News Paper मालिकों के द्वारा पत्रकार संगठन के समाचार प्रकाशन पर रोक या भोपाल के पत्रकार पीले चाबंल का इंतजार करते रहे।
कार्यक्रम तो होते हैं उनका प्रकाशन बड़े समाचार पत्रों में हुआ या नहीं कोई फर्क नहीं पड़ता।लेकिन मालिकों और पत्रकारों ने इस आयोजन के समाचार प्रकाशित न कर मुशिबत ले ली ,
अब मैं समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार किस पत्रकार ने लिखा उसकी जानकारी जनसंपर्क विभाग से लूंगा फिर श्रम विभाग के माध्यम से उस पत्रकार का नियुक्ति पत्र मांगूंगा।
नये श्रम कानून में पहली शर्त है कि संस्थान में कार्यरत प्रत्येक श्रमिक को नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य है।
जब ये दो बातें मांगी जाती है तो पहला समाचार पत्रों के मालिकों को नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य होगा।
या फिर उन पत्रकारों को संस्थान बाहर का रास्ता दिखा देगा ।*
जो भी अपने आप को पत्रकार कहता है क्या बह समाचार एकत्रित करने के लिए पीले चाबंल या निमंत्रण पत्र का इंतजार करता है या फिर किसी के द्वारा लिखे गए समाचार को जिस समाचार पत्र में काम करता है उसमें प्रकाशन करने के लिए दें देता है।
मुझे तो यही लगता है। और एक बात यह भी हो सकती है कि समाचार पत्रों के मालिकों ने समाचार प्रकाशन पर रोक लगाई।
पत्रकार संगठन का प्रांतीय अधिवेशन हुआ उसमें पत्रकारों एवं छोटे समाचार पत्रों के हितों के लिए चर्चा हुई, अतिथियों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए और आश्वासन दिया कि पत्रकारों की मांगों को प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव के पास रख कर निदान कराने का प्रयास करेंगे।
*पत्रकार समाज का सजग प्रहरी होता है – रमेश शर्मा*
*पत्रकार चाहे छोटा हो या बड़ा, उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है – भगवानदास सबनानी*
*अग्रवाल बोले—पत्रकारों की समस्याएँ सेतू बनकर सीएम तक पहुँचाएँगे*
*समाचार पत्रों को समाचार भेजने बाले को नियुक्ति पत्र दिलाने की जिद- शारदा*
भोपाल। पिछले दिनों भोपाल के तुलसीनगर स्थित नार्मदीय समाज भवन में असेंबली ऑफ एमपी जर्नलिस्ट्स का प्रांतीय सम्मेलन उत्साह और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भगवानदास सबनानी, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल तथा वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि पत्रकार समाज का सजग प्रहरी होता है और उसे धर्म, समाज तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सकारात्मक पत्रकारिता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए, तभी समाज में विश्वास कायम रहेगा।
मुख्य अतिथि विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि पत्रकार चाहे छोटा हो या बड़ा, उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। गां वों में छोटे अखबार भी चाय-पान की दुकानों तक पहुंचकर शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाते हैं और स्थानीय समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं अपने विधानसभा क्षेत्र की खबरों पर नजर रखते हैं और आवश्यकतानुसार अधिकारियों को समस्याओं के समाधान के निर्देश देते हैं।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने अंचल के पत्रकारों की समस्याओं और कठिनाइयों को गंभीर बताते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें जमीनी स्थिति का बेहतर अनुभव हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि संगठन की ओर से रखी गई सभी मांगों और चिंताओं को वे स्वयं मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे और पत्रकारों को संतोषजनक समाधान दिलाने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान किया गया तथा पत्रकारों ने संगठन को मजबूत बनाने और पत्रकार हितों की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। सम्मेलन शांतिपूर्ण और सफल वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का संचालन राखी बाला सिंगारे ने किया वहीं मंच पर अतिथियों का सम्मान रेणु नत्थानी, प्रियंका गौर ने किया। जबकि सहभोज की संपूर्ण व्यवस्था ललित शारदा और व्यंकटेश शारदा ने संभाली, जबकि अन्य मंच कार्यों एवं स्वागत आदि के लिए पत्रकार संतोष साहू, नन्हे भैया और राकेश सक्सेना ने जवाबदारी निभाई।
इस दौरान मप्र के रीवा, सतना, उमरिया, शहडोल, नरसिंहपुर, मंडला सहित 35 से अधिक जिलों के पदाधिकारी पत्रकार मौजूद रहें।
मां सरस्वती को नमन,
मंचासीन हमारे अथिति,
अथिति देवो भव,
सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों और आमंत्रित मित्रों को नमन,
परंपरा से हटकर मैं आपके सामने उपस्थित हूं अमूमन कार्यक्रम के अध्यक्ष अतिथिओं के उद्वोधन के बाद अपने विचार व्यक्त करते हैं।
परंतु यह कोई राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है यह कार्यक्रम उन लोगों का है जो सरकार और जनता के मध्य देवर्षि नारद की भूमिका निभाते हैं। जो जनता के दुःख दर्द को सरकार के सामने रखता है मैं उनकी समस्याओं को हल करने के लिए हमारे मेहमानों के सामने रख रहा हूं।
पूरे देश का श्रमिक आभारी हैं देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का जिनकी सरकार ने श्रमिकों की कठिनाइयां को लेकर सजग प्रहरी की तरह श्रम कानूनों में संशोधन किए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण संसोधन श्रमिक को नियुक्ति पत्र जारी किया जाना है। यह नियम लागू होता है पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों के लिए भी।
2 – पत्रकारों के मित्र कम और दुश्मन कई लोग होते हैं पत्रकार उनके कामों पर उंगली उठाते हैं मतलब समाचार पत्रों में प्रकाशित करते हैं।बस दुश्मनी का कारण उनकी कमी को उजागर करना है। अपनी कमी को छुपाने के लिए पत्रकार पर झुठे आरोप लगाकर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा देता है बस यही से पत्रकार और उसका परिवार प्रताड़ित होता है इससे बचाव के लिए गृहविभाग के आदेश है परंतु उस पर अमल नहीं होता है। इसीलिए पिछले कुछ सालों से पत्रकारों के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग हो रही है हमें उम्मीद है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी इस बात को प्राथमिकता पर पूरा करेंगे।
3 – अब मैं व्यक्तिगत रूप से खुद पर उंगली उठा रहा हूं, मुझे मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी आवास दिया है मैं तो नियमित रूप से किराया जमा कर रहा हूं परन्तु?
हमारी लम्बे समय से मांग है कि भाड़ा क्रय योजना के तहत सरकार आवास योजना बनायें और ये आवास टी टी नगर छेत्र में बने,टी टी नगर में आवासों के निर्माण में लागत कम होगी कारण सड़क, विजली, पानी,सीवेज पर खर्च नहीं होने से लागत कम होगी जिससे पत्रकार आसानी से ले सकते हैं।
प्रत्येक जिले में शासकीय चिकित्सालय में पत्रकारों एवं उनके परिवार के सदस्यों के लिए दो पत्रकार प्राइवेट वार्ड सर्व सुविधा युक्त बनें जिसका किराया नहीं लिया जायें।
6 – जिला स्तर पर पत्रकारों के बैठने के लिए एक 400 व्यक्तियों के बैठने हेतु अथवा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कम्युनिटी हाल बने जो जिला जनसंपर्क पदाधिकारी के अधिन हो और प्रेस क्लब के नाम पर जमीन और सांसद अथवा विधायक निधि से राशि नहीं दी जाय,कई उदाहरण हैं कि प्रेस क्लब भवन विवाद की जड़ है उसका प्रत्यक्ष उदाहरण भोपाल का पत्रकार भवन है।
7 – छोटे समाचार पत्रों को सरकार द्वारा प्रति माह कम से कम रुपए 20 हजार का विज्ञापन जारी करें जिसकी प्रसार संख्या 2000 हजार हो।उस समाचार पत्र के मालिक को समाचार लिखना आना चाहिए। मिनिमम कवालिफीकेशन ग्रेजुएट होना चाहिए।
9 – राज्य सरकार द्वारा बीमा योजना जारी है इसमें ग्रामीण अंचल के पत्रकारों को भी रखा जाना चाहिए जिनके पास संस्थान का नियुक्ति पत्र एवं वेतन दिया जाता है।
कहने और करने के लिए बहुत कुछ है।
एक संगठन का अध्यक्ष होने के नाते मेरा पहला लक्ष्य ग्रामीण अंचल के पत्रकारों को नियुक्ति पत्र एवं वेतन का है।
और इस कार्य के लिए मेरा भ्रमण शीघ्र ही शुरू होगा और इसमें मुझे जिला जनसंपर्क अधिकारी एवं सहायक श्रम अधिकारी के साथ की आवश्यकता है।
सरकार मुझे इस कार्य के लिए जनसंपर्क विभाग के द्वारा सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश करें।
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