*प्रखर – वाणी*
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भोपाल से प्रांतीय मीडिया प्रभारी दीप्ति कौर की रपट
नीट यूजी के पेपर लीक से सबक लो…जीवनोपयोगी शिक्षा के घोटालेबाजों थोड़ा जक लो… ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
नीट यूजी के पेपर लीक से सबक लो…जीवनोपयोगी शिक्षा के घोटालेबाजों थोड़ा जक लो…शिक्षा मंदिर की पवित्रता को बना दिया बाजार…नकल माफियाओं का बढ़ गया है व्यापार…मेहनत करने वाला छात्र रोता है…जुगाड़ वाला रातों – रात हीरो होता है…कोचिंग की गलियों में सपने बिकते हैं…दलाल इनको चकनाचूर करने की इबारत लिखते हैं…किताबों में नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाता है…परीक्षा में ईमानदारी को दफनाया जाता है…मां की चूड़ियां बिकीं , पिता का पसीना बहा…बेटे ने दिन – रात पढ़ा, फिर परीक्षा निरस्ती का दर्द सहा…क्योंकि कहीं किसी कमरे में प्रश्नपत्र की बोली लगी थी…प्रतिभा को लीलकर बेईमानों की आत्मा जगी थी…अरे ! यह केवल पेपर लीक नहीं , विश्वास का रिसाव है…यह युवाओं के भविष्य पर किया गया गहरा घाव है…जिस देश की युवा शक्ति छल से हार जाएगी…वहां की संवेदनशील मेघा दर – दर की ठोकरें खाएगी…डिग्री बढ़ रही हैं , ज्ञान घट रहा है…शिक्षा का सूरज भी धुंध के आगोश में छंट रहा है…गुरुकुल की गरिमा कोचिंग की फीस में फंसी है…विवेकशील प्रतिभा की कलम भ्रष्टाचार की नागिन ने डसी है…कोई डॉक्टर बनेगा , कोई इंजीनियर कहलाएगा…पर अगर प्रगति के महल की नींव में छल होगा तो समाज क्या पाएगा…? जिसने नकल से प्रवेश पाया है…उसने व्यवस्था पर कलंक लगाया है…विद्यालयों में जीवन कौशल का पाठ पढ़ाओ…अंक नहीं , चरित्र की खेती करवाओ…प्रतिस्पर्धा में परिश्रम का सम्मान हो…हर विद्यार्थी का जिंदा स्वाभिमान हो…कागज लीक होने से पहले नीयत हुई लीक…कुछ लोगों की आत्मा नोटों में गई बिक…शिक्षा को फिर से संस्कारों से जोड़ना होगा…हर घोटालेबाज का मुखौटा तोड़ना होगा…युवा पूछ रहा है , मेरी मेहनत का मूल्य कहां है…? मेरे ईमानदार संघर्ष का प्रतिफल कहां है…? सरकार , समाज और व्यवस्था सबको जागना होगा…शिक्षा व्यापार की तरफ नहीं , राष्ट्र निर्माण की तरफ भागना होगा…वरना आने वाला इतिहास यही लिखेगा…प्रतिभा रोती रहेगी और तंत्र मंत्र बिकेगा…अपनी जेब में अय्याशी के मनचलों…युवाओं के सपनों को मत कुचलो…इंसान न सही भगवान के दण्ड से डरो…राष्ट्र का मेरुदंड बनती प्रतिभा को छलनी मत करो…
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