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Bhopal police भोपाल की पुलिस किसान और कालोनाइजर की मिली भगत, पुलिस कुछ नहीं कर पायेगी क्योंकि नेताओं के दवाब और 99 के फेर में रहती है

*Bhopal police भोपाल की पुलिस किसान और कालोनाइजर की मिली भगत, पुलिस कुछ नहीं कर पायेगी क्योंकि नेताओं के दवाब और 99 के फेर में रहती है

भोपाल से राधावल्लभ शारदा के साथ आरती परिहार की रपट
भोपाल कलेक्टर की जानकारी में था कि शहर में अवैध तरीके से कालोनियों बन रही है एफआईआर दर्ज करने के लिए चार महीने पहले भी पत्र लिख सकते थे हो सकता है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मना कर दिया होगा। खैर मुखिया बदला सब कुछ ठीक हो सकता है।
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 92 कॉलोनाइजर्स के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी मिश्र से आधिकारिक पत्र व्यवहार कर दिया है। यह सभी कालोनियां अवैध रूप से अस्तित्व में आई है। कॉलोनाइजर्स ने खेती की जमीन पर रेजिडेंशियल प्लॉट बनाकर बेच दिए। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति भी नहीं ली गई।
*राजधानी के 92 खेतों में अवैध कॉलोनी बना दी*
नगर पालिका निगम भोपाल और टीएंडसीपी की टीम द्वारा पूरे भोपाल का सर्वे किया गया। इस दौरान पाया गया कि, रातीबड़ में 46, ईंटखेड़ी में 20, निशातपुरा इलाके में 7, अयोध्या नगर क्षेत्र में 11 और छोला क्षेत्र में आठ अवैध कॉलोनी अस्तित्व में आई है। सभी जगह बिल्डर ने किसानों से उनकी कृषि भूमि खरीदी के लिए एग्रीमेंट किया, और ₹100 के स्टांप पेपर पर अवैध रूप से लिखा पड़ी करके रेजिडेंशियल प्लॉट का आवंटन कर दिया गया। उचित कार्रवाई के लिए यह रिपोर्ट कलेक्टर को दी गई। कलेक्टर श्री आशीष सिंह ने सभी बिल्डर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए, पूरी रिपोर्ट भोपाल पुलिस कमिश्नर को सौंप दी है।
*खेती की जमीन पर कॉलोनी क्यों नहीं काट सकते
भारत के संविधान के* *अनुच्छेद 300A के अनुसार, खेती के लिए निर्धारित जमीन का कोई भी दूसरा उपयोग नहीं किया जा सकता* यहां तक की ऐसी जमीन को बिना खेती के खाली भी नहीं छोड़ा जा सकता। यदि कोई किसान ऐसा करता है तो उससे उसका खेत वापस ले लिया जाएगा। *भारत के भूमि अधिनियम 1873 के अनुसार कृषि भूमि पर रेजिडेंशियल प्लॉट बनाने से पहले सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य है*। शहरी विकास अधिनियम 1966 के अनुसार शहरी क्षेत्र में कृषि भूमि के उपयोग को बदलने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता है। कृषि भूमि संरक्षण अधिनियम 2001 के अनुसार, जब तक की ऐसा करना अनिवार्य ना हो जाए तब तक राज्य सरकार कृषि भूमि को किसी और काम के लिए उपयोग हेतु अनुमति नहीं दे सकती।
विदिशा में भी एक कृषि भूमि को पहले आवासीय योजना में बदला पुनः कृषि भूमि बताकर वेच दिया यह एक जुर्म है परन्तु विभाग ने जुर्माना लगाया और केश खत्म कर दिया, भोपाल में भी ऐसा ही होगा।

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