“ *विज्ञान के साथ खड़ा रहना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता” : विश्व स्वास्थ्य दिवस पर बीएमएचआरसी में विशेष कार्यक्रम*
भोपाल। से राधावल्लभ शारदा द्वारा संपादित रपट
भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में मंगलवार, 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आईसीएमआर—राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (एनआईआरईएच) के निदेशक डॉ. राजनारायण तिवारी एवं भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर संस्थान के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराग यादव सहित चिकित्सक, शोधकर्ता, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
डॉ. राजनारायण तिवारी ने कहा कि इस वर्ष की थीम “साथ मिलकर स्वास्थ्य – विज्ञान के साथ” अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भ्रामक सूचनाओं और अप्रमाणित उपचारों के कारण लोगों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में एविडेंस आधारित विज्ञान और चिकित्सा पद्धति ही समाज को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) एवं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) द्वारा विभिन्न बीमारियों के उपचार से संबंधित प्रमाण आधारित साक्ष्यों को एकत्र कर राष्ट्रीय स्तर पर उपचार संबंधी दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं, जिससे चिकित्सकों को वैज्ञानिक निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी लोगों का दायित्व है कि आमजन तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ-साथ सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सबसे बड़ी अपेक्षा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के व्यवहार से जुड़ी होती है, इसलिए सभी को संवेदनशीलता एवं विनम्रता के साथ मरीजों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन से चिकित्सा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और समय के साथ अद्यतन रहना आवश्यक है।
डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर द्वारा विभिन्न बीमारियों के लिए निर्धारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल को बीएमएचआरसी में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर संस्थान में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया तथा एचपीवी वैक्सीन के लिए हितग्राहियों का पंजीयन किया जा रहा है।
वन हेल्थ अप्रोच : भविष्य की महामारी से निपटने की कुंजी
डॉ. राजनारायण तिवारी ने “वन हेल्थ” अप्रोच को भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संभावित महामारियां मुख्यतः पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली (जूनोटिक) बीमारियों के रूप में सामने आ सकती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण मनुष्य और पशुओं के बीच संपर्क लगातार बढ़ रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है। यदि हम केवल मानव स्वास्थ्य पर ध्यान देंगे और पशु एवं पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी करेंगे, तो संक्रमण बार-बार उभरकर सामने आएंगे।
उन्होंने बताया कि इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा “राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन” प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरणीय कारकों के बीच समन्वय स्थापित कर बीमारियों की रोकथाम करना है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित क्षेत्रों के समेकित प्रयासों से ही संक्रामक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव
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