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*प्रदेश के पत्रकारों को तय करना है किस* *पत्रकार संगठन के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चलना है। सज़ा याफ़्ता* *मुखिया के साथ या पत्रकार हित में काम करने वाले मुखिया के साथ*,

  1. *प्रदेश के पत्रकारों को तय करना है किस* *पत्रकार संगठन के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चलना है। सज़ा याफ़्ता* *मुखिया के साथ या पत्रकार हित में काम करने वाले मुखिया के साथ*,

*कौन हो सकता है जिसे* *फर्जी काम करने पर तीन वर्ष की सज़ा और 50 हजार रुपए का*जुर्माना,हाई कोर्ट में चुनौती दी है सज़ा 7 वर्ष की हो सकती है*।

*भूतो न भविष्यबती*।
*न कभी पहले हुआ और न अभी तक हुआ कि एक मंच पर समाचार पत्र मालिक राजनेता और यूनियन के सदस्य*।

भोपाल – आज मन हुआ कि कुछ लिखा जाय तब याद आया कि जो किसी नहीं किया पत्रकारों के हित में उसकी याद ताजा की जाय,आप में से बहुत मित्रों को जानकारी नहीं होगी खैर,
भोपाल पत्रकारों की एक पीढ़ी ने अपने वेतन में से रुपए देकर राज्य सरकार द्वारा आवंटित जमीन पर पत्रकारों के बैठने एवं पत्रकार वार्ता के लिए एक भवन निर्माण कराया। इस भवन निर्माण में सरकार ने भी जमीन के साथ राशि भी दी थी।
उस पीढ़ी में अभी श्री धन्ना लाल शाह,लज्जा शंकर जी हरदेनिया, प्रेम चंद मोदी, यशवंत अरगरे बालमुकुंद भारती, स्व त्रिभुवन यादव,राजा साहब, राजेन्द्र नूतन, मेहता, गोविंद तोमर, और भी नाम जो याद नहीं आ रहें हैं का भारी योगदान रहा।
उस समय यह जमीन वक्रिंग जर्नलिस्ट यूनियन के नाम पर थी और ये सब उसके सदस्य हुआ करते थे।
समय ने करवट ली और निज स्वार्थ सिद्ध करने वाले ने कब्जा कर लिया।
पत्रकार भवन समिति में दरार पड़ी और सरकार ने पत्रकार भवन समिति का आडिट कराया बहुत गड़बड़ थी मतलब रुपयों का फर्जीवाड़ा होने पर भंग कर दी।
सरकार के कब्जे में रहें पत्रकार भवन समिति के चुनाव सरकारी देख रेख में हुएं,
विनोद तिवारी अध्यक्ष, अख्तर अली कोषाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों का निर्वाचन किया गया।
एक बैठक में अवैध कब्जा धारी जबरन घुस गया तब अख्तर अली ने जैसे कुत्ते को भगाते हैं वैसे ही बैठक से बाहर कर दिया।
दूसरी बार नियमानुसार फिर चुनाव हुए। इस बार जो पदाधिकारी चुनें गये उन्हें दादागिरी से इस अवैध कब्जा धारी ने बैठने नहीं दिया।
पत्रकार भवन से होने वाली आय ओ मी टेंट हाउस और अव अवैध कब्जा धारी के मध्य बंटती रही।
समय आया जो काम भाजपा सरकार नहीं कर सकी उसे कमलनाथ सरकार के सूचना मंत्री पी सी शर्मा ने बुलडोजर चला कर पत्रकार भवन को धराशाई कर दिया।
सामान फिकवा दिया। अब नया भवन प्रक्रिया में है।
प्रदेश में तहसील से लेकर प्रदेश में कई पत्रकार संगठन और यूनियन है।
एक यूनियन ने वह काम किया जो भविष्य में कभी नहीं हुआ और न ही उसके बाद बैसा काम हुआ जिसमें स्वास्थ्य मंत्री बाला बच्चन ने नीव रखी और जयप्रकाश नारायण चिकित्सालय में पत्रकारों के लिए बनें पत्रकार प्राइवेट वार्ड का लोकार्पण प्रेम नारायण ठाकुर ने किया इस अवसर पर भोपाल के समाचार पत्रों के मालिकों,राज नेताओं, यूनियन के नेता मंच पर एक साथ बैठे उसी दिन दिव्य भास्कर का अहमदाबाद में लोकार्पण था लेकिन रमेश अग्रवाल जी ने फोन पर बधाई दी।
आखिर क्यों पत्रकार प्राइवेट वार्ड का सोच क्यों आया।
कारण – एक पत्रकार मित्र बीमारी हालत में जयप्रकाश नारायण चिकित्सालय में भर्ती हुए उनके बेटे का फोन आया कि पापा को अस्पताल में भर्ती कराया गया है परंतु पलंग नहीं मिला मुझे तकलीफ़ हुई कि पत्रकार को अस्पताल में पलंग नहीं मैं अस्पताल गया सिविल सर्जन से चर्चा कर उनके लिए महत्वपूर्ण सभी व्यवस्थाएं कराई तब तय किया कि अस्पताल में पत्रकारों के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
इसी सोच को लेकर मैं और आनंद शर्मा सांसद और विधायक के चक्कर लगाने लगे कि किसी की भी नीधी से वार्ड वने।
एक साल तक चक्कर लगाने पड़े परंतु सफलता नहीं मिली तो सोच लीजिए कि पत्रकारों की कितनी प्रतिष्ठा है।
हिम्मत न हारिये बीसारिये न राम पर भरोसा कर प्रयास करते रहे।
इसी दौरान दैनिक नवभारत के मालिक श्री प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी सांसद बने।
चुंकि पत्रकारिता का पहला कदम मैंने नवभारत में आर टी ओ आफीस की नोकरी छोड़ कर रखा था।
एक दिन मैंने आनन्द शर्मा से चर्चा कर श्री प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी सांसद से मिलने की योजना को मूर्त रूप दिया और हम दोनों समय लेकर नवभारत भवन में मां सरस्वती को नमन करते हुए प्रवेश किया।
रिशपशन में बैठे हुए कर्मचारी से चर्चा कर बताया कि श्री प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी सांसद को बता दें कि हम आयें है कर्मचारी ने इंटरकाम पर संदेश दिया फिर हमसे कहा आप मिलने जा सकतें हैं।
हम दोनों उनके चैंबर के सामने पहुंचे ही थे कि दरवाजा खुला और हमारे सामने श्री प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी सांसद सामने खड़े थे बड़े आदर के साथ अंदर ले गए।
जब हम अंदर गए उस समय उनके पास कई व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी बैठे हुए थे।
श्री प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी सांसद जी ने हमें बैठने का बोला हमारे कुर्सी पर बैठने के बाद वो अपनी कुर्सी पर बैठे।
सभी से हमारा परिचय कराया कि ये पत्रकारों की यूनियन के अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष है।इतने सम्मान का मैंने स्वप्न में भी नहीं सोचा था।
हमारी तरफ मुखातिब होते हुए पुछा कैसे आये मैंने एक पत्र देकर निवेदन किया कि अस्पताल में दो पत्रकार प्राइवेट वार्ड बनाने के लिए रुपए 5 लाख आपकी सांसद निधि से राशि आवंटित कर दें। उन्होंने कहा कि देखता हूं।
कुछ निराश हुईं। फिर मां सरस्वती को नमन किया और उनसे प्रार्थना की कि हमारा काम करा दें।
होहई बही जो राम रची राखा।
श्री प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी सांसद जी ने पत्रकार प्राइवेट वार्ड के लिए रुपए 5 लाख की स्वीकृति दी का पत्र समय से पहले घर के पते पर आया।
परिवार के मुखिया किसी काम में लगे हुए हैं और सफलता मिलती है तो सबसे ज्यादा खुशी पत्नी को होती है।मेरी पत्नी ने पत्र पढ लिया था और जैसे ही हम घर पहुंचे उन्होंने बताया कि श्री माहेश्वरी सांसद जी ने रुपए 5 लाख स्वीकृत कर दिये है बताते हुए उनकी आंखों में ख़ुशी के आंशु थे।
उस समय भोपाल के कलेक्टर श्री अनुराग जैन थे मैंने उनसे कहा कि मैं प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दूं तब उन्होंने कहा कि बताउंगा। और फिर उन्होंने सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वीकृति दी।
उस समय हम दोनों को लगा कि हमने कोई अच्छा काम किया है उसका प्रतिफल है।
कार्यक्रम की तैयारी शुरू कर दी पहले भूमि पूजन तो स्वास्थ्य मंत्री श्री वाला बच्चन जी के कर कमलों से कराया।
उसी दौरान मेरे पास लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों ने सम्पर्क कर आफर दिया कि रुपए 50, हजार मुझे दे देंगे। खैर एक कम बेईमान अधिकारी से काम कराने का निवेदन श्री अनुराग जैन कलेक्टर से कहा।
अब समाचार जारी किया कि अस्पताल में पत्रकार प्राइवेट वार्ड का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया है तो एक समाचार पत्र में मेरे खिलाफ समाचार प्रकाशित किया गया कि ये रुपए खां जायेंगे और अपने शरीर के दो टुकड़े कर एक एक वार्ड में भर्ती होंगे।
अच्छे काम में अड़ंगा डाल दिया जाता है परंतु नीयत साफ है तो सफलता मिलेगी।
अब मैं तलास में हूं कि उन पत्रकारों के हित में बने पत्रकार प्राइवेट वार्ड के नियमित निरीक्षण के लिए समर्पित भाव से काम करने वाले चार पत्रकार मित्रों को जबावदारी दूं।
यह कहानी है दिये और तूफान की,
दिया आज भी निरंतर रोशनी दे रहा है और षड्यंत्रकारी को तीन साल की सजा हुई अपंगता के मेडिकल सर्टिफिकेट पर हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हैं।
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने जांच में कई विंदूऔ को छोड़ दिया था जिससे हाईकोर्ट को अवगत कराया है यदि कार्यवाही होगी तो 7 वर्ष का कारावास तय है अभी तीन साल की सजा के साथ रुपए 50 हजार का जुर्माना लगाया गया है।
प्रदेश के पत्रकारों से निवेदन है कि अब आपको तय करना है कि किस संगठन के साथ रहना है, तीन साल की सजायाफ्ता व्यक्ति के साथ।
शराब की दुकान के सामने से दूध लेकर निकलने बाले के लिए भी सोचते हैं कि यह शराब पीकर आया है।
राधावल्लभ शारदा
प्रांतीय अध्यक्ष
असेंबली आफ एमपी जर्नलिस्ट्स मुख्यालय भोपाल
महामहिम राज्यपाल महोदय की अनुमति से गजट नोटिफिकेशन के बाद मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद का सदस्य ।
9425609484

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