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आदि उत्सव जनजातीय गौरव, संस्कृति और उद्यमिता का संगम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आदि उत्सव जनजातीय गौरव, संस्कृति और उद्यमिता का संगम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
रामनगर में आयोजित आदि उत्सव से वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
जनजातीय समुदाय का यह कार्यक्रम लोगों के लिये उत्सव है: केन्द्रीय मंत्री श्री जुएल ओरांव
आदि उत्सव अब राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय अस्मिता व संस्कृति के प्रतीक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा: मंत्री श्रीमती संपतिया उइके
आदि उत्सव भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम: सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते

प्रांतीय मीडिया प्रभारी दीप्ति कौर की रपट
मंडला जिले के रामनगर में आयोजित आदि उत्सव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक से यह आयोजन जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव हमारी प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वैभवशाली विरासत को सहेजने के साथ-साथ आधुनिक उद्यमिता के माध्यम से उसे नए आयाम देने का सशक्त मंच बन रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो होली और दीपावली एक साथ आ गई हों। उन्होंने मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, सिवनी, उमरिया और छिंदवाड़ा अंचल से पहुंचे गोंड एवं बैगा समाज के भाई-बहनों का वर्चुअल स्वागत करते हुए आयोजन की भव्यता की सराहना की। उन्होंने कहा कि आदि उत्सव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विरासत से विकास” के संकल्प को साकार करने वाला आयोजन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस आयोजन के लिए लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके, सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते तथा सभी सहयोगियों को बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संजय कुशराम, अमरवाड़ा विधायक श्री कमलेश शाह, नगरपालिका अध्यक्ष श्री विनोद कछवाहा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कमलेश तेकाम, वरिष्ठ समाजसेवी श्री प्रफुल्ल मिश्रा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री नीरज मरकाम, श्री पंकज तेकाम, श्रीमती कामिनी शाह, श्री श्रवण परते, सरपंच श्रीमती सकुन मरावी, सरपंच श्रीमती विमला उइके, प्रदेश तथा देश के अन्य हिस्सों से आए 24 राज परिवार के सदस्य मंचासीन थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदि उत्सव ने वर्ष 2016 से निरंतर आयोजन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और यह आयोजन सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रहा है। उन्होंने यहाँ उपस्थित कलाकारों, कारीगरों और उद्यमियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा जनजातीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को नई पहचान दे रही है। यह उत्सव जनजातीय बोली-भाषाओं को सहेजकर नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। मंडला की गोंडी और बैगा मातृबोलियों के संरक्षण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मांदल, गुदुम बाजा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों और खगला जैसे पारंपरिक आभूषणों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य भी इस आयोजन के माध्यम से किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडला का गोंड आर्ट, कर्मा, सैला और रीना नृत्य तथा बैगा समाज का परधोनी नृत्य जनजातीय संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कोदो-कुटकी सहित अन्य मोटे अनाजों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए विशेष अभियान चलाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव जनजातीय महापुरुषों और वीर नायकों बिरसामुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्याभील, राजा शंकरशाह, कुंवर रघुनाथशाह, दलपतशाह की शौर्य गाथाओं का स्मरण कराने वाला प्रेरणादायी मंच भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ने और जनजातीय महापुरुषों के वंशजों का सम्मान करने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है तथा यह आयोजन जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम के पूर्व अतिथियों द्वारा राज स्तम्भ में ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्वलन भी किया गया। साथ ही मोतीमहल परिसर में स्थित शिलालेख पर जनजातीय संस्कृति की परंपरा अनुसार पूजन किया गया।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओरांव ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि गोंडवाना राजवंश के इस ऐतिहासिक महल का जीर्णाेद्धार कराने के बाद वर्ष 2016 से लगातार यह आदि उत्सव आयोजित किया जा रहा है। जनजातीय गौरव को सम्मान देने की पहल सबसे पहले पूर्व प्रधानमन्त्री श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी, जब 1999 में उन्होंने पहली बार जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। मुझे इस मंत्रालय के कामकाज का जिम्मा सौंपा। मंडला के इस महल के जीर्णाेद्धार के लिए मंत्रालय ने 1.97 करोड़ रुपये स्वीकृत किये। आज प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, प्रधानमंत्री जनमन, आहार अनुदान, विभिन्न छात्रवृतियाँ, जनजातीय बच्चों की उच्च शिक्षा जैसे अनेक काम जनजातीय समाज के कल्याण के लिए किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय का यह कार्यक्रम लोगों के लिये उत्सव है। इस उत्सव में परंपरागत नृत्य-गायन जैसे हमारी संस्कृति की पहचान को बढ़ावा मिलता है। हमारी युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को जानने और समझने का यह एक अच्छा अवसर होता है। उन्होंने कहा कि हमारी हार्दिक इच्छा है कि आगे भी आदि उत्सव का इसी तरह आयोजित होता रहे।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके ने अपने उद्बोधन में कहा कि रामनगर का ‘आदि उत्सव’ अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और गौरव के प्रतीक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत गोंडी बोली में करते हुए जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि रामनगर स्थित मोती महल किला हमारी ऐतिहासिक धरोहर और गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। यह स्थल गोंडवाना इतिहास, संस्कृति और शौर्य की अनेक स्मृतियों को अपने भीतर समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि इसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से यहां आकर्षक एवं भव्य आयोजन करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि ‘आदि उत्सव’ की शुरुआत वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते के विशेष प्रयासों से की गई थी। आज यह आयोजन एक बड़े उत्सव के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसमें जनजातीय संस्कृति, लोक कला, परंपराओं और इतिहास का भव्य प्रदर्शन किया जा रहा है। यह आयोजन आने वाली भावी पीढ़ियों को समर्पित है, ताकि युवा अपनी जड़ों, विरासत और इतिहास को समझ सकें। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और परंपराओं को संजोकर रखना अत्यंत आवश्यक है। हमारी सांस्कृतिक पहचान ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और ‘आदि उत्सव’ उसी पहचान को सशक्त करने का माध्यम बन रहा है।
रामनगर में आयोजित ‘आदि उत्सव’ के दौरान सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह आयोजन जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर आज तक राज परिवार, पंडा, पुजारी एवं भूमका समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्होंने जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है।
सांसद श्री कुलस्ते ने कहा कि गोंडवाना साम्राज्य के महान राजा हृदय शाह और वीरांगना रानी दुर्गावती का इतिहास जनजातीय गौरव और शौर्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगलों के विरुद्ध युद्ध लड़कर अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय दिया था। आज आवश्यकता है कि समाज विशेषकर युवा पीढ़ी अपने इतिहास, संस्कृति और वीर गाथाओं को जाने तथा उनसे प्रेरणा ले। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री जुएल ओरांव के नेतृत्व में देशभर में जनजातीय वीर नायकों से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का चयन कर उन्हें नई पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों से जनजातीय इतिहास और गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘आदि उत्सव’ केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से जनजातीय समाज की लोक कला, परंपराएं, भाषा और सांस्कृतिक धरोहर को व्यापक स्तर पर पहचान मिल रही है। आयोजन में पारंपरिक लोक नृत्य, जनजातीय कला और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया गया, जिससे जनजातीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। सांसद श्री कुलस्ते ने बताया कि उत्सव के अंतर्गत संगोष्ठी का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें गोंडवाना साम्राज्य, जनजातीय इतिहास, लोक संस्कृति और वीर नायकों के योगदान पर विस्तार से होगी। इसमें आप सब शामिल होकर ऐतिहासिक संस्कृति के बारे में अवश्य जानें। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है।
कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा राज परिवार के सदस्यों का कोया फूलमाला एवं साफा पहनाकर स्वागत किया गया। साथ ही जनजातीय प्रतिभाओं का भी सम्मान मंच से किया गया। इसमें पद्यश्री से सम्मानित श्री अर्जुन सिंह धुर्वे, श्री भज्जू सिंह श्याम, श्रीमती ऊषा वागले शामिल रहे। इसके अलावा खेलो इंडिया एवं खेलो एमपी, कक्षा दसवी एवं कक्षा बारहवी में प्रदेश के मेरिट में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।

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