Breaking News

Bihar Politics। अमित शाह ने खोले सियासी पत्ते नीतीश कुमार और लालू यादव के बीच जारी सियासी रार

Bihar Politics। अमित शाह ने खोले सियासी पत्ते नीतीश कुमार और लालू यादव के बीच जारी सियासी रार
पटना से सुरेश रैना के साथ भोपाल से राधावल्लभ शारदा द्वारा संपादित रपट
पटना: बिहार इन दिनों राजनीतिक उठापटक की दौर से गुजर रहा है। इस उठापटक की सियासत में कंफ्यूजन पॉलिटिक्स का प्रवेश हो गया है। इस कंफ्यूजन पॉलिटिक्स के जनक बीजेपी के रणनीतिकार और देश के गृह मंत्री अमित शाह माने जा रहे हैं। दरअसल, बिहार की राजनीति में भाजपा वोट बैंक के धरातल पर अभी बैक फुट पर है। वजह भी साफ है। भाजपा के साथ जदयू है तो दो बड़े परिवर्तन देखे गए हैं। एक यह कि भाजपा जदयू की साथ की स्थिति में कुर्मी कुशवाहा लगभग 100 फीसदी एनडीए के पक्ष में हो जाते हैं। और दूसरा बड़ा परिवर्तन यह देखा गया है कि नीतीश कुमार जब भाजपा के साथ होते हैं तो अतिपिछड़ा वोट 80 फीसदी एनडीए के पक्ष में आ जाता है। इस वोट के बड़े अंतर का सकारात्मक असर भाजपा देख चुकी है और सत्ता में भागीदार भी रही है। बीजेपी को बिहार में बेहतर करना है तो दो ही रास्ते हैं या तो जदयू और भाजपा साथ आ जाए या फिर राजद और जदयू घोर कंफ्यूजन का शिकार हो। इनमें से कोई दल ऐसा निर्णय ले जो अपरोक्ष रूप से बीजेपी को फायदा पहुंचा सके।
अमित शाह ने एक तरफ जदयू के लिए भाजपा के सारे दरवाजे और खिड़कियां बंद होने की बात करते रहे, पर दूसरी ओर राजद और जदयू के बीच कंफ्यूजन पॉलिटिक्स को भी जन्म देते रहे। याद कीजिए 16 सितंबर 2023 को झंझारपुर में आयोजित जनसभा को। जिसमें अमित शाह ने नीतीश-लालू की जोड़ी को पानी और तेल का मिश्रण बताया था। फिर नीतीश कुमार को संबोधित करते हुए कहा था कि स्वार्थ कितना भी ऊपर हो, तेल और पानी कभी एक साथ नहीं हो सकता। उसमें तेल को कुछ नहीं गंवाना है। तेल पानी को ही गंदा करती है। अमित शाह के इस बयान के बाद ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि जदयू और राजद अलग होंगे। अमित शाह ने संकेत दे दिए हैं। संयोग कह लीजिए या इसे भी राजनीति का हिस्सा मान लीजिए कि अमित शाह के हमले का कोण लालू यादव का जंगलराज बनता रहा। नीतीश कुमार के प्रति सॉफ्ट ही रहे।
अमित शाह की कंफ्यूजन पॉलिटिक्स-2 की शुरुआत हुआ पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार के साथ। इस साक्षत्कार के दौरान जब गृहमंत्री अमित शाह से पूछा गया कि अगर कोई पुराने साथी, जो छोड़कर गए थे नीतीश कुमार आदि, ये आना चाहेंगे तो क्या उनके लिए रास्ते खुले हैं? इस सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा कि जो और तो से राजनीति में बात नहीं होती। किसी का प्रस्ताव होगा तो विचार किया जाएगा। अमित शाह के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया। राजनीतिक जगत में अमित शाह के इस जवाब को नीतीश कुमार को अपरोक्ष रूप से मिले आमंत्रण माना गया। अमित शाह के बयान के बाद फिर बिहार की राजनीति में प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गया।
पलटते रहे हैं नीतीश: मांझी
इस कंफ्यूजन पॉलिटिक्स का असर एनडीए में शामिल धड़ों में भी देखा गया। हद तो तब हो गया जब पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने उस नीतीश कुमार का विरोध नहीं करेंगे, जिन्होंने बिहार विधानसभा में उनको काफी खरी खोटी सुनाई। लेकिन तंज कसने से चुके नहीं। और कह डाला कि वैसे भी लालू यादव तो नीतीश कुमार को पलटूराम का टाइटल दे ही चुके हैं। दूसरी ओर लोजपा(आर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने के मुद्दे पर शालीन सी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब एनडीए में शामिल होंगे तो प्रतिक्रिया जरूर देंगे। हम चाहेंगे कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका का सार्थक निर्वहन करें।
राजनीतिक गलियारों में अमित शाह के इन बयानों को दो अर्थों में लिया जा रहा है। एक नीतीश कुमार अगर एनडीए में आना चाहते हैं तो स्वागत है। ऐसा इसलिए कि नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होते ही दो बड़े प्रभाव होंगे। एक तो इंडिया गठबंधन कमजोर होगा। वह इसलिए कि इसे गठबंधन के शिल्पकार का चले जाना माना जाएगा। दूसरा यह कि बिहार में वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव को दोहराया जा सकता है। कहा तो यह जा रहा है कि नीतीश कुमार पीएम नरेंद्र मोदी की पसंद है। हाल ही में जी-20 की बैठक में नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की नजदीकी के बाद इस धारणा को इसलिए बल मिला कि इंडिया गठबंधन के कई दल ने बहिष्कार किया था। दूसरी धारणा यह है कि नीतीश कुमार एनडीए में नहीं आते हैं तो राजद और जदयू के बीच इतना कंफ्यूजन पैदा करो कि अपरोक्ष रूप से दोनों दलों साथ रह कर भी साथ न रह सके। और इस कंफ्यूजन का फायदा अपरोक्ष रूप से एनडीए को हो।

About Mahadand News

Check Also

*-Center Government और प्रदेश सरकार की योजनाओं को हर घर तक पहुंचाकर जनकल्याण में योगदान करें*- अजय जामवाल*

*-Center Government और प्रदेश सरकार की योजनाओं को हर घर तक पहुंचाकर जनकल्याण में योगदान …