*Journalist के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले पुलिस अधीक्षक जांच करे 2017 में आदेश दिया था – ऋशि शुक्ला*
दमोह से महेंद्र जैन की रपट
पत्रकारों के खिलाफ प्रकरण दायर करने से पहले पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय उप पुलिस महानिरीक्षक जांच के बाद ही चालान पेश किए जाने बाबत 12 दिसंबर 2017 को पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्ला ने निर्देश जारी किया था जिसमें पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच किए जाने हेतु आदेश दिया किया था, जिसमें खासकर कहा गया था कि पत्रकारों पर अपराधिक मामले अधिकतर दुर्भावनावश दायर किए जाते है, जिसके कारण पुलिस महानिदेशक ने परिपत्र जारी करते हुए निर्देश दिए थे कि पत्रकारों के विरुद्ध कायम किए गए प्रकरणों के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया है कि किसी भी पत्रकार, संवाददाता के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किया जाता हैं तो उन प्रकरणों के चालान पेश किए जाने के पूर्व साक्ष्य की समीक्षा संबंधित पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्रीय उप पुलिस महानिरीक्षक करेंगे और स्वयं को आश्वस्त करते हुए कि उक्त प्रकरण किसी भी दुर्भावनावश नहीं किया गया, यदि कोई भी प्रकरण दुर्भावनावश कायम किया गया पाया जाता हैं तो उसको तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए जाए और संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने का उक्त आदेश में उल्लेख किया गया है। प्रत्येक तिमाही में क्षेत्रीय उप पुलिस महानिरीक्षक इस तरह के प्रकरणों की समीक्षा करके उप पुलिस महानिरीक्षक शिकायत शाखा को सूचना भेजेंगे और उक्त प्रकरण की समीक्षा उपरांत पुलिस महानिदेशक के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करके, जांच अधिकारी पत्रकारों के खिलाफ प्रकरणों को निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से संभाल सकते हैं।
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