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पत्रकार लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ नहीं है परंतु सरकार और आम जनता के लिए सेतू है*इस सेतु को बरकरार रखने के लिए जनसंपर्क विभाग एवं श्रम विभाग की भूमिका अहम है*

*पत्रकार लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ नहीं है परंतु सरकार और आम जनता के लिए सेतू है*इस सेतु को बरकरार रखने के लिए जनसंपर्क विभाग एवं श्रम विभाग की भूमिका अहम है*

वर्तमान समय में पत्रकार कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पत्रकार हितों की रक्षा के लिए कुछ प्रमुख मुद्दों और मांगों पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है और सरकार के मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री, जनसंपर्क मंत्री के साथ जनसंपर्क आयुक्त एवं श्रम आयुक्त को तत्परता से निम्न विंदूओ पर ध्यान देना होगा।

1. सुरक्षा और कानूनी संरक्षण
पत्रकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनकी शारीरिक और मानसिक सुरक्षा है।
पत्रकार सुरक्षा कानून
देश और राज्यों में एक कड़े ‘पत्रकार सुरक्षा कानून बने ताकि कवरेज के दौरान उन पर होने वाले हमलों को गैर-जमानती अपराध माना जाए।
पत्रकार पर एफ आई आर दर्ज होने के पहले प्रकरण की जांच होनी चाहिए।
पुलिस और प्रशासन का सहयोग: कवरेज के दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा पत्रकारों के साथ अभद्रता न हो, इसके लिए स्पष्ट गाइडलाइन होनी चाहिए।
सूत्रों की गोपनीयता: पत्रकार को अपने सूत्रों को गुप्त रखने का पूर्ण कानूनी अधिकार होना चाहिए।
2. आर्थिक सुरक्षा और वेतन
आर्थिक अस्थिरता पत्रकारिता की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
*मजीठिया वेज बोर्ड: सभी मीडिया संस्थानों में वेज बोर्ड की सिफारिशों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए* *ताकि पत्रकारों को सम्मानजनक वेतन मिल सके और इस कार्य को श्रम विभाग द्वारा लागू करना होगा*।
*जनसंपर्क विभाग में मीडिया संस्थान के प्रतिनिधि को सूची में शामिल करने से पहले नियुक्ति पत्र एवं वेतन प्रमाण पत्र की प्रति आवश्यक रूप से लेना चाहिए।जिनका प्रति वर्ष नवीनीकरण हो*
सम्मान निधि योजना: वरिष्ठ और वयोवृद्ध पत्रकारों के लिए सरकार द्वारा एक सम्मानजनक ‘मासिक सम्मान निधि योजना’ होनी चाहिए।
जिन पत्रकारों की अधिमान्यता नहीं है और लगभग 15 वर्ष से सिर्फ मीडिया संस्थानों को समाचार भेजने का कार्य कर रहे हैं उन्हें सम्मान निधि देनी चाहिए।
समय पर वेतन: मीडिया हाउस द्वारा समय पर वेतन भुगतान और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। ‘हायर एंड फायर’ की नीति पर रोक लगनी चाहिए।
3. स्वास्थ्य और बीमा सुविधाएं
जोखिम भरे क्षेत्रों में काम करने के कारण स्वास्थ्य सुरक्षा अनिवार्य है।
स्वास्थ्य बीमा सभी मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों (विशेषकर फील्ड रिपोर्टर्स) का निशुल्क स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा होना चाहिए।
कैशलेस इलाज: गंभीर बीमारियों की स्थिति में पत्रकारों और उनके आश्रितों के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा होनी चाहिए।
*सम्मान निधि को रुपए 30 हजार तथा 70 वर्ष से अधिक उम्र वाले पत्रकारों को मेडिकल सहायता रुपए 10 हजार प्रति माह देने चाहिए*।
4. ग्रामीण और लघु पत्रकारों के हित
तहसील और ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले पत्रकार अक्सर सबसे अधिक उपेक्षित होते हैं। जिन पत्रकारों को मीडिया संस्थानों से नियुक्ति पत्र प्राप्त है उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

5. कार्यस्थल और सुविधाएं
रेलवे और यात्रा रियायत: नियुक्ति पत्र प्राप्त पत्रकारों के लिए रेलवे और अन्य सार्वजनिक परिवहन में दी जाने वाली रियायतों को, जिन्हें कई जगहों पर बंद कर दिया गया है, फिर से बहाल किया जाना चाहिए। टोल टैक्स – समाचार पत्र का आई कार्ड देखकर नहीं लिया जाना चाहिए।
आवास सुविधा: बड़े शहरों में ही नहीं जिला मुख्यालय पर पत्रकारों के लिए किफायती दरों पर सरकारी आवास या जमीन जिस पर प्रधानमंत्री आवास योजना में व्यवस्था होनी चाहिए।

6. डिजिटल युग और नई चुनौतियां
सााइबर बुलिंग से सुरक्षा: सोशल मीडिया पर पत्रकारों (विशेषकर महिला पत्रकारों) को ट्रोलिंग और धमकियों से बचाने के लिए साइबर सेल में विशेष प्रावधान होने चाहिए।
प्रशिक्षण: डिजिटल मीडिया के दौर में पत्रकारों को नई तकनीक और ‘फेक न्यूज’ की पहचान करने के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए।
निष्कर्ष
पत्रकार हित केवल एक व्यक्ति का हित नहीं, बल्कि पूरे समाज की जागरूकता का प्रश्न है। जब पत्रकार सुरक्षित और निडर होगा, तभी वह समाज की सच्चाई को बिना किसी दबाव के सामने ला सकेगा।
अंतिम महत्वपूर्ण विषय – छोटे समाचार पत्रों की आर्थिक स्थिति अच्छी करने के लिए प्रति माह रुपए 20 हजार का विज्ञापन दिया जाना चाहिए। आल्टर किये गये समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी नहीं करना चाहिए।
समाचार पत्रों के संपादक की शैक्षणिक योग्यता का मापदंड – समाचार लिखने से तय हो।

राधावल्लभ शारदा
प्रांतीय अध्यक्ष
असेंबली आफ एमपी जर्नलिस्ट्स मुख्यालय भोपाल
एवं – सदस्य
मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद राज्य सरकार श्रम विभाग

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