*Bhopal memorial में सीबीडी से संबंधित दो जटिल सर्जरी सफल*
भोपाल। राधावल्लभ शारदा द्वारा संपादित रपट
भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवंडी अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में एडवांस गैस्ट्रो-सर्जरी के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज की गई हैं। अस्पताल की विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने डॉ प्रमोद वर्मा के नेतृत्व में पित्त को आंत तक पहुँचाने वाली कॉमन बाइल डक्ट (सीबीडी) से संबंधित दो सफल जटिल सर्जरियां की है। इन दोनों सर्जरी ने बीएमएचआरसी की तकनीकीd क्षमता, आधुनिक सुविधाओं और चिकित्सकीय दक्षता को एक बार फिर सिद्ध किया है। दोनों ही मरीज अब सुरक्षित हैं और तेजी से स्वस्थ हो रही हैं।
1. *लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से सीबीडी से निकाले स्टोन*
बीएमएचआरसी के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग में 60 वर्षीय महिला की लैप्रोस्कोपिक सीबीडी (कॉमन बाइल डक्ट) एक्स्प्लोरेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। यह अत्यंत जटिल एडवांस तकनीक है, जिसे उच्च दक्षता वाले सर्जन ही कर सकते हैं। मरीज का इलाज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क किया गया।
कॉमन बाइल डक्ट (सीबीडी) वह नली होती है, जो लिवर और गॉल ब्लैडर से बनने वाली पित्त को आंत तक पहुँचाती है। कई बार गॉल ब्लैडर में बनने वाले स्टोन सीबीडी में पहुँचकर रास्ता अवरुद्ध कर देते हैं। इस अवरोध के कारण मरीज को पीलिया हो गया था, क्योंकि पित्त आंत तक न पहुँचकर रक्त में मिलने लगा था। इस मरीज की सीबीडी में लगभग 10 स्टोन फंसे पाए गए, जिनमें से कुछ का आकार 2 सेंटीमीटर तक था।
मरीज की पहले ईआरसीपी प्रक्रिया की गई, लेकिन स्टोन बड़े और संख्या में अधिक होने के कारण बाहर नहीं निकल पाए। सामान्यत: ऐसे मामलों में परंपरागत ओपन सर्जरी की जाती है, किंतु उसमें बड़ा चीरा लगाना पड़ता है और मरीज की रिकवरी लंबी होती है। बीएमएचआरसी की विशेषज्ञ टीम ने मरीज की स्थिति को देखते हुए लैप्रोस्कोपिक सीबीडी एक्स्प्लोरेशन सर्जरी करने का निर्णय लिया। इस तकनीक में छोटे-छोटे चीरे लगाकर कैमरे और विशेष उपकरणों की सहायता से स्टोन निकाले जाते हैं। इस पद्धति में कम दर्द, कम संक्रमण, कम रक्तस्राव और तेज रिकवरी का लाभ मिलता है। सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई और मरीज को सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज कर दिया गया।
*2. 55 वर्षीय महिला में कॉमन बाइल डक्ट सिस्ट का सफल ऑपरेशन*
55 वर्षीय महिला को कोलिडोकल सिस्ट नामक एक जन्मजात और दुर्लभ बीमारी थी। इस बीमारी की वजह से मरीज के कॉमन बाइल डक्ट का एक हिस्सा असामान्य रूप से फूलकर थैली जैसा बन गया था। इससे पित्त आंत तक नहीं पहुँच पा रहा था और मरीज को लगातार पीलिया, पेट दर्द, उल्टी, बुखार और संक्रमण जैसी समस्याएँ हो रही थीं। जाँच में यह पाया गया कि मरीज की बाइल डक्ट का एक बड़ा हिस्सा फैलकर सिस्ट के रूप में बदल चुका था। स्थिति गंभीर होती जा रही थी, इसलिए सर्जरी ही स्थायी समाधान था। अगर लंबी अवधि तक इसका उपचार न किया जाए, तो लिवर को गंभीर नुकसान और भविष्य में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता था। ऐसी स्थिति में इस महिला का कोलिडोकल सिस्ट का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। डॉ प्रमोद वर्मा ने बताया कि सूजी हुई बाइल डक्ट (कोलिडोकल सिस्ट) को पूरी तरह हटाया गया। इसके बाद लिवर से निकलने वाली स्वस्थ पित्त नलियों को छोटी आंत के पहले हिस्से (डुओडिनम) से जोड़ दिया गया। इस प्रक्रिया को हेपाटिको-डुओडिनोस्टोमी कहा जाता है। इससे पित्त का प्राकृतिक प्रवाह पुनः स्थापित हो जाता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। डॉ वर्मा ने बताया कि यह सर्जरी अत्यंत जटिल मानी जाती है, क्योंकि इसमें बाइल डक्ट, पैंक्रियाज और लिवर के आसपास के अत्यंत संवेदनशील हिस्सों पर सटीकता के साथ काम करना होता है। बीएमएचआरसी की विशेषज्ञ टीम ने एनेस्थीशियोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ संध्या इवने की मदद से यह ऑपरेशन सुरक्षित रूप से पूरा किया। और मरीज अब तेजी से स्वस्थ हो रही हैं।
*इस अवसर पर बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि बीएमएचआरसी हमेशा से गंभीर बीमारियों के उन्नत उपचार में अग्रणी रहा है। हमारी सर्जिकल टीम द्वारा इन दोनों जटिल ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक करना न केवल संस्थान की क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह मरीजों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। हमें गर्व है कि बीएमएचआरसी में ऐसी जटिल और उच्चस्तरीय सर्जरी अत्याधुनिक तकनीक एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा सुरक्षित रूप से की जा रही हैं।*
रितेश पुरोहित
जनसंपर्क अधिकारी,
बीएमएचआरसी भोपाल
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