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कुख्यात वन्यजीव शिकारी अजीत पारधी की जमानत निरस्त स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने 11 साल की फरारी के बाद किया था गिरफ्तार

कुख्यात वन्यजीव शिकारी अजीत पारधी की जमानत निरस्त
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने 11 साल की फरारी के बाद किया था गिरफ्तार
मध्यप्रदेश लाया जाएगा आरोपी, चंद्रपुर महाराष्ट्र में न्यायिक हिरासत में है निरुद्ध
भोपाल –
मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) को वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई में बड़ी सफलता मिली है। पेंच टाइगर रिजर्व में वर्ष 2013 में दर्ज वन्यजीव शिकार प्रकरण के कुख्यात आरोपी अजीत पारधी की जमानत विशेष न्यायालय, जबलपुर ने निरस्त कर दी है। न्यायालय अब आरोपी की पेशी के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी करेगा, जिसके बाद उसे महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश लाया जाएगा। वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों में यह प्रदेश का एक विरला मामला है, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 480 के तहत जांच एजेंसी के आवेदन पर पहले से जमानत प्राप्त आरोपी की जमानत और बंधपत्र निरस्त किए गए हैं।
विशेष न्यायालय, जबलपुर से सशर्त जमानत मिलने के बाद भी एसटीएसएफ उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखे हुए थी। जमानत पर रिहा होने के कुछ ही महीनों बाद 25 जनवरी 2025 को उसे महाराष्ट्र के चंद्रपुर में बाघ शिकार के एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इस प्रकरण की जांच में भी एसटीएसएफ ने चंद्रपुर वन विभाग को सहयोग प्रदान किया था। वर्तमान में आरोपी जिला जेल चंद्रपुर (महाराष्ट्र) में न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्ध है। एसटीएसएफ ने वर्ष 2025 में ही आरोपी की जमानत निरस्त करने के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। एसटीएसएफ और लोक अभियोजन अधिकारी के तर्कों तथा सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर विशेष न्यायालय, जबलपुर ने माना कि आरोपी जमानत पर रहने योग्य नहीं है। न्यायालय ने उसकी जमानत और बंधपत्र निरस्त करते हुए उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं।
पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र (बफर) में वर्ष 2013 में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत प्रकरण में अजीत पारधी समेत अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसटीएसएफ ने 11 वर्ष से फरार चल रहे अजीत पारधी को 18 जुलाई 2024 को बालाघाट जिले से गिरफ्तार किया था। अजीत पारधी पर बाघ और पैंगोलिन के शिकार एवं तस्करी से जुड़े कई मामलों में आरोपी होने का रिकॉर्ड है। उसके विरुद्ध सीबीआई सहित महाराष्ट्र के नागपुर, उमरेड, करंडला अभयारण्य और चंद्रपुर वन मंडल में भी विभिन्न वन्यजीव अपराध दर्ज हैं। प्रकरण की विवेचना वन्यजीव मुख्यालय के निर्देश पर एसटीएसएफ की जबलपुर इकाई कर रही है।

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