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भारत पाकिस्तान सीमा पर बाबा बुर्जी वाले की समाधि पर सालाना मेला पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया

भारत पाकिस्तान सीमा पर बाबा बुर्जी वाले की समाधि पर सालाना मेला पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया

फाजिल्का से लीला धर शर्मा महादण्ड संवाददाता की रपट

भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित गांव वल्ले शाह हिथाड़ (गुलाबा भैणी) में बाबा बुर्जी वाले की समाधि पर सालाना मेला पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ लगाया गया। यह ऐतिहासिक मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि दोनों देशों के लोगों की सांझ और भाईचारे का प्रतीक भी है। इस मेले के दौरान जहां दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के फूल भेंट किए, वहीं बीएसएफ 19वीं बटालियन के कमांडेंट एम.एस. बिष्ट सहित बीएसएफ अधिकारियों द्वारा भी बाबा जी की समाधि पर मत्था टेककर चादर चढ़ाई गई और श्रद्धा के फूल भेंट किए गए।
मेले के सेवादार केहर सिंह, गांव के निवासी परविंदर सिंह और अन्य लोगों ने बताया कि यह मेला 1947 से लगातार लगता आ रहा है। इलाके और दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां नतमस्तक होने पहुंचते हैं। लोगों में यह पक्का विश्वास है कि बाबा बुर्जी वाले के दरबार में सच्चे दिल से मांगी गई हर मन्नत जरूर पूरी होती है। गांव के लोगों द्वारा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़-चढ़कर सेवा की जाती है।
इस मेले की सबसे खास बात यह है कि यहां पाकिस्तान से भी श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करने आते हैं। परविंदर सिंह के अनुसार, जब भारतीय श्रद्धालु मत्था टेककर वापस लौट जाते हैं, तो शाम करीब 4 बजे पाकिस्तानी लोग सीमा के दूसरी ओर से बाबा जी के दरबार की तरफ मत्था टेकते हैं।
बीते समय को याद करते हुए बताया गया कि पहले इस मेले के दौरान दोनों देशों के खिलाड़ियों के बीच कबड्डी के रोमांचक मुकाबले होते थे, जो कि आपसी प्यार और सांझ की मिसाल थे। हालांकि, पिछले करीब एक साल से ये खेल बंद कर दिए गए हैं।
मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पंजाब पुलिस और बीएसएफ के जवान पूरी मुस्तैदी से तैनात थे। श्रद्धालुओं को पूरी चेकिंग के बाद ही एक-एक करके अंदर जाने दिया गया।
प्रबंधों के बारे में बोलते हुए परविंदर सिंह ने बताया कि सुरक्षा बलों द्वारा लाउडस्पीकरों को आगे ले जाने पर कुछ रोक लगाई गई थी। प्रशासन की ओर से सिर्फ एक-दो स्पीकर आगे ले जाने की ही अनुमति दी गई थी। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रबंधकों की अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है, और यदि ज्यादा स्पीकरों की मंजूरी नहीं मिलती है, तो उन्हें सीमा से पीछे ही लगाया जाएगा। हालांकि, बाद में सभी लाउडस्पीकरों को आगे ले जाने की मंजूरी दे दी गई। कुल मिलाकर, यह मेला पूरी शांति और सद्भाव के साथ चल रहा है और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

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