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*जी एस टी घोटाले की जांच हरियाणा तक पहुंची: फर्जी आईटीसी से एडजस्ट की थी करोड़ों की कर देनदारी, यूपी की भी फर्म शामिल* भोपाल से संपादित आरती परिहार की रपट जीएसटी घोटाले की जांच अब हरियाणा तक पहुंच गई है। हरियाणा की प्लाईवुड और टिंबर की 52 फर्म ने जसपुर से फर्जी बिल खरीदे और इन बिलों से लिए आईटीसी से कर की देनदारियों को एडजस्ट कर दिया। कर विभाग ने हरियाणा कर विभाग के जरिये फर्म को नोटिस भिजवाए हैं। उत्तराखंड के जसपुर में सवा आठ माह पूर्व पकड़े गए करोड़ों रुपये के जीएसटी घोटाले की जांच की आंच हरियाणा तक पहुंच गई है। हरियाणा की प्लाईवुड और टिंबर की 52 फर्म ने जसपुर से फर्जी बिल खरीदे और इन बिलों से लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी ) से कर की देनदारियों को एडजस्ट कर दिया। कर विभाग ने हरियाणा कर विभाग के जरिये फर्म को नोटिस भिजवाए हैं। इन फर्म से होने वाली रिकवरी से सरकार को 40 करोड़ से अधिक की धनराशि मिलेगी। वहीं, इस घोटाले में यूपी की भी कई फर्म शामिल हैं। इन्हें चिह्नित किया जा रहा है। विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने चार मार्च को जसपुर के लकड़ी व्यापारियों, ट्रांसपोटर्स, अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट के आवास, दफ्तरों पर छापा मारकर 18 करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी थी। ये यहां रैकेट बनाकर फर्जी फर्म के जरिये कारोबार करने के साथ ही बाहरी राज्यों की फर्म और कंपनियों को फर्जी बिल बेच रहे थे। इसी एवज में फर्म आईटीसी का लाभ ले रही थी। टीम ने मुख्य आरोपी शाहनवाज हुसैन के घर से विभिन्न फर्म के बिल, ईवे-बिल, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मुहर, मोबाइल, लैपटॉप आदि इलेक्ट्राॅनिक सामान जब्त किया था। मामले में 20 लोगों को चिह्नित किया गया था। 22 अक्टूबर को एसआईबी ने मुख्य आरोपी शाहनवाज हुसैन को जसपुर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एसआईबी की छानबीन में फर्जी बिलिंग की खरीद में हरियाणा की 52 फर्म चिह्नित की हैं। ये सभी लकड़ी संबंधी कारोबार करती हैं। दो साल में इन फर्म ने फर्जी बिल से सामान खरीद दर्शाकर आईटीसी से करोड़ाें रुपये की जीएसटी की देनदारी को एडजस्ट किया है। ये राशि 40 करोड़ से अधिक की है जिसे वापस लेने के लिए विभाग ने फर्म को नोटिस भिजवाने की कार्यवाही की है। दूसरे राज्याें को विभाग सीधे नोटिस नहीं दे सकता है, लिहाजा संबंधित राज्य के राज्य कर विभाग के माध्यम से नोटिस भिजवाए गए हैं। पकड़ी गई जीएसटी चोरी के मामले में हरियाणा की फर्म की लिप्तता सामने आई है। हरियाणा जीएसटी विभाग के माध्यम से फर्म को नोटिस दिए गए हैं और गलत तरीके से ली गई करोड़ों की धनराशि को वापस लेने की कार्यवाही की जा रही है। -रजनीश यशवस्थी, डिप्टी कमिश्नर एवं प्रभारी एसआईबी, राज्य कर विभाग।
जी एस टी घोटाले की जांच हरियाणा तक पहुंची फर्जी आई टी सी से एडजस्ट की थी करोड़ों की कर देनदारी, यूपी की फर्म शामिल

*जब तक सख्त कानून नहीं बनेगा तब तक रिश्वतखोरी समाप्त नहीं होगी , रिश्वत लेने वाले और देने वाले को प्राथमिकता पर गिरफ्तार कर जेल भेजे और नौकरी समाप्त करें*

*जब तक सख्त कानून नहीं बनेगा तब तक रिश्वतखोरी समाप्त नहीं होगी , रिश्वत लेने वाले और देने वाले को प्राथमिकता पर गिरफ्तार कर जेल भेजे और नौकरी समाप्त करें* रिश्वत लेते पकडा़या भारत संचार निगम लिमिटेड का बड़ा अफसर, सीबीआई ने भोपाल में बिछाया जाल भारत संचार निगम लिमिटेड के एक रिश्वतखोर अफसर को रंगे हाथों पकड़ा गया है। सीबीआई ने भोपाल में जाल बिछाकर उसे रिश्वत लेते पकड़ लिया। रिश्वतखोर अधिकारी भारत संचार निगम लिमिटेड के सुल्तानिया रोड ऑफिस में कार्यरत है। वह अपने ही एक अधीनस्थ अधिकारी से रिश्वत मांग रहा था।
बीएसएनल के एक रिश्वतखोर अफसर को रंगे हाथों पकड़ा गया है। सीबीआई ने भोपाल में जाल बिछाकर उसे रिश्वत लेते पकड़ लिया। रिश्वतखोर अधिकारी भारत संचार निगम लिमिटेड के सुल्तानिया रोड ऑफिस में कार्यरत है। वह अपने ही एक अधीनस्थ अधिकारी से रिश्वत मांग रहा था।
बीएसएनल के एक रिश्वतखोर अफसर को रंगे हाथों पकड़ा
जानकारी के अनुसार बीएसएनएल कोर नेटवर्क के रिश्वतखोर जनरल मैनेजर को रिश्वत लेते पकड़ा गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने इसके लिए भोपाल में जाल बिछाया और रिश्वत लेते हुए जनरल मैनेजर को रंगे हाथों पकड़ लिया।

भारत संचार निगम लिमिटेड के कोर नेटवर्क का जनरल मैनेजर महेंद्र सिंह सुल्तानिया रोड ऑफिस में पदस्थ हैं। उसे 15000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। बीएसएनल के जूनियर टेलिकॉम ऑफिसर जेटीओ अवध साहू ने महेंद्र सिंह की शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार वह चार्जशीट में से नाम हटाने के लिए रिश्वत के रूप में 40 हजार रुपए मांग रहा था।
सीबीआई ने राकेश सिंह के माध्यम से जनरल मैनेजर महेंद्र सिंह को रिश्वत के 15 हजार रुपए लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया- BSNL के अधिकारी की अधीनस्थ अधिकारी द्वारा शिकायत के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच की। जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि हो जाने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया। सीबीआई ने राकेश सिंह के माध्यम से जनरल मैनेजर महेंद्र सिंह को रिश्वत के 15 हजार रुपए लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

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