दीप्ति कौर की रिपोर्ट
दिनांक: 26 मार्च 2026
*12 से 18 वर्ष की आयु गर्भ संस्कार का पहला पड़ाव: डॉ. मधुरा उदय कुलकर्णी*
– _किशोरावस्था से ही पोषण, हीमोग्लोबिन, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली पर ध्यान जरूरी; विशेषज्ञों ने गर्भसंस्कार के वैज्ञानिक पहलुओं पर डाला प्रकाश_
*भोपाल* | भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) के करोंद स्थित स्वास्थ्य केंद्र-7, करोंद में गुरूवार को “गर्भ संस्कार का महत्व” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जानी-मानी आयुर्वेदाचार्य एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुरा उदय कुलकर्णी उपस्थित रहीं। वहीं शहर की स्त्री रोग एवं भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. स्मिता ढेंगले विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थी। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में आरोग्य भारती संस्था से श्री मिहिर कुमार भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर डॉ. मधुरा उदय कुलकर्णी ने कहा कि 12 से 18 वर्ष की आयु गर्भ संस्कार का पहला पड़ाव होती है, इसलिए इस उम्र से ही बालिकाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस आयु वर्ग की बालिकाओं का हीमोग्लोबिन 12 से कम नहीं होना चाहिए, अन्यथा भविष्य में गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं एवं गर्भपात की संभावना बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि पीसीओडी जैसे हार्मोनल विकार और मोटापा भी भविष्य में गर्भावस्था संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सलाह दी कि संतान उत्पत्ति की चाह रखने वाली महिला को गर्भधारण से तीन माह पूर्व ही फोलिक एसिड का सेवन शुरू कर देना चाहिए, जिससे शिशु के मस्तिष्क विकास में मदद मिलती है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के लिए सकारात्मक वातावरण, योग, अनुलोम-विलोम एवं ओंकार मेडिटेशन को भी अत्यंत लाभकारी बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. स्मिता ढेंगले, स्त्री रोग एवं भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञ ने कहा कि किशोरावस्था शारीरिक विकास का महत्वपूर्ण समय होता है, इसलिए इस दौरान पोषण, मासिक धर्म स्वच्छता (मेनस्ट्रुअल हाइजीन) और नियमित चिकित्सकीय परामर्श पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर भी जोर देते हुए महिलाओं को संतुलित आहार, योग एवं नियमित व्यायाम अपनाने की सलाह दी।
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि गर्भ संस्कार को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखना चााहिए, बल्कि इसके वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी लाभों के दृष्टिकोण से समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि मां के खान-पान, मानसिक स्थिति, सकारात्मक सोच, संगीत, योग एवं प्राणायाम का शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पिछले वर्ष केंद्र सरकार द्वारा संचालित स्वस्थ्य नारी सशक्त भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। बीएमएचआरसी द्वारा प्रत्येक माह इस प्रकार के आयोजन किए जाएंगे तथा आंगनवाड़ी केंद्रों एवं गैस पीड़ित महिलाओं को भी इन कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।
कार्यक्रम में बीएमएचआरसी के स्वास्थ्य केंद्रों की समन्वयक डॉ. रोमा रस्तोगी, डॉ. रचिता चंसौरिया, डॉ. नेहल शाह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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