Desh के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से निवेदन है कि भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता है।
राधावल्लभ शारदा द्वारा संपादित रपट
2022 में मैंने भोपाल से प्रकाशित लगभग 250 के करीब दैनिक समाचार पत्रों की प्रसार संख्या 60 लाख से अधिक थी की जांच के लिए राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में मय दस्तावेज आवेदन किया था। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव से जांच की अनुमति मांगी जो 2026 अप्रैल तक नहीं मिली है। इस संबंध में तत्कालीन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर को भी पत्र लिखा था।
क्या समाचार पत्रों के मालिकों को प्रसार संख्या अधिक बताने कि अनुमति दी गई है। अधिक प्रसार संख्या से विज्ञापन कि दरों में वृद्धि होती है और इस तरह केंद्र और राज्य सरकार को आर्थिक रूप से लूटा जा रहा है।
शहडोल में रिश्वतखोर
पर कार्रवाई,। सख्त कानून की आवश्यकता है
मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है, इसके बावजूद मामलों में कमी नहीं आ रही है।
ताजा मामला शहडोल जिले से सामने आया है, जहां लोकायुक्त रीवा की टीम ने नगर परिषद खंड बाणसागर में पदस्थ
लेडी सब इंजीनियर सुधा वर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
क्या है मामला?
फरियादी जे.के. अग्रवाल ने 7 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई थी कि खेल मैदान में स्टेयर निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद मूल्यांकन नहीं किया जा रहा था और इसके बदले 20,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।
जांच के बाद लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और 9 अप्रैल को 10,000 रुपये लेते समय आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया।
कानूनी कार्रवाई
आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है । साभार,रेवा खंड
बड़ा प्रश्न – जब रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने पर भी संबंधित कर्मचारी को सिर्फ हटा दिया जाता है।
जबलपुर में ही पिछले दिनों एक प्रकरण का निपटारा 23 वर्ष से अधिक समय में किया गया,जिस व्यक्ति ने रिश्वत ली थी उसकी मृत्यु हो गई परंतु माननीय न्यायाधीश महोदय ने उस व्यक्ति की पत्नी,बेटा और बहू को सजा और जुर्माना लगाया।
जब रंगें हाथों कर्मचारी पकड़ा जाता है तो मेरी नज़र में पहला कदम उसकी समस्त सम्पत्ति जप्त कर लेना चाहिए और शासकीय सेवा से मुक्त कर देना चाहिए, रिश्वत के मामले इतने दिनों तक नहीं चलना चाहिए।
देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से निवेदन है कि भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता है।
2022 में मैंने भोपाल से प्रकाशित लगभग 250 के करीब दैनिक समाचार पत्रों की प्रसार संख्या 60 लाख से अधिक थी की जांच के लिए राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में मय दस्तावेज आवेदन किया था। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव से जांच की अनुमति मांगी जो 2026 अप्रैल तक नहीं मिली है। इस संबंध में तत्कालीन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर को भी पत्र लिखा था।
क्या समाचार पत्रों के मालिकों को प्रसार संख्या अधिक बताने कि अनुमति दी गई है। अधिक प्रसार संख्या से विज्ञापन कि दरों में वृद्धि होती है और इस तरह केंद्र और राज्य सरकार को आर्थिक रूप से लूटा जा रहा है।
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