करंट माफिया पर मेहरबानी! आरोपियों को पकड़कर भी “सरंक्षक” बेखौफ — नाहरगढ़ थाना फिर सवालों में*_
_*मंदसौर जिले के नाहरगढ़ थाना क्षेत्र में अवैध मछली शिकार का खेल अब सिर्फ पानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सिस्टम तक गहराई से पैठ बना चुका है। करंट लगाकर मछलियों और मगरमच्छों का शिकार करने वाले आरोपियों पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन असली “सरंक्षक” अब भी खुलेआम घूम रहे हैं — जैसे उन्हें किसी का डर ही नहीं।*_
_*संजीत से मंदसौर रोड तक रेतम इलाके से लेकर चंबल-शिवना संगम तक पिछले कई सालों से बाहरी मछुआरों के जरिए करंट से मछली मारने का गोरखधंधा चल रहा है। हैरानी की बात ये है कि इस पूरे खेल की भनक थाना स्तर से लेकर पहरेदारों तक को थी, फिर भी हर बार मामला “देखेंगे” कहकर दबा दिया गया।*_
_*हाल ही में वायरल हुए वीडियो ने पूरे महकमे की नींद जरूर उड़ाई, जिसके बाद पुलिस ने उपकरण सहित तीन आरोपियों को पकड़ लिया। लेकिन सवाल वहीं खड़ा है — जब सूचना चार आरोपियों की थी, तो चौथा कहां गायब हो गया? और उससे भी बड़ा सवाल, पश्चिम बंगाल से आए लोगों को यहां तक लाने और संरक्षण देने वाले चेहरे अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं?*_
_*वीडियो वायरल के बाद मगरमच्छ को करंट लगने मामले मे वन विभाग टीम भी मोके पर पहुंची शाम तक करंट लगने से मगरमच्छ की मृत्यु हुई थी वो मगर मोके से घायब मिला वही वन विभाग टीम लगातार मगरमछ को ढूढ़ने का प्रयास कर रही है*_
_*पुराना खेल, नई पटकथा! यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अवैध मछली परिवहन के दौरान जवानों द्वारा पकड़े गए लोगों को आधी रात थाने से आए फोन के बाद मौके से छोड़ दिया गया था। सूत्र बताते हैं कि “सेटिंग” के इस खेल में एक “पायलट” नाम भी सामने आ चुका है, लेकिन उस पर कभी हाथ नहीं डाला गया।*_
_*कुछ दिन पहले शिवना किनारे एक ब्लू कलर की गाड़ी द्वारा लोडेड वाहन का पीछा करने का मामला भी सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर लेन-देन कर मामला रफा-दफा कर दिया गया।*_
_*थानेदार या दर्शक? स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना अब “पहरेदारों के भरोसे” चल रहा है और थानेदार सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अवैध कारोबार को मौन सहमति मिली हुई है?*_
_*अब निगाहें ऊपर के अफसरों पर वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई का दिखावा तो हुआ, लेकिन असली परीक्षा अब है — क्या उच्च अधिकारी इस पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करेंगे? क्या सरंक्षण देने वालों तक कानून पहुंचेगा या फिर एक बार फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?*_
_*क्योंकि यहां सवाल सिर्फ मछलियों का नहीं, सिस्टम की नीयत का है।*_
प्रांतीय मीडिया प्रभारी दीप्ति कौर की रपट
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