*कृषि को उत्पादन से आगे बढ़ाकर मूल्य संवर्धन आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाए : कृषि उत्पादन आयुक्त बर्णवाल*
*भोपाल से प्रांतीय मीडिया प्रभारी दीप्ति कौर की रपट
भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग की समीक्षा बैठक में कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन एवं मत्स्य क्षेत्र के समेकित विकास का रोडमैप तैयार*
*प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, खाद्य प्रसंस्करण, वैज्ञानिक भंडारण, केज कल्चर एवं ‘क्षीरधारा’ जैसी नवाचार आधारित पहलों को मिलेगी प्राथमिकता*
*उच्च मूल्य वाली फसलों, आधुनिक कृषि तकनीकों और ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर*
*खरीफ तैयारियों की व्यापक समीक्षा : फसल बीमा, उर्वरक उपलब्धता, पैक्स सदस्यता, आधुनिक कृषि यंत्रों एवं डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार के निर्देश*
भोपाल: 15 जून, 2026
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक बर्णवाल ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र की सफलता केवल उत्पादन वृद्धि तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, वैज्ञानिक भंडारण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन तक की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन तथा अन्य संबद्ध विभाग समन्वित एवं परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ कार्य करते हुए किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक जिले की भौगोलिक, जलवायु एवं बाजार आधारित विशेषताओं के अनुरूप दीर्घकालिक कृषि विकास रणनीति तैयार करें।
नर्मदा भवन, भोपाल में आयोजित भोपाल एवं नर्मदापुरम संभागों की रबी वर्ष 2025-26 की समीक्षा एवं खरीफ वर्ष 2026 की तैयारियों के लिए आयोजित बैठक में कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभागों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता श्री डी.पी. आहूजा, प्रमुख सचिव पशुपालन श्री उमाकांत उमराव, सचिव किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री निशांत बरबड़े, सचिव उद्यानिकी श्री जॉन किंग्सले, भोपाल संभागायुक्त श्री संजीव सिंह, नर्मदापुरम संभागायुक्त श्री श्रीकांत बनोठ,सचिव मत्स्य विभाग श्री स्वतंत्र कुमार सिंह, संचालक कृषि श्री उमाशंकर भार्गव, संचालक मत्स्य विभाग श्री मनोज पथरोलिया, संचालक मत्स्य महासंघ श्री अनुराग चौधरी सहित दोनों संभागों के कलेक्टर्स, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त श्री बर्णवाल ने कहा कि उद्यानिकी का कृषि उत्पादन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। बदलती बाजार परिस्थितियों में नई पीढ़ी के प्रगतिशील कृषक उच्च मूल्य वाली फसलों, औषधीय पौधों, पुष्पोत्पादन तथा व्यावसायिक उद्यानिकी की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सूक्ष्म नियोजन, क्लस्टर आधारित विकास तथा बाजारोन्मुख उत्पादन प्रणाली विकसित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्यानिकी को पारंपरिक कृषि की सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि एक सशक्त व्यावसायिक उद्यमशीलता मॉडल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
बैठक में विभिन्न जिलों द्वारा मखाना उत्पादन, नदी तटीय क्षेत्रों में तरबूज एवं खरबूज की खेती, टमाटर, औषधीय फसलों एवं व्यावसायिक पुष्प उत्पादन जैसे नवाचारों की जानकारी प्रस्तुत की गई। उद्यानिकी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए शेड नेट हाउस, प्री-कूलिंग यूनिट, राइपनिंग चैंबर, कोल्ड चेन, अनुदान आधारित रेफ्रिजरेटेड वाहनों तथा अन्य पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन अवसंरचनाओं के विकास पर विशेष बल दिया गया। स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों एवं वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं को बढ़ावा देकर कटाई उपरांत होने वाली क्षति कम करने तथा किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री बर्णवाल ने कहा कि कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए प्राकृतिक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं फसल विविधीकरण को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों, विस्तार अधिकारियों एवं स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से नवीनतम तकनीकों का प्रभावी प्रसार किया जाए तथा किसानों को बाजार की मांग, गुणवत्ता मानकों एवं मूल्य संवर्धन की संभावनाओं के अनुरूप कृषि उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
सहकारिता क्षेत्र की समीक्षा करते हुए श्री बर्णवाल ने कहा कि सहकारी संस्थाएं कृषि लागत कम करने, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता, समय पर ऋण, आधुनिक कृषि यंत्र, सामूहिक विपणन तथा कृषि प्रसंस्करण के सशक्त माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि डेयरी एवं पशुपालन क्षेत्र के हितग्राहियों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ते हुए उनके वित्तीय खातों को सहकारी संस्थाओं के मजबूत नेटवर्क से जोड़ा जाए। प्रमुख सचिव सहकारिता श्री डी.पी. आहूजा ने उर्वरकों के सुचारू वितरण, पुराने सदस्यों को पुनः समितियों से जोड़ने तथा उन्नत बीज उत्पादन एवं गैर-कृषि गतिविधियों के विस्तार पर बल दिया। पैक्स सदस्यता अभियान को गति देते हुए 30 जून तक अधिकतम सदस्यता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही ई-विकास पोर्टल एवं मार्कफेड के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित कर उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
बैठक में पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त आधार के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया गया। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि दुग्ध उत्पादन वृद्धि, पशुधन संवर्धन, पशु स्वास्थ्य सेवाओं, कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार कार्यक्रमों तथा ‘क्षीरधारा’ जैसी अभिनव योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, जिससे ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त एवं स्थायी आय के अवसर प्राप्त हों और पशुपालन कृषि का वास्तविक पूरक व्यवसाय बन सके।
मत्स्य पालन क्षेत्र की समीक्षा के दौरान उपलब्ध जलाशयों के वैज्ञानिक एवं अधिकतम उपयोग, केज कल्चर (Cage Culture) को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने, गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज की उपलब्धता, आधुनिक मत्स्य उत्पादन तकनीकों के विस्तार, मत्स्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं प्रभावी विपणन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन को ग्रामीण उद्यमिता, स्वरोजगार एवं आय संवर्धन के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित करते हुए विभागीय योजनाओं का लाभ अधिकतम हितग्राहियों तक पहुंचाया जाए।
खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त श्री बर्णवाल ने उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, सुव्यवस्थित वितरण प्रणाली तथा किसानों की सुविधा हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने खेतों में नरवाई जलाने की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए किसानों को हैप्पी सीडर एवं सुपर सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता बढ़ाने तथा सोशल मीडिया एवं जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से इनके उपयोग का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया। आगामी महीनों में इन प्रयासों को जे-फार्म एवं कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) संयंत्रों से जोड़कर कृषि अवशेषों के वैज्ञानिक उपयोग की दिशा में भी कार्य करने के निर्देश दिए गए।
सचिव किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री निशांत वरवड़े ने निर्देशित किया कि मानसून ऐप, दामिनी ऐप एवं मेघदूत ऐप जैसी डिजिटल सेवाओं का व्यापक उपयोग सुनिश्चित कर किसानों तक समयबद्ध मौसम एवं कृषि संबंधी परामर्श पहुंचाया जाए। साथ ही विद्युत आपूर्ति, कीट प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के संबंध में किसानों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए जिला स्तर पर विशेष अभियान संचालित किए जाएं।
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत शत-प्रतिशत ऋणी एवं अ-ऋणी कृषकों का कवरेज सुनिश्चित करने, नकली एवं अवैधानिक उर्वरकों के परिवहन एवं भंडारण पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने, एमपी फार्म गेट के व्यापक प्रचार-प्रसार, खरीफ विपणन की सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार करने तथा कृषि एवं उद्यानिकी फसलों के व्यवस्थित अभिलेखीकरण एवं राजस्व अभिलेखों में उनके समुचित पंजीयन पर भी विशेष बल दिया गया।
बैठक के अंत में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक बर्णवाल ने अधिकारियों से कहा कि कृषि क्षेत्र के सतत् एवं समावेशी विकास के लिए विभागीय समन्वय, तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक प्रबंधन तथा किसान-केंद्रित कार्यप्रणाली को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने उप संचालक कृषि एवं उप संचालक उद्यानिकी को प्रगतिशील किसानों के साथ राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों एवं प्रयोगशालाओं का अध्ययन भ्रमण कराने के निर्देश देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसा आधुनिक, आत्मनिर्भर एवं समावेशी कृषि तंत्र विकसित किया जाए, जिसमें किसान केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं बल्कि मूल्य संवर्धन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सक्रिय भागीदार बनकर समृद्धि के नए आयाम स्थापित करें ।
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