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*Madhya Pradesh में बकफ के नाम हुई जमीनों में सरकारी स्कूल, पुलिस थाना, वन भूमि और यहां तक कि बैंक में गिरवी रखी जमीन भी शामिल हैं.*

*Madhya Pradesh में बकफ के नाम हुई जमीनों में सरकारी स्कूल, पुलिस थाना, वन भूमि और यहां तक कि बैंक में गिरवी रखी जमीन भी शामिल हैं.*

भोपाल से राधावल्लभ शारदा द्वारा संपादित रपट टिप्पणी के साथ – यदि लोक सभा और विधान सभा में सी ए जी रिपोर्ट नहीं रखी जाती तो पता नहीं चलता कि ये सरकारी नोकर चाकर अपनी जेब भरने के लिए क्या क्या न कर देते। मोहन सरकार को चाहिए कि जब ये सम्मपतियां बकफ के नाम हुई तब कौन कौन बावू से लेकर अधिकारी उस समय कार्यरत थे सभी पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए और उनके पास या उनके नाम या परिवार के नाम है जप्त करना चाहिए। यदि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है तो फिर जांच एजेंसियों द्वारा जांच शुरू करने के लिए जितने प्रकरण विचाराधीन है उसे अनुमति देना चाहिए जैसे राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने 2022 में समाचार पत्रों से संबंधित मामले की जांच की अनुमति मांगी है जो अभी तक नहीं मिली है।

सी ए जी की रिपोर्ट ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी है. सी ए जी की ऑडिट में यह खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को ‘वक्फ संपत्ति’ घोषित कर दिया गया है।

भोपाल के मिसरोद में सरकारी स्कूल की जमीन पर वक्फ का दावा.
भोपाल के मिसरोद में सरकारी स्कूल की जमीन पर वक्फ का दावा
भोपाल
मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. CAG की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

ऑडिट के मुताबिक, 2018 से 2023 के बीच 20 जिलों में करीब 77 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को नियमों को दरकिनार कर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया गया
जांच में शामिल 81 में से 33 संपत्तियां सरकारी निकलीं जहां स्कूल, पुलिस थाना, वन भूमि और यहां तक कि पट्टे की जमीन भी शामिल है. रिपोर्ट ने जिला प्रशासन की शिथिलता और वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं, वक्फ बोर्ड ने भी सफाई दी है, जबकि कांग्रेस ने इसे मिलीभगत और भ्रष्टाचार का मामला बताया है.
वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण को लेकर संवैधानिक और प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है. सी ए जी की 2018 से 2023 तक की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश के 20 जिलों में 77 करोड़ 7 लाख रुपये की सरकारी जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया गया. सीएजी ने जब जांच की तो पाया कि 81 संपत्तियों में 33 संपत्तियां यानी करीब 41% असल में सरकारी जमीन निकली
इन जमीनों में स्कूल, पुलिस थाना, वन भूमि और यहां तक कि बैंक में गिरवी रखी जमीन भी शामिल हैं. राजस्व रिकॉर्ड में ये जमीनें राज्य सरकार के नाम दर्ज थीं. सामुदायिक उपयोग के लिए आरक्षित थीं लेकिन औकाफ रजिस्टर में इन्हें वक्फ संपत्ति बना दिया गया. इन्हीं में से एक है भोपाल के संजय नगर की मस्जिद.
– भोपाल के संजय नगर, लेंदिया तालाब में 19.80 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली भूमि को मध्य प्रदेश शासन द्वारा जून 1994 में 30 वर्ष के पट्टे पर एक पट्टेदार को हस्तांतरित किया गया था.
– पट्टे की शर्तों में अन्य बातों के अलावा यह निर्धारित किया गया था कि भूमि का स्वामित्व शासन के पास रहेगा, जो हस्तांतरणीय नहीं है, और आवासीय उद्देश्य के अलावा किसी अन्य उपयोग
की अनुमति नहीं है.
– इसके अलावा, शर्तों में यह भी निर्धारित किया गया था कि यदि पट्टे की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो पट्टा रद्द किया जा सकता है.
– सी ए जी ‌ने देखा कि एक आवेदक ने अगस्त 2021 में उपरोक्त संपत्ति को ओक़ाफ़ पंजी में वक्फ के रूप में पंजीकृत करने के लिए बोर्ड में आवेदन दिया.
– पट्टेदार ने इस संपत्ति को धार्मिक उद्देश्य के लिए दान कर दिया, जो पट्टे की शर्तों का उल्लंघन था.
– बोर्ड ने अप्रैल 2022 में इस संपत्ति को अधिनियम की धारा-36 के तहत ओक़ाफ़ पंजी में दर्ज कर लिया, जिससे अहस्तांतरणीय शासकीय संपत्ति का वक्फ के रूप में अनियमित पंजीकरण हुआ.
– शासन ने अपने उत्तर में बताया कि उक्त भूमि एक पुरानी मस्जिद थी, जिसे उस समय पंजीकृत नहीं किया जा सका.
– स्थानीय निवासियों ने मस्जिद का नवीनीकरण किया है, और नवीनीकृत मस्जिद का अनुमानित क्षेत्रफल 530.83 वर्ग फीट है.
– वर्ष 2022 में, वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार 19.80 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली पट्टे की भूमि को भी मस्जिद में शामिल किया गया.
– यह भूमि वक्फ के अवैध कब्जे में है क्योंकि यह पट्टे की संपत्ति है और इसे शासन द्वारा अपने अधीन लिया जाना चाहिए.
– इसमें शामिल वक्फ अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही तय किया जाना आवश्यक है
*भोपाल के ही मिसरोद इलाके में भी हैरान करने वाला मामला सी ए जी ने पकड़ा*
मिसरोद में 3,600 वर्ग मीटर जमीन को नवंबर 2022 में वक्फ संपत्ति दर्ज कर दिया गया यह कहते हुए कि वह पहले कब्रिस्तान थी. जबकि उसी जमीन पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और मिसरोद थाना मौजूद है. स्थानीय लोगों, तहसीलदार और थाना प्रभारी ने आपत्ति दर्ज कराई. बोर्ड की अपनी जांच में भी जमीन के‌ कब्रिस्तान होने की पुष्टि नहीं हुई फिर भी पंजीकरण हो गया. सी ए जी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अंतिम प्रविष्टि से पहले राजस्व विभाग से कोई पत्राचार नहीं किया गया ।
पूरे मध्यप्रदेश में सी ए जी ने ऐसी कई संपत्तियों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया जिनमें-

– विदिशा जिले में हलाली डैम इलाके के सुलुस गांव में 410 वर्गमीटर वन भूमि
– सीहोर जिले के पानबिहार गांव 4006 वर्गमीटर जमीन पर कब्रिस्तान
– धार की गुलमोहर कॉलोनी, इस्लामपुरा में 668.90 वर्गमीटर भूमि पर मदरसा और धार्मिक संरचना शामिल है.
ऐसी करीब 33 संपत्तियां है जिनपर सी ए जी ने लिखा है और आपत्ति जताई है. सिर्फ यही नहीं सी ए जी ने इन क्षेत्रों के जिला कलेक्टरों के “शिथिल रवैये” और वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं जिसके बाद अब मध्यप्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कलेक्टरों को जांच के निर्देश देते हुए कहा है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी

सी ए जी की रिपोर्ट ने प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या यह महज लापरवाही है या फिर सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड के साथ सुनियोजित खेल?

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