भाेपाल से प्रांतीय मीडिया प्रभारी दीप्ति कौर की रपट
*टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक : डॉ. रूबी खान*
—बीएमएचआरसी, भोपाल में टीबी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
भोपाल, 10 जून 2026। भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (आईसीएमआर-बीएमएचआरसी), भोपाल के श्वसन रोग विभाग एवं टी.बी. उन्मूलन कोर समिति द्वारा 10 जून 2026 को टीबी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संस्थान के कर्मचारियों के बीच क्षय रोग (टीबी) के प्रति जागरूकता बढ़ाना, शीघ्र निदान, उपचार अनुपालन तथा राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के विभिन्न आयामों की जानकारी देना था।
कार्यक्रम में जिला टीबी अधिकारी डॉ. रूबी खान, गांधी मेडिकल कॉलेज के श्वसन रोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विश्वास गुप्ता तथा स्टेट टीबी ट्रेनिंग एंड डेमोंस्ट्रेशन सेंटर (STDC), मध्यप्रदेश की प्रशिक्षण प्रभाग की प्रभारी डॉ. नीलम धवन उपस्थित थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर बीएमएचआरसी के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराग यादव, श्वसन रोग विभाग के प्रमुख डॉ. ललित कुमार, प्रोफेसर डॉ. महेश राठौड़ तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकिता राय चौकसे भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ चिकित्सक एवं स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान टीबी नियंत्रण की वर्तमान रणनीतियों, स्क्रीनिंग पद्धतियों, उपचार प्रणाली तथा जनभागीदारी की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
‘ *एमडीआर-टीबी वर्तमान समय की एक बड़ी चुनौती‘*
जिला टीबी अधिकारी डॉ. रूबी खान ने अपने संबोधन में कहा कि ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (एमडीआर-टीबी) वर्तमान समय की एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि अधूरा उपचार, दवाओं का अनियमित सेवन तथा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन न करने से एमडीआर-टीबी के मामले बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम एक सुव्यवस्थित एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित कार्यक्रम है। डॉ खान ने कहा कि जोर देते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों, स्थानीय प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों एवं समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण है।
डॉ. खान ने बताया कि टीबी उन्मूलन मिशन के तहत टीबी जांच सेवाओं का विकेंद्रीकरण (Decentralization) किया गया है, जिससे लोगों तक जांच सुविधाएं अधिक आसानी से पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक तकनीकों से शीघ्र एवं सटीक जांच संभव हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत उपचार प्रणाली को सुदृढ़ किया गया है, जिससे मरीजों को दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के उपचार में उपयोग होने वाली अत्याधुनिक एवं महंगी दवाएं भी सरकार द्वारा निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं।
डॉ. खान ने कहा कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत उपलब्ध दवाएं विश्वस्तरीय गुणवत्ता की हैं और मरीजों को निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
*‘टीबी की जांच एवं उपचार में आधुनिक दृष्टिकोण’ :* गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के श्वसन रोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विश्वास गुप्ता ने टीबी की जांच एवं उपचार प्रक्रिया पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीबी केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसके लक्षण भी विविध हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शीघ्र निदान के लिए संदिग्ध मरीजों की उचित स्क्रीनिंग, आवश्यक जांच एवं समय पर उपचार प्रारंभ करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि उपचार के दौरान नियमित फॉलोअप, दवाओं का सही सेवन और चिकित्सकीय सलाह का पालन रोग नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
*निक्षय मित्र योजना से पोषण एवं उपचार सहयोग को मजबूती :* STDC, मध्यप्रदेश की प्रशिक्षण प्रभाग की प्रभारी डॉ. नीलम धवन ने अपने संबोधन में निक्षय मित्र योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना टीबी मरीजों को पोषण सहायता एवं सामाजिक सहयोग प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से मरीजों का पंजीकरण निक्षय पोर्टल पर किया जाता है और उन्हें उपचार अवधि के दौरान आवश्यक पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उपचार अनुपालन में सुधार होता है और मरीजों के स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया तेज होती है।
‘ *टीबी नियंत्रण में क्लिनिकल सतर्कता एवं शीघ्र उपचार की आवश्यकता’ :* बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्यकर्मी भी टीबी संक्रमण के जोखिम से अछूते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान में टीबी निदान एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय संदर्भ प्रयोगशाला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि संस्थान में डिजिटल एक्स-रे सुविधा उपलब्ध है तथा हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों के माध्यम से समुदाय स्तर तक जांच सेवाएं पहुंचाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्वास्थ्य केंद्र क्रमांक 5 में स्थित डॉट्स सेंटर को पुनः सक्रिय किया गया है। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि बीएमएचआरसी ने वयस्क टीबी टीकाकरण से संबंधित कार्यक्रमों में भी भागीदारी की है तथा संस्थान में टीबी नियंत्रण एवं निदान को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
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