Journalist का भविष्य नहीं है इसलिए उगाही और बसूली करता है।
Journalist का भविष्य नहीं है इसलिए उगाही और बसूली करता है
उगाही और बसूली करने बालों पर कार्यवाही होनी चाहिए कहना बहुत आसान है परंतु बही बात मैंने एक उंगली उठाई सामने बाले पर परंतु यह नहीं देखते हैं कि तीन उंगलियां आपकी तरफ है।
दो साल पहले असेंबली आफ एमपी जर्नलिस्ट्स के प्रांतीय सम्मेलन में मैंने तो यह कहा था कि पत्रकार को पेट और परिवार की चिंता रहती है कारण मीडिया संस्थानों से वेतन नहीं मिलता फिर बसूली तो करना ही है।
एक कहावत है कि नाम दरोगा रख दो मतलब पत्रकार का ठप्पा लग जायें।
मेरे बाद कार्यक्रम की अथिति डॉ बी के रीना दीदी ने कहा कि अब पत्रकार पेट ,परिवार के साथ पेटी भी भरने लगा क्योंकि आगे उसका क्या भविष्य है।
एक मित्र जो पत्रकार हैं वो हमेशा कहते हैं कि समाचार वेचते है जिसको जरुरत है खरीद सकते हैं।
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