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ग्रामीण अंचल के पत्रकारों अपने अधिकार जानें, क्या कहता है कानून*

*ग्रामीण अंचल के पत्रकारों अपने अधिकार जानें, क्या कहता है कानून*

ग्रामीण अंचल से समाचार भेजने वाले संवाददाताओं (जिन्हें आमतौर पर स्ट्रिंगर, ग्रामीण प्रतिनिधि या संवाददाता कहा जाता है) तथा डेस्क पर काम करने वाले पत्रकारों को नियुक्ति पत्र और कानूनन तय वेतन मिलना चाहिए।
इसके पीछे कानूनी, व्यावहारिक और नैतिक कारण निम्नलिखित हैं:
1. कानूनी अधिकार
* वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट, 1955: इस कानून के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो पूर्णकालिक या अंशकालिक के रूप से किसी मीडिया संस्थान के लिए समाचार एकत्रित करने, लिखने या भेजने का काम करता है, वह “श्रमजीवी पत्रकार” की श्रेणी में आता है।
*नियुक्ति पत्र की अनिवार्यता:*
श्रम कानून के तहत किसी भी कर्मचारी/संवाददाता को काम पर रखने से पहले नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसमें पद, कार्य क्षेत्र, और मानदेय/वेतन की शर्तों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
* मजीठिया वेज बोर्ड (Majithia Wage Board): वेतन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के तहत अंशकालिक और ग्रामीण संवाददाताओं (Part-time Correspondents) के लिए भी न्यूनतम मानदेय और भत्तों की सिफारिशें की गई हैं।
2. व्यावहारिक और सुरक्षात्मक कारण
* सुरक्षा और पहचान: ग्रामीण पत्रकार अक्सर जोखिम भरे इलाकों, स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार और अपराध की रिपोर्टिंग करते हैं। यदि उनके पास आधिकारिक नियुक्ति पत्र और प्रेस कार्ड नहीं होता, तो वे पुलिस कार्रवाई, असामाजिक तत्वों के दबाव और मुकदमों के सामने असुरक्षित हो जाते हैं।
*शोषण पर रोक*: वर्तमान में कई मीडिया संस्थान ग्रामीण संवाददाताओं को केवल “विज्ञापन लाने” की शर्त पर रखते हैं और उन्हें वेतन नहीं देते, जो कि श्रम कानूनों और पत्रकारिता के मानकों का उल्लंघन है।
3. *पत्रकारिता की निष्पक्षता*
जब किसी ग्रामीण संवाददाता को उचित वेतन या मानदेय नहीं मिलता, तो उससे निष्पक्ष पत्रकारिता की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है। सम्मानजनक वेतन मिलने से पत्रकारिता में पारदर्शिता और गुणवत्ता आती है।
समाधान और कदम:
*श्रम आयुक्त से संपर्क*:
यदि कोई संस्थान काम तो ले रहा है लेकिन नियुक्ति पत्र या न्यूनतम वेतन देने से मना करता है, तो राज्य के श्रम विभाग या लेबर कोर्ट में शिकायत की जा सकती है।
*पत्रकार यूनियनों से सहायता*
*राज्य स्तरीय की पत्रकार यूनियनों से जो श्रम विभाग में पंजीयत है से जुड़कर इस अधिकार की मांग उठाई जा सकती है।
आपका अपना
राधावल्लभ शारदा
सदस्य – मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद राज्य सरकार श्रम विभाग
उन्नति माहेश्वरी – निज सचिव
1 सितंबर 2026

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