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महेश नवमी पर विशेष  क्षत्रिय शौर्य से व्यापारिक पुरुषार्थ तक की यात्रा का राज…भगवान महेश की कृपा से बना माहेश्वरी समाज…

महेश नवमी पर विशेष

क्षत्रिय शौर्य से व्यापारिक पुरुषार्थ तक की यात्रा का राज…भगवान महेश की कृपा से बना माहेश्वरी समाज…
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क्षत्रिय शौर्य से व्यापारिक पुरुषार्थ तक की यात्रा का राज…भगवान महेश की कृपा से बना माहेश्वरी समाज…मरुधरा की तपती रेत पर इतिहास ने नया अध्याय रचा था…धर्म , संयम और सेवा का दीपक घर – घर में सजा था…जब शक्ति की मद में मानवता का संतुलन डोल गया…ऋषियों का क्रोध जागा और वैभव का सूर्य अस्ताचल की जय बोल गया…तब पश्चाताप के अश्रुओं से तपस्या का विचार साकार हुआ…भगवान महेश की करुणा से एक नए युग का संचार हुआ…बहत्तर उमरावों ने जीवन की नई दिशा को अपनाया…शस्त्रों से श्रेष्ठ शास्त्र और व्यापार को बताया…युद्ध की विभीषिका छोड़ परिश्रम का वरण किया…धन कमाने के साथ – साथ लोकमंगल का सृजन किया…यही वह क्षण था जब इतिहास ने करवट ली…महेश की कृपा से माहेश्वरी समाज ने नवजीवन की आहट ली…व्यापार इनके लिए केवल लाभ का गणित नहीं रहा…सेवा , सद्भाव और संस्कारों का पथ परमार्थ हुआ लोभ नहीं रहा…जहां – जहां माहेश्वरी समाज पहुंचा , वहां समृद्धि के फूल खिले…विद्यालय , धर्मशालाएं , चिकित्सालय और सेवा के दीप मिले…दान की परंपरा ने समाज को गौरव दिया…कर्तव्य की भावना ने हर पीढ़ी को नया उदभव दिया…समय बदला , युग बदले , परिस्थितियां बदलती रहीं…लेकिन माहेश्वरी समाज की मूल चेतना सदैव जलती रही…ईमानदारी व्यापार की पहचान बनी…सामाजिक उत्तरदायित्व माहेश्वरियों की शान बनी…देश की अर्थव्यवस्था में योगदान का नया इतिहास लिखा…उद्योग , शिक्षा और संस्कृति में सफलता का परचम दिखा…वंशोत्पत्ति दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं अपने अस्तित्व पर गर्व है…यह अपने गौरवशाली अतीत को स्मरण करने का पवन पर्व है…यह नई पीढ़ी को बताने का अवसर है कि वंश केवल रक्त से नहीं चलता…संस्कार , सेवा और सदाचार से उसका गौरव पलता…पूर्वजों ने जो प्रतिष्ठा अर्जित की , उसे आगे बढ़ाना है…आधुनिकता के साथ संस्कृति का दीप जलाना है…माहेश्वरी समाज की एकता उसकी सबसे बड़ी पूंजी है…सेवा उसकी शक्ति है , संस्कार उसकी कुंजी है…यदि युवा पीढ़ी शिक्षा , उद्यम और सामाजिक सरोकार से जुड़ेगी…तो आने वाली शताब्दियों तक यह गौरवगाथा आगे बढ़ेगी…आओ , वंशोत्पत्ति दिवस पर संकल्प का नया दीप जलाएं…पूर्वजों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं…समाजहित , राष्ट्रहित और मानवहित को जीवन का मान बनाएं…भगवान महेश के आशीर्वाद से उन्नति का नया अभियान चलाएं…माहेश्वरी समाज का गौरव केवल इतिहास नहीं , प्रेरणा का प्रकाश है…सेवा , संस्कार और समर्पण की वास्तविक पहचान ही हमारा मुक्त आकाश है…
● प्रो.(डॉ.) श्याम सुन्दर पलोड
लेखक, कवि एवं वक्ता
इंदौर (म.प्र.)
स्वरदूत – 9893307800

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