संजीत रेतम नदी व चंबल नदी में करंट से मौत का खेल… छोटे तस्कर अंदर, बड़े संरक्षणदाता बाहर!
प्रांतीय मीडिया प्रभारी दीप्ति कौर की रिपोर्ट
_*नाहरगढ़ थाना कटघरे में—क्या बिना सेटिंग के चल सकता था इतना बड़ा गोरखधंधा?*_
_*मंदसौर-नीमच सीमा पर स्थित गांधी सागर डेम क्षेत्र के नाहरगढ़ थाना क्षेत्र के संजीत में करंट फैलाकर मछलियों और मगरमच्छों का अवैध शिकार—अब बड़ा खुलासा बनता जा रहा है। तीन तस्करों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन असली सवाल अब उठने लगे हैं—क्या सिर्फ छोटे खिलाड़ियों को पकड़कर बड़े संरक्षणदाताओं को बचाया जा रहा है?*_
_*जानकारों की मानें तो यह धंधा एक-दो दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय से संगठित तरीके से चल रहा था। ऐसे में बिना स्थानीय संरक्षण और मिलीभगत के इतना बड़ा खेल चलना नामुमकिन माना जा रहा है।क्या Nahargarh Police Station को इस अवैध शिकार की भनक नहीं थी?*_
_*अगर थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?*क्या संरक्षण देने वालों को बचाने के लिए जांच को सीमित किया जा रहा है?*आखिर किनके इशारे पर चल रहा था यह “करंट वाला काला कारोबार”?*मगरमच्छ जैसे संरक्षित जीवों की मौत कोई छोटी बात नहीं—यह सीधे-सीधे वन्यजीव कानूनों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। इसके बावजूद कार्रवाई सिर्फ पकड़-धकड़ तक सीमित रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।*ऊपर तक पहुंच” का खेल?*क्षेत्र में चर्चा है कि इस पूरे नेटवर्क के तार कहीं न कहीं ऊपर तक जुड़े हुए हैं, यही वजह है कि अब तक संरक्षण देने वाले चेहरे सामने नहीं आ पाए हैं।*_
*अधिकारियों के बयान हर बार की तरह वही—“जांच जारी है”… लेकिन जनता पूछ रही है*जांच कब पूरी होगी?*बड़े नाम कब सामने आएंगे*_
_*या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?*_
_*फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही—*_
_*क्या गांधीसागर में अवैध शिकार पर सख्ती सच में होगी, या फिर “छोटे मछली फंसाओ, बड़े मगरमच्छ बचाओ” वाला खेल चलता रहेगा?*_
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