मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद के सदस्य राधावल्लभ शारदा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा
दीप्ति कौर की रपट
प्रदेश के श्रमजीवी पत्रकारों के हितार्थ नीतिगत एवं संरचनात्मक सुधारों लिखा गया पत्र ।
महोदय,
सादर अभिवादन।
आप प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘भ्रष्टाचार-मुक्त और विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने हेतु जिस ऊर्जा और समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं, वह हम सभी के लिए प्रेरणास्पद है। मध्यप्रदेश श्रम सलाहकार परिषद के सदस्य के रूप में मेरा यह दायित्व है कि मैं ग्रामीण अंचल से लेकर राजधानी तक कार्यरत पत्रकारों के हितों का संरक्षण करूँ।
पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने के नाते सरकार और जनमानस के बीच सेतु का कार्य करते हैं। अतः उनका सशक्त, सुरक्षित और आर्थिक रूप से स्थिर होना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है। नवीन श्रम कानूनों के आलोक में श्रमजीवी पत्रकारों के हितों हेतु मैं निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ:
प्रमुख सुझाव:
पत्रकार सुरक्षा कानून: पत्रकारों हेतु प्रभावी सुरक्षा कानून लागू किया जाए। पत्रकारों पर दर्ज होने वाले एफआईआर की निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु शिकायतकर्ता के कृत्यों की भी अनिवार्य जाँच हो।
मीडिया सेंटर का निर्माण: भोपाल में मीडिया सेंटर के निर्माण कार्य को शीघ्रता से प्रारंभ कराया जाए।
नियुक्ति पत्र एवं पहचान: नियमित प्रकाशित समाचार पत्रों में कार्यरत पत्रकारों को अनिवार्य रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाए और जिला जनसंपर्क कार्यालय से परिचय पत्र जारी किए जाएँ।
वेतन आयोग एवं पीएफ (EPF) अनुपालन: मीडिया संस्थानों को श्रम कानूनों के तहत नियुक्ति पत्र देने और वेतन आयोग के अनुरूप वेतन भुगतान हेतु बाध्य किया जाए, जिसकी पुष्टि बैंक खातों के माध्यम से अनिवार्य हो। साथ ही, संस्थानों द्वारा पीएफ (EPF) कटौती की गहन जाँच की जाए।
प्रतिनिधित्व: जनसंपर्क विभाग की विभिन्न समितियों में केवल श्रम विभाग में पंजीकृत पत्रकार संगठनों को ही प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए।
सम्मान निधि एवं चिकित्सा सुविधा: महंगाई को देखते हुए सम्मान निधि को ₹30,000 प्रति माह किया जाए। साथ ही, 70 वर्ष से अधिक आयु के सम्मान निधि प्राप्त पत्रकारों को चिकित्सा हेतु ₹10,000 प्रति माह का विशेष मेडिकल अनुदान दिया जाए।
पत्रकारो को आयुष्मान योजना का लाभ मिले..इस हेतु सभी पत्रकारो के आयुष्मान कार्ड बनाये जाये…
विज्ञापन नीति में सुधार:
नियमित प्रकाशित समाचार पत्रों को प्रतिमाह न्यूनतम ₹25,000 का विज्ञापन दिया जाए।
लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों हेतु विज्ञापन हेतु प्रसार संख्या की न्यूनतम पात्रता सीमा 2,000 निर्धारित की जाए।
शैक्षणिक योग्यता: पत्रकारिता के पेशे की गरिमा हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की जानी चाहिए।
आवास एवं स्वास्थ्य सुविधा:
पत्रकारों हेतु शासकीय आवास कोटा बढ़ाया जाए और नियमानुसार किराया भरने की शर्त पर आवंटन किया जाए।
नियमित किराया भुगतान करने वाले पत्रकारों के आवास का उचित नवीनीकरण हो।
पत्रकारों का स्वास्थ्य बीमा ₹10 लाख तक सुनिश्चित किया जाए।
मरणोपरांत सहायता: पत्रकार की असामयिक मृत्यु पर देय सहायता राशि ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख की जाए। साथ ही, सम्मान निधि प्राप्त पत्रकार की मृत्यु होने पर उक्त निधि उनकी धर्मपत्नी को हस्तांतरित की जाए, ताकि उसका का जीवनयापन सुरक्षित रह सके।
हमें पूर्ण विश्वास है कि आप पत्रकारों के व्यापक हित में इन बिंदुओं पर संवेदनशील सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। आपके द्वारा की गई इस दिशा में पहल प्रदेश के समस्त पत्रकारों का मनोबल बढ़ाएगी।
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