झूठी शिकायत – पत्रकार पर एफ आई आर दर्ज, अधिमान्यता और सम्मान निधि बंद परंतु राजनेताओं पर प्रकरण दर्ज तब भी सभी सुविधाएं बरकरार
भोपाल से वैंकटेश शारदा की रपट।
मुख्य मंत्री मोहन यादव से मांग अधिमान्यता नियम में संशोधन हो – शारदा
जानकारी के अनुसार देश के 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्री पर आपराधिक मामले।
सुप्रीम कोर्ट में राजनीति में अपराधीकरण को लेकर दाखिल रिपोर्ट में चोकाने बाले आंकड़े सामने आए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता और कोर्ट के अमिकस क्यूरी विजय हंसारिया की और से दाखिल हलफनामे के मुताबिक लोकसभा के 543 में से 231 और राज्य सभा के 233 में से 75 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए गए हैं मतलब 326 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।28 में से 14 मुख्यमंत्रीयों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।कई मुख्यमंत्री पर एक नहीं डबल आंकड़े बताते हैं कि यदि राजनीति में आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी राजनेता लोकसभा और राज्यसभा में बैठकर वेतन भत्ते सहित अन्य सुविधाओं का लाभ लें रहें हैं तो फिर जन सेवा और सरकार एवं आम नागरिक के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पत्रकारों पर एफ आई आर दर्ज होते ही उसकी अधिमान्यता निरस्त कर दी जाती है इतना ही नहीं यदि उसे सम्मान निधि मिलती है तो वह भी बंद कर दी जाती है।
इससे भी बड़ी बात यदि किसी पत्रकार पर आपराधिक मामला दर्ज है तो उसे अधिमान्यता नहीं दी जाती है।
चुनाव आयोग को चाहिए कि जिस तरह पत्रकार को अधिमान्यता देने के पूर्व उसका पुलिस द्वारा आपराधिक मामले चल रहे हैं या नहीं का रिकॉर्ड मांगा जाता है और उसी अनुसार उसकी अधिमान्यता स्वीकृत की जाती है यदि मामला दर्ज है तो अधिमान्यता योग्य नहीं है और कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है तो अधिमान्यता योग्य है।
इसी तरह जन सेवा में आने वाले पार्षद,पंच से लेकर राज्य सभा सदस्य निर्वाचित होने के पूर्व सभी का आपराधिक मामलों की जांच होनी चाहिए और जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
यह दोहरा कानून क्यों।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव से निवेदन है अधिमान्यता के नियम में संशोधन किया जाना चाहिए।
mahadandnews.com mahadandnews | www.mahadandnews.com