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पत्रकारों के लिए शिवराज ने नगद तो कमलनाथ ने आश्वासन

लेकिन एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ने पत्रकारों को मजीठिया वेतन आयोग के अनुसार वेतन,पी एफ कटौती में समाचार पत्रों के मालिकों के द्वारा की जा रही भर्रा साही को रोकना, नियुक्ति पत्र मिले ग्रामीण इलाकों के पत्रकारों को,इन बातों पर किसी भी राजनीतिक पार्टी का ध्यान नहीं जाता कारण साफ है मालिकों से कौन पंगा ले। परन्तु एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए काम शुरू कर दिया है, और संबंधित विभाग प्रमुख के साथ साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों से पत्राचार किया गया है जिसका रिजल्ट शीघ्र मिलेगा, इस प्रक्रिया में यह संभव है कि कुछ पत्रकारों को नुक्सान हो सकता है मतलब उन्हें समाचार पत्रों के मालिकों द्वारा हटाया जा सकता है। लेकिन आप को डरने की बात नहीं आपकी लड़ाई एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन न्यायालय में लड़ेगा बस आपको एक काम करना है कि आपके द्वारा भेजी गई खबर की कटिंग संभाल कर रखना है। न्यायालय में साक्ष्य के रूप में काम आयेगी। एक बात मैं साफ कर दूं कि इस काम में हमको एक होना है।श्रम विभाग के अधिकारियों के द्वारा अभी समाचार पत्रों से अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों से लिखा पढ़ी शुरू कर दी है। मैं यहां बता दूं कि मध्यप्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रत्येक समाचार पत्र मालिकों से वार्षिक विवरण मांगा था और उसकी अंतिम तारीख समाप्त हो गई है। इस वार्षिक विवरण में समाचार पत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों एवं पत्रकारों की जानकारी मांगी जाती है।आपकी लड़ाई में यह जानकारी भी काम आयेगी। आपको जानकारी होगी कि जनसंपर्क विभाग ने पत्रकारों को पत्र लिखा कि पत्रकार को उसके समाचार पत्र की मुद्रित दो प्रतियां प्रति दिन सांयकाल तक जिला जनसंपर्क कार्यालय में जमा कराना है पत्र में लिखा है कि प्रकाशित और प्रसारित होने वाले समाचार पत्र की मुद्रित प्रति जमा करना है।नई सरकार के बाद आपके हक में सरकार को भी काम करना होगा। एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन का वायदा है कि यदि आप साथ देंगे तो यह सब संभव है।

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