लोकनिर्माण विभाग ने ब्लैकलिस्ट किए आठ ठेकेदार, 29 कार्यों में सुधार के निर्देश
विशेष टिप्पणी – इन 29 कार्यों में सुधार पर जो राशि खर्च होगी उक्त राशि संबंधित अधिकारियों से ली जानी चाहिए और इन अधिकारियों की सम्पत्ति की जांच होनी चाहिए और सेबा से मुक्त करना इंसाफ है।
भोपाल। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के निर्देश पर प्रदेशभर में कराए जा रहे निर्माण कार्यो के औचक निरीक्षण में इस बार आठ निर्माण एजेंसियों ठेकेदारों द्वारा गुणवत्ताहीन काम किए जाने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया है और 29 निर्माण कार्यों में पाई गई कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए है।
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंताओं के सात विशेष निरीक्षण दलों द्वारा विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन एवं पूर्ण हो चुके कार्यों का निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण रायसेन, सिवनी, दतिया, बड़वानी, शहडोल, रतलाम एवं पन्ना जिलों में किया गया, जिसमें कुल 35 निर्माण कार्यों का रेंडम आधार पर चयन कर उनकी गुणवत्ता, प्रगति, तकनीकी मानकों एवं रखरखाव की स्थिति का परीक्षण किया गया। शहडोल जिले में मेसर्स आशीष गुप्ता को मुख्य अभियंता रीवा परिक्षेत्र द्वारा कालीसूची (ब्लैकलिस्ट) में दर्ज करने के निर्देश दिए गए। पन्ना रोज जिले में निर्माण कार्य की गुणवत्ता असंतोषजनक पाए जाने पर संबंधित निर्माण पंख्या एजेंसी मेसर्स आर. के. ट्रेडर्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, पन्ना को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार करिया से महोदकला सड़क निर्माण कार्य में गंभीर कमियां पाए जाने पर संबंधित उपयंत्री को नोटिस जारी करने तथा निर्माण एजेंसी मेसर्स कुमार कंस्ट्रक्शन कंपनी, छतरपुर को कालीसूची में डालने के निर्देश दिए गए। पन्ना जिले में ही निर्माण एजेंसी मेसर्स आर. एस. इन्फ्रा, सतना के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। रायसेन जिले में मेसर्स जगदीप सिंह एंड कंपनी, उत्तर प्रदेश, मेसर्स चौधरी बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, भोपाल और मेसर्स शशि कंस्ट्रक्शन कंपनी, मुरैना को कालीसूची में दर्ज करने के निर्देश दिए गए। सिवनी जिले में गवर्नमेंट एक्सीलेंस हायर सेकेंडरी स्कूल, धनोरा के कार्य में भी गंभीर अनियमितताओं पर वर्तमान एवं तत्कालीन अधिकारियों को नोटिस जारी करने, परियोजना से जुड़े कंसल्टेंट आईक्यूटी इंडिया प्राइवेट और लिमिटेड के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा निर्माण एजेंसी मेसर्स बी. आर. गोयल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, इंदौर को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए।
ठेकेदारों को ब्लेक लिस्ट मात्र उपाय नहीं है। काम को देखने बाले अधिकारियों की सांठगांठ से ही गुणवत्ता नहीं थी।
काम से संबंधित अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाना नहीं वरन् उनकी सम्पत्ति की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
काम को पुनः ठीक कराने में जो खर्च आएगा उसे संबंधित अधिकारियों से लिया जाना चाहिए।
स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार की बेल को समाप्त करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।
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