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समूह की महिलाएं बना रही केमिकल मुक्त हर्बल होली गुलाल

होली पूर्व
समुह की महिलाएं बना रही केमिकल मुक्त हर्बल होली गुलाल

फूल और सब्जियों से तैयार किया जा रहा गुलाल
हर्बल गुलाल से मनाई जाए होली
बाजार मे खासी चर्चा
करीब 150 महिलाएं बना रही गुलाल

एंकर….होली त्योहारोँ का समय काफी करीब है ..वही होली को लेकर लोग अपनी अपनी तैयारियों मे लग गये है ..विशेष तौर पर रंगों का त्योहार होता है होली ..जिसके चलते लोग बाजारों मे रंगों और गुलाल का चुनाव मे लगे होते है ..वही एक खास गुलाल जो की बाजार मे चर्चा का विषय बना हुआ है और यह गुलाल है हर्बल होली गुलाल जिसे समुह की महिलाएं तैयार कर रही है ..जो की पुरी तरह केमिकल मुक्त है ..महिलाओं का यह काम व्यवसाय क़े साथ रोजगार देने मे मील का पत्थर साबित हो रहा है ..देखिये ये खास रिपोर्ट

मण्डला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जहाँ रोजगार की कमी अक्सर देखी जा सकती है …मण्डला की एक ऐसी संस्था है जो त्यौहार पूर्व उन्हें कई वर्षों से रोजगार से जोड़ रही है ..अक्सर विशेष त्योहारोँ और राष्टीय त्योहारोँ क़े पहले उन्हें यह काम दे दिया जाता है ..आने वाले होली क़े पहले संस्था ने महिला समूहों हो कृत्रिम गुलाल तैयार करने सामग्री दे दी जाती है ..इन महिलाओं को प्राकृतिक चीजें जैसे पलाश क़े फूल ,गेंदें क़े फूल ,पालक भाजी और चुकंदर आदि शामिल है ..
आप देख सकते उसे तैयार करने क़े लिये फूलो और सब्जियों को सील बट्टे मे पीसा जाता है फिर उसे सुखाकर बारीक किया जाता है और उसे फिर छोटी छोटी पॉलिथीन मे भरकर गुलाल तैयार किया जाता है ..महिलाएं इन प्रोडक्ट को सेल करने क़े लिये विभिन्न सोशल मीडिया और ऑन लाइन से जुड़ी है ..व्यापारी इन माध्यमों से इन गुलाल को खरीद सकते है …जिससे खासी आमदनी इन महिलाओं को हो रही है ..

होली क़े इस त्योहार मे लोग केमिकल रंगों का उपयोग भारी मात्रा मे करते है ..जिससे उसके दुष्परिणाम भी सामने आते है ..केमिकल से तैयार किये रंग चेहरे और शरीर क़े लिये हानिकारक है ..लेकिन इस हर्बल गुलाल से नुकसान की कोई भी संभावना नही है ..

वही प्राकृतिक संसाधनो से गुलाल तैयार कर रही समूह की महिला तुलसी चंद्रोल ने बताया कि हम लोग का ग्रुप माहिष्मती फार्मा प्रोड्यूसर कंपनी है जिसमें 1200 दिव्या काम करती है और 16 गांव में यह अलग-अलग ग्रुप कम कर रहे हैं जिसमें हम लोग अभी त्यौहार का सीजन देख त्यौहार का सीजन होली है होली के होली के अवसर पर हम लोग प्राकृतिक कलर बना रहे हैं जिसमें चुकंदर गेंदे का फूल पलाश का फूल पालक भाजी गुड़हल की पट्टी और अरारोट मिलकर हम लोग यह होली कलर बना रहे हैं इससे जो क्या है की होली के त्यौहार में केमिकल भारी युक्त जो कलर मिलते थे उसे बुजुर्गों बच्चों और सभी पर बहुत बुरा असर पड़ता था अब यह कलर से किसी को कोई नुकसान नहीं है यह बिल्कुल हर्बल प्रकृति कलर है जो हम लोग बना रहे हैं पुराने तरीके से हम लोग इसको बना रहे हैं जिसमें जिससे हम गंदे के फूल की पंखुड़ी को चुकंदर को पालक भाजी गुड़हल की पट्टी सबको सिलबट्टी पर पीसकर बनाते हैं प्राकृतिक तरीकों से यानी की मिक्सी वगैरह में पीस करो बना रहे हैं।

वही एक गांव एक संचार कंपनी की सहायक संगीता गुप्ता ने बताया कि हम लोग यह होली कलर बना रहे हैं पालक की भाजी, गेंदे के फूल,गुड़हल के पत्ते चुकंदर इन सभी चीजों के पाउडर बना कर हर्बल गुलाल बनाते हैं और बाजार ने मिलने बाले ग़ुलाल और रंग के केमिकल ज्यादा होता है मतलब शरीर में रिएक्शन दिखता है लोगों को खेलने के बाद तो किसी के बाल बाल झड़ने लगते हैं किसी की आंखों में समस्या मतलब कलर खेलने के बाद समस्याएं उत्पन्न होती है जिसके कारण लोग होली के रंगों से दूर भागने लगे है जो हमारे त्यौहार लुप्त होते जा रहा है ।उसको हम फिर से जैसे पहले त्यौहार में रंग खेला करते थे उसी माहौल में लोगों को जोड़ना है।हमारी कम्पनी प्राकृतिक रूप से तैयार ग़ुलाल बनाने का काम चालू किया जिसमें महिलाओं को रोजगार मिलता है। और हमारे द्वारा निर्मित ग़ुलाल का किसी भी प्रकार से कोई मानव शरीर को कोई नुकसान नही पहुँचता ।इस ग़ुलाल से बच्चे बूढे जवान जो गर्भवती महिलाएं हैं वह सब इंजॉय करें अच्छे से होली खेले यही हमारी मेहनत है।

वही एक गांव टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एक्जिटिव पद पर कार्यरत नीलेश दुबे ने बताया कि यहां पर हर्बल होली कलर बन रहा है जो की प्राकृतिक रूप से अच्छा है जो और केमिकल मुक्त है इसको लगाने से लोगों को केमिकल से जो होने वाली परेशानियां है उसे मुक्ति मिलती है इसलिए मैं लोगों से अपील करता हूं कि यह इको हर्बल होली कलर को लगे और यह हमारे मंडला जिले पर उपलब्ध है इसकी अगर आप किसी को चाहिए तो मंडल ऑफिस से ले सकता है और ऑनलाइन भी शॉपिंग कर सकते हैं अमेजॉन फ्लिपकार्ट इसके माध्यम से भी इसको प्राप्त किया जा सकता है हमारी संस्था द्वारा बोर्ड पर काम किया जाता है जिसमें 7 फ्लेवर पर हम लोग गोल्ड जैविक गोल्ड बनवेट हैं उसमें भी के केमिकल मुक्त रहता है नेचुरल तरीके से ही बनाया जाता है वह छोटी-छोटी बातों पर बनाया जाता है एक बाइट का वेट लगभग 50 ग्राम है जो कि लोगों को रखने में भी दिक्कत नहीं होती और उपयोग भी कर सकते हैं इसमें हम अदरक फ्लेवर पर गुड बनता है मुलेठी पर बनता है इलायची पर बनाते हैं काली मिर्च पर शॉप पर इस तरीके से अलग-अलग फ्लेवर पर गुड तैयार किया जाता है हमारे संस्था द्वारा जैविक के आपको पौधों कुटकी मिल जाएगी आंवला कैंडी है बल कंडी है और साथ में हर्बल होली कलर भी मिल जाएगा हर्बल होली कलर को हमने दो तरीके से जोड़ने की कोशिश की है एक तो किसानों को जो फूलों की खेती की तरफ से मूव कर चुके हैं उससे भी रोजगार उनको प्राप्त नहीं होता है तो उसको देखते हुए हमने गेंदे की खेती की तरह मुंह करते हुए की गंदे लगे और जब वह जो बच जाता है मार्केट में देखने से उसका हर्बल होली कलर बनाएं चकुंदर की खेती करें और चुकंदर के कलर बनाएं जो की पूर्ण रूप से जैविक रहते हैं इसको हम अपने लिए उसे कर सकते हैं इसमें से केमिकल का कोई रिएक्शन नहीं है जो आजकल मार्केट पर देख रहे हैं की होली खेलने के बाद लोगों के चेहरे पर एक्शन होता है उसे यह मुक्ति मिलती है

मंडला से दीप्ति कौर की रिपोर्ट

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