Police हुई मर्जी की मालिक गृह विभाग और, पुलिस महानिदेशक के आदेश की धज्जियां उड़ाते हैं।
महादण्ड संवाददाता की रपट।
भोपाल – असेंबली आफ एमपी जर्नलिस्ट्स के प्रांतीय अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए डी जी पी को भेजा संदेश। पुलिस की मनमानी रोकने के लिए पिछले कई सालों से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग की जा रही है इस विषय पर जनसंपर्क विभाग ने पत्रकार संगठनों से चर्चा और सुझाव मांगे गए थे, लगता है कि सरकार की मर्जी तो है परन्तु प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी है जिस तरह शासकीय आवास में निवासरत पत्रकारों के आवास नवीनीकरण की स्थिति है।
असेंबली आफ एमपी जर्नलिस्ट्स के प्रांतीय अध्यक्ष ने इस मामले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को अवगत कराया है।
पत्रकार पर एफ आई आर से मचा बवाल: नियमों को दरकिनार कर गाडरवारा पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
नरसिंहपुर जिले के
गाडरवारा थाना क्षेत्र में पत्रकार विनोद कौरव के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामला सिर्फ एक आपराधिक शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया और पुराने सरकारी निर्देशों की अनदेखी को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, 16 अप्रैल 2026 को थाना गाडरवारा में एफ आई आर क्रमांक 0443/2026 दर्ज की गई, जिसमें विनोद कौरव पर बीमा क्लेम की राशि में से 5 लाख रुपये मांगने, गाली-गलौज और धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता शिवकुमार कौरव ने आरोप लगाया कि दबाव और धमकी के चलते उनकी पत्नी ने जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद असेंबली आफ एमपी जर्नलिस्ट्स ने पुलिस की कार्रवाई पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश गृह (पुलिस) विभाग के वर्ष 2010 के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद, चालान पेश करने से पहले पुलिस अधीक्षक और डीआईजी स्तर पर साक्ष्यों की समीक्षा अनिवार्य है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कहीं दुर्भावनावश या तकनीकी आधार पर प्रकरण दर्ज कर पत्रकार को परेशान तो नहीं किया जा रहा।
“बिना जांच कार्रवाई?”
पत्रकार संगठनों का आरोप है कि इस मामले में प्रारंभिक स्तर पर ही इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए सीधे गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया गया। उनका यह भी कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना इस तरह की कार्रवाई पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े करती है।
जहर पर भी उठे सवाल
मामले में एक और बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि शिकायतकर्ता के घर में कथित रूप से जहरीला पदार्थ मौजूद कैसे था। क्या यह महज संयोग है या फिर पूरे मामले में कोई और पहलू भी छिपा है—इस पर भी जांच की मांग तेज हो गई है।
गिरफ्तारी पर रोक की मांग
पत्रकार संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि निष्पक्ष जांच पूरी होने तक विनोद कौरव की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। साथ ही, यदि मामला दुर्भावनावश पाया जाता है, तो संबंधित धाराओं को खत्म करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग उठ रही है।
पुलिस की भूमिका पर नजर
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मामले में विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए निष्पक्षता से जांच सुनिश्चित करते हैं या नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं, या फिर वास्तव में उनका पालन भी किया जाएगा।
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