केंद्र सरकार के नये श्रम कानून का उल्लघंन है।
इस मीडिया संस्थान की शिकायत दिल्ली केंद्र सरकार के श्रम मंत्री, प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भेज रहा हूं क्योंकि इस मीडिया संस्थान ही नहीं कई अन्य संस्थानों द्वारा समाचार खरीदें जाते हैं।
इतना ही नहीं मैं व्यक्तिगत रूप जो जबावदारी मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मुझे मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया है उस नाते मेरा दायित्व है कि मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों को केंद्र सरकार के नये श्रम कानून की पहली शर्त नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य है। जब नियुक्ति पत्र पत्रकार को मिलेगा तो फिर उसे वेतन आयोग के अनुसार वेतन के साथ अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा,
मध्यप्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा पत्रकारों को बीमारी पर रुपए 40 हजार तक का वर्ष में एक बार भुगतान मिलेगा, बीमा योजना का लाभ मिलेगा। बीमा 4 लाख रुपए तक का होता है, बीमा राशि का 50 प्रतिशत गैर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों का राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा दिया जाता है।
इसी तरह की योजना केंद्र सरकार की भी है।
नियुक्ति पत्र मिलने से समाचार भेजने बाले कानूनन अपने आप को पत्रकार कह सकेंगे।
मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद का सदस्य होने के नाते पत्रकारों के हित में काम करना होगा।
मेरे द्वारा जनसंपर्क विभाग के आयुक्त को आज से 8 माह पहले एक पत्र लिखा था कि अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों के नियुक्ति पत्र एवं अधिमान्यता नियम के अनुसार तीन माह के वेतन की पर्ची जो आवश्यक रूप से पत्रकार को जनसंपर्क विभाग को देना होता है मांगा है परंतु अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
क्या मध्यप्रदेश सरकार भी केंद्र सरकार के नये श्रम कानून को लागू करने में अशमर्थ है। किसके दबाव में है सरकार का जनसंपर्क विभाग।
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