अब हिन्दी या अंग्रेजी में भारत लिखा जायेगा इंडिया नहीं
दिल्ली से वेदप्रकाश रस्तोगी के साथ भोपाल से राधावल्लभ शारदा द्वारा संपादित रपट टिप्पणी – भारत भारत है अंग्रेजो ने इसे इंडिया किया आर एस एस का अभियान सफल होगा।
श्री मोहन भागवत ने कहा है कि भारत एक संज्ञा है।
विश्वविद्यालयों की डिग्री और मार्कशीट में अब ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’, आरएसएस से जुड़ा संगठन चला रहा अभियान
कुछ विश्वविद्यालयों ने अपने दस्तावेजों में भी ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखना शुरू कर दिया है। इसके लिए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।
नई दिल्ली ,
साइन बोर्ड में भी ‘इंडिया’ की जगह लिखा जा रहा ‘भारत’।
भारत के कई राज्यों में राज्य और केंद्रीय स्तर के विश्वविद्यालयों के द्वारा दी जाने वाली डिग्री, मार्कशीट कॉरेस्पोंडेंस, निमंत्रण पत्र और यहां तक कि साइन बोर्ड में भी ‘इंडिया’ शब्द को ‘भारत’ से बदला जा रहा है।
इस बारे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबंधित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास अभियान चला रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय है जहां पर दी जाने वाली सभी डिग्रियों पर अब ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखा होगा।
इस बारे में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति राजेश कुमार वर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनकी यूनिवर्सिटी के द्वारा दी जाने वाली सभी डिग्रियों और मार्कशीट में अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही ‘भारत’ लिखा होगा।
वर्मा ने कहा, ‘G-20 सम्मेलन में ‘भारत’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। हम भारत के लोग हैं और हमारे देश का असली नाम भारत है। ‘इंडिया’ शब्द बाद में आया इसलिए हमारी कार्यकारी परिषद ने सभी दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द का इस्तेमाल करने को लेकर प्रस्ताव पारित किया है।’
वर्मा ने बताया कि इस प्रस्ताव के लिए उनके विश्वविद्यालय को 2025 में प्रयागराज में हुए महाकुंभ में सम्मानित भी किया जा चुका है। यह पूछे जाने पर कि ऐसा करना क्यों जरूरी था, उन्होंने कहा कि क्योंकि यह देश सम्राट भरत की भूमि है इसलिए इसका वास्तविक नाम भारत ही है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का कहना है कि ऐसा करने वाला वह इस राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय के कुलपति राकेश सिंघाई ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘हमने सबसे पहले ऐसा प्रस्ताव पारित किया और हर जगह ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिख दिया है।’ कुलपति का कहना है कि हमने इस मामले में जो उदाहरण पेश किया, बाकी विश्वविद्यालय भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने भी लिया फैसला ।
ऐसा सिर्फ मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों में ही नहीं हो रहा है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय है, वहां पर भी ऐसा ही फैसला लिया गया है कि ‘इंडिया’ को ‘भारत’ से बदल दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार चक्रवाल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमने ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ शब्द का प्रयोग करने का फैसला लिया है। यह अभी मार्कशीट में नहीं दिखाई देगा लेकिन फैसला ले लिया गया है। देश का असल नाम ‘भारत’ है। इसे विदेशियों ने ‘इंडिया’ नाम दिया था। सभी विद्वानों का मानना है कि हमें इसे ‘भारत’ ही कहना चाहिए।”
कुलपति ने कहा कि पहले से छप चुकी मार्कशीट और डिग्रियों का स्टॉक खत्म हो जाने के बाद नई मार्कशीट और डिग्रियों पर ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखा होगा।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास चला रहा अभियान
इसके पीछे शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के द्वारा चलाया गया अभियान है। यह संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबंधित है। दीनानाथ बत्रा इस संगठन से जुड़े थे।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की शाखा भारतीय भाषा मंच की केंद्रीय एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य एमएल गुप्ता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि न्यास की ओर से ‘इंडिया’ शब्द को ‘भारत’ से बदले जाने को लेकर काफी बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा चुका है।
एमएल गुप्ता ने तर्क दिया कि किसी भी देश या व्यक्ति के दो नाम नहीं होने चाहिए। गुप्ता ने कहा कि देश का वास्तविक नाम भारत है लेकिन इसे अंग्रेजों के आने के बाद ‘इंडिया’ नाम से जाना जाने लगा और यह नाम सिंधु नदी से लिया गया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिशों ने इस शब्द का इस्तेमाल अपमानजनक अर्थ में किया तो हमें इसे क्यों बरकरार रखना चाहिए?
गुप्ता ने “इंडिया नहीं भारत” नाम से एक किताब भी लिखी है, जिसमें वे लिखते हैं, “हजारों वर्षों से हमारे राष्ट्र का नाम भारत रहा है। लेकिन आजादी के बाद, संविधान के अनुच्छेद 1 में हमारे देश को इंडिया कहा गया जो कि भारत है। इतिहास देखें तो यूरोपियों के आने से पहले कहीं भी इंडिया नाम नहीं मिलता।” वे कहते हैं, “ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान, विदेशी शासकों ने हमारे देश के लिए ‘इंडिया’ शब्द का प्रयोग किया। आजादी के बाद भी, विदेशी प्रभुत्व और पराधीनता के कारण संविधान बनाते समय भारत के साथ-साथ इंडिया शब्द का प्रयोग किया जाता रहा।”
17 विश्वविद्यालयों में प्रस्ताव पारित
गुप्ता ने अपनी किताब में दावा किया है कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र के 17 अलग-अलग विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों ने प्रस्ताव पारित किए हैं कि वे दफ्तर के काम काज में केवल ‘भारत’ शब्द का ही प्रयोग करेंगे।
ग्वालियर स्थित राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलपति स्मिता सहस्रबुद्धे ने बताया कि यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद ने भी अपने दस्तावेजों में ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ का प्रयोग करने का फैसला लिया है क्योंकि वे न्यास के प्रतिनिधिमंडल द्वारा दिए गए तर्कों से पूरी तरह सहमत थे। उन्होंने कहा, “हिंदी को राष्ट्रभाषा कहा जाता है, इसलिए ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ का प्रयोग किया जाना चाहिए। जैसे ही हमारी पुरानी मार्कशीट खत्म हो जाएंगी, नई मार्कशीट और डिग्रियों में ‘इंडिया’ की जगह पर ‘भारत’ लिखा जाएगा।”
‘भारत’ को ‘भारत’ ही रखें- भागवत
2025 में कोच्चि में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन ज्ञान सभा को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था, “भारत एक संज्ञा है। इसका अनुवाद ‘इंडिया ही भारत है’ के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। यह सच है। लेकिन भारत, भारत है। इसीलिए, बातचीत के दौरान, लिखते या बोलते समय, चाहे व्यक्तिगत हो या सार्वजनिक, हमें ‘भारत’ को ‘भारत’ ही रखना चाहिए।”
भारतीय संविधान में देश के लिए ‘इंडिया’ और ‘भारत’ दोनों का प्रयोग किया गया है, जिसके कारण इसे अंग्रेजी में इंडिया और हिंदी में भारत कहा जाता है।
2023 में, G-20 रात्रिभोज के निमंत्रण में द्रौपदी मुर्मू को भारत की राष्ट्रपति के रूप में संबोधित किया गया था। 2026 के गणतंत्र दिवस पर
आधिकारिक ज्ञापन दो भाषाओं में था – इसमें केंद्र सरकार को भारत सरकार के रूप में संबोधित किया गया था।
नरेंद्र मोदी सरकार आधिकारिक कामों में ‘भारत’ और ‘इंडिया’ दोनों का उपयोग करती है, जिसमें मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसी कुछ प्रमुख योजनाओं में ‘इंडिया’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
‘ आर एस एस को सबसे गलत समझा जाता है…’
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, लेकिन इसे सबसे ज्यादा गलत समझा जाता है।
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