*सेहत विचारणीय*
*खाद्य पदार्थों में मिलावट व इसके दुष्परिणाम*
स्वस्थ रहें मस्त रहे
प्रांतीय मीडिया प्रभारी दीप्ति कौर की रिपोर्ट
आजकल मिलावटखोरी का मुद्दा अपनी चरम सीमा पर है खाद्य पदार्थों में मिलावट होना वाकई एक बड़ी समस्या है, इससे न सिर्फ हमारी सेहत पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि ये हमारे विश्वास को भी तोड़ता है।जैसे कि दूध,दही घी पनीर मसाले फल सब्जी नास्ता मिठाइयां जंक फूड सभी में मिलावट का दौर चल रहा है अपनी थोड़ी सी आवक बढ़ाने व ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में आदमी ही आदमी की जान का दुश्मन बना हुआ है।मिठाई की दुकान और मावा बनाने वालों की मानो बाढ़ सी आ गई हो।जहां देखो वहां पर मिठाई की दुकान है और मावा बनाने के कारखाने देखने को मिल जाते हैं।सूत्रों के मुताबिक कहीं पर भी शुद्धता से नहीं बना रहे।शुद्धता का कोई प्रमाण भी नहीं है। ना शुद्धता की कोई पहचान करा रहे हैं।अभी हाल ही में शादियों का सीजन चल रहा है।शहर में कई जगह छैना का व्यापार चालू हो गया है।छैना भी इतनी मात्रा में बनेगा कि शादियों की बुकिंग होगी।वो भी 100 रू से लेकर 150 रू तक में होगी।सवाल ये पैदा होता है कि अगर शुद्घ दूध से बनाया जाए तो लागत लगभग इससे दोगुनी आएगी फिर इतनी कम कीमत में कैसे बिकेगा।
प्रशासन ऐसे लोगों पर लगातार निगरानी करवा रहा है लेकिन फिर भी मिलावटखोरों पर कोई असर नहीं हो रहा है।अगर शिकायत की आड़ में कार्यवाही करनी भी पड़े तो वो केवल दिखावे के लिए होती है।कार्यवाही केवल कागजों तक सीमित रह जाती है धरातल पर कुछ नहीं होता मामले को ले दे के रफा दफा कर दिया जाता है
इसका प्रमाण कई बार देखने को मिला है जब त्यौहार आते हैं तो संबंधित विभाग द्वारा कई जगह पर दविश देकर मिलावट खोरों के ऊपर कार्यवाही होती है लेकिन कार्यवाही अंत तक आमजन के सामने नहीं आ पाती है कि क्या आरोपियों पर कोई fir हुई है कि नहीं या फिर चालान हुआ कि नहीं।कई बार भिण्ड में बड़ी बड़ी कार्यवाही हुईं है लेकिन उन पर कोई तगड़ा चालान या फिर जेल तक की कार्यवाही नहीं होती है इसी कारण से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हो जाते है और वो फिर से थोड़ा सा चालान भर कर या फिर ले दे कर मिलावट का काम शुरू कर देते हैं।
दूध में मिलावट करने वाले पानी तक सीमित रहें तो ज्यादा समस्या नहीं है लेकिन पानी के साथ साथ लंबे समय तक सही रखने के लिए यूरिया झाग के लिए डिटर्जेंट व चिकनाई के लिए वनस्पति का उपयोग करते हैं जिससे दूध दूध नहीं वल्कि जहर बन जाता है फिर उसी दूध से दही घी और पनीर बनाई जाती है जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित होती है।नास्ता में भी बड़ा खेल है एक बार तेल को गर्म किया फिर वो महीनों तक चलता है जबकि खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा तेल जहर बन जाता है।मिठाइयों में कई तरह के कैमिकल का उपयोग कर उन्हें खुशबूदार बना दिया जाता है ताकि वो जल्दी खराब ना हों।
जंकफूड की अगर बात करें तो इनमें भी मिलावट का सिलसिला काफी हद तक है सबसे पहले इसमें रंग का मिलना बहुत खतरनाक है फिर उसमें कई जगह ऐसी हैं वहाँ पर धूल मिट्टी उड़कर आती है और जंकफूड को तुरंत के लिए और जायकेदार बना देती है।मजे की बात तो ये है कि खाने वाले भी इसको बड़े स्वाद और चाव से खाते हैं
अगर इसी प्रकार से ये मिलावट का खेल चलता रहा तो एक दिन यही चीज बहुत बड़ा खतरा बन जाएगी।इससे बचने के लिए या तो इसको खाना बंद करें या फिर घर पर शुध्दता से बनवा कर खायें।जिससे कई तरह की बीमारियों से बचाव होगा और स्वास्थ्य भी सही रहेगा।
इसको रोकने के लिए प्रशासन को कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए।मिलावट पाए जाने पर उनका लाइसेंस निरस्त कर भविष्य में उनके द्वारा इस प्रकार का धंधा करने पर भी रोक लगा देनी चाहिए
कई मावा व्यापारियों पर पहले मिलावट के प्रकरण दर्ज हैं उनको आगे इस कार्य को करने की अनुमति ही ना दी जाए इसके बाबजूद भी अगर वे ऐसा करते पाए जाते हैं। तो उन पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
आगे की खबर में कौन कौन मिलावट कर रहा है और कहाँ पर मिलावट हो रही है इस पर विस्तार से चर्चा होगी तब तक के लिए धन्यवाद
सतर्क रहो स्वस्थ रहो।
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