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Cm एम हेल्प लाइन नंबर 0755181 एक मजाक या दुखी इंसान के जले पर नमक छिड़कना।

Cm एम हेल्प लाइन नंबर 0755181 एक मजाक या दुखी इंसान के जले पर नमक छिड़कना।

*प्रश्न चिन्ह लगा है कि चलते रास्ते क्या कोई किसी को जान से हाथ धोना पड़ेगा कि धमकी देगा इस तरह की धमकी क्या पुलिस महानिदेशक या किसी अन्य को वगैर बजह दी।*
भोपाल – आप माने या न माने परंतु यह सत्य है कि सी एम हेल्प लाइन को स्वयं को मदद की आवश्यकता है और सी एम हेल्प लाइन में कतार में खड़े जनमानस के साथ अच्छा मजाक करते हैं मजाक मतलब सी एम हेल्प लाइन में बैठे हुए कर्मचारी पूरी घटना सुनाने के बाद पुछते है कि क्या आप संतुष्ट हैं क्योंकि विभाग के अधिकारियों द्वारा कहा जाता है कि समस्या का समाधान कर दिया है।जब संबंधित व्यक्ति कहता है कि समाधान नहीं हुआ है तो फिर दूसरी तरफ से कहा जाता है कि आपकी शिकायत ऊपर भेज दी गई है।
अब समझ से परे है कि उपर कौन है जिसे समस्या निराकरण के लिए भेज दी गई है और अब ऊपर वाले के यहां से क्या जबाब दिया जाता है का इंतजार किया जाता है।
जी हां मैं व्यक्तिगत रूप से सी एम हेल्प लाइन की व्यवस्था से रुबरु कराने जा रहा हूं आपबीती पर ज्यादा भरोसा है सुनी सुनाई बातों पर नहीं।
मैंने 2003 में एक रसूखदार व्यक्ति,दूसरा बह व्यक्ति हैं जिसने मंडीदीप में एक छोटे-से कमरे में बैठकर कर्मचारियों को मेडिकल प्रमाण पत्र देता था जो आज अपने दाव पेंच से एक नहीं कई कालेजों का मालिक बन गया है हो सकता है कि इस व्यवसाय में उसके साथ धनाढ्य वर्ग के लोग या राजनीति में रसुखदार लोग जुड़े हुए हैं।
अब मुदे पर सभी का ध्यान देना जरूरी समझता हूं।
बात 2003 की होगी मेरे घर किसी व्यक्ति ने एक लिफाफा जिसमें कुछ पेपर फेंक दिया।
मैंने उस लिफाफे को खोल कर देखा और *गौर से पढ़ा तो मुझे लगा कि कि इस मामले में पद का दुरुपयोग,कूट रचना, शासकीय धन की हानी और सरकारी नियमों को दरकिनार कर अवैध रूप काम किया गया है*।
*आपने कभी नहीं सुना होगा कि गुनाह एक आदमी का और सजा दो को दी। गुनाह आर के डी एफ कालेज को अवैध एडमिशन देने पर 24 लाख रुपए का जुर्माना और कूट रचना कर उसमें सत्य साईं इंसटूयूट आफ टेक्नालॉजी जुड़ गया और जुर्माना 24 लाख से घटकर 5 लाख रुपए हो गया*

आज भी पेपर्स मेरे पास उपलब्ध है
मैंने उन पेपर्स की फोटो कॉपी कराई और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई।
जांच के बाद राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने भोपाल न्यायालय में प्रकरण पेश किया।
प्रकरण विचाराधीन था मैं अब उस समय की बात करता हूं 2018 संभवतः 18 नवंबर को रात्रि 8 बजे मैं अपने निवास में बने आफिस में काम समाप्त कर उठ गया था और लाइट बंद कर बाहर निकल रहा था इतने में दो व्यक्ति जिन्हें मैं व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता उन्होंने मुझे धक्का देकर कुर्सी पर बैठा दिया और एक पिस्टल टेविल पर रखते हुए मोबाइल की टार्च जलाकर राख दी और मुझसे कहा कि राजा साहब के प्रकरण से बाहर हो जाओ वरना जान से हाथ धोना पड़ेगा। इसी के साथ कई गन्दे शब्दों का इस्तेमाल किया जिनका उल्लेख मैंने पुलिस को लिखे पत्र में किया है।
इस घटनाक्रम के बाद मैंने एक आवेदन टी टी नगर थाने के थाना प्रभारी के नाम पर डाक से भेजा।

मुख्यमंत्री हेल्प लाइन
में पुलिस द्वारा दी गई जानकारी तथ्यों से बहुत दूर है।
*प्रश्न चिन्ह लगा है कि चलते रास्ते क्या कोई किसी को जान से हाथ धोना पड़ेगा कि धमकी देगा इस तरह की धमकी क्या पुलिस महानिदेशक या किसी अन्य को वगैर बजह दी।*
25/3, 9:13 pm] राधावल्लभ शारदा प्रांतीय: CompId 17264899
[25/3, 9:13 pm] मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री: *नाम:* श्री राधावल्लभ शारदा,*मोबाइल नंबर:* NA
*शिकायत की स्थिति:* *लंबित*
*निराकरण:* शिकायतकर्ता की शिकायत में पुलिस उपायु्क्त जोन-01 नगरीय पुलिस भोपाल के माध्यम से जॉच कराई गई, पुलिस उपायुक्त जोन-01 नगरीय पुलिस भोपाल द्वारा लेख है कि थाना प्रभारी थाना टी.टी.नगर द्वारा उक्त शिकायत जॉच मे पाया गया कि शिकायतकर्ता के आवेदन पत्र की जाँच में आवेदक ने बताया कि मेरे द्वारा वर्ष 2017-2018 में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री राजा पटेरिया, आर.के.डी.एफ के मालिक सुनील कपूर तथा महानिदेशक राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो भोपाल के खिलाफ माननीय न्यायालय भोपाल में व हाई कोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की गई थी। जो न्यायालय द्वारा मेरे उक्त याचिका को निरस्त कर दी गई थी, के संबंध में मुझे उक्त अनावेदकों के द्वारा अज्ञात व्यक्तियों से धमकी दिनांक 14/11/2018 में दिलाई गई थी कि आपने जो न्यायालय में याचिका दायर की है उसे वापस ले लें । इस संबंध में मेरे द्वारा डाक से थाना प्रभारी टी टी नगर को लिखित आवेदन भेजा गया था। उक्त आवेदन पत्र की जांच में आवेदक राधावल्लभशारदा के कथन लिये गये। जिसने अपने कथनों में बताया कि उक्त अनावेदकगण के विरूध्द मैनें अपने वकील द्वारा याचिका क्रमांक 8459/2020 में सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में याचिका दायर किया हूँ जिसमें दिनांक 07/01/2022 को पेशी थी किन्तु कोरोना महामारी के कारण मैं पेशी में नहीं गया तथा मैं चाहता हूँ कि मेरी सुरक्षा की जवाबदारी राज्य शासन अपने खर्चे पर करे तथा सत्य साईं इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी भोपाल की जांच कर आर.के.डी.एफ. कालेज के प्रकरण से नहीं जोड़ा जावे । मेरी शिकायत में उचित कार्यवाही हो जिस कारण से मैंने सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में याचिका लगाया हूँ जो विचाराधीन है । अतः संपूर्ण जांच पर से यह पाया गया कि आर.के.डी.एफ. के मालिक सुनील कपूर व अन्य अनावेदकगणों के विरूध्द मामला सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में विचाराधीन है। पुलिस के द्वारा की गई कार्यवाही से शिकातयतकर्ता को अवगत करवाया गया है।

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