंध ‘मन की बात’ से भी जुड़ा है | इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूँ | तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई | करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था | मैं बात कर रहा हूँ, गिरिजा अम्मा जी की | इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा students भी उनके साथ थे |
साथियो, गिरिजा अम्मा जी करीब 15 स्कूल चलाती हैं | इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय बहुत प्रमुख है | उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है | उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया | इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के students को प्रेरित किया | उन्होंने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें | यानी एक साल में हर student की ओर से 365 रुपये जमा हुए | इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपये इकट्ठा हुए | गिरिजा अम्मा जी ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा | उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि माँ भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है | पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिन्दू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं | देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस School network की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है | मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और उन students की भी विशेष सराहना करता हूँ, जिन्होंने, अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया |
साथियो, भारत के हर गाँव में, हर शहर में, कुछ-न-कुछ ऐसा हो रहा है जो हमें प्रेरणा देता है | कई बार, इन प्रयासों की ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन जब हम इन्हें जानते हैं, तो ये विश्वास और मजबूत होता है, कि देश, अपने लोगों की शक्ति से आगे बढ़ रहा है | मेरा आपसे आग्रह है, अपने आसपास ऐसे प्रयासों को जरूर देखिए | जो लोग समाज के लिए अच्छा काम कर रहें हैं, उन्हें पहचानिए, उनकी सराहना कीजिए, उनसे सीखिए, और हो सके तो खुद भी किसी अच्छे काम से जुड़िए | अगले महीने ‘मन की बात’ में कुछ और प्रेरक गाथाओं के साथ मैं फिर आपसे जुड़ूँगा | बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार
mahadandnews.com mahadandnews | www.mahadandnews.com