*corpsen की कमाई में परिवार के सदस्यों पत्नी , बेटे और बहू को तीन साल का कारावास। इसे कहते है न्याय*
*जबलपुर से मीना विनोदिया के साथ भोपाल से राधावल्लभ शारदा द्वारा संपादित रपट*
देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की बात को जबलपुर के न्यायाधीश ने सच कर दिखाया और एक भ्रष्टाचार के मामले में परिजनों को 3 ,3 वर्ष की सजा सुनाई जबकि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी की मौत हो गई।
जिस माननीय न्यायाधीश महोदय ने यह निर्णय दिया उन्होंने बता दिया कि न्याय किसे कहते हैं,
इन न्यायाधीश महोदय को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए।
यदि देश के न्यायालय में भ्रष्टाचार के मामले में परिजनों को भी सजा सुनाए तो फिर उम्मीद कर सकते हैं कि देश से भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है।
आय से अधिक संपत्ति मामले में सजा
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जबलपुर स्थित अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट (सी डी ए) जबलपुर के पूर्व सहायक लेखाधिकारी सूर्यकांत गौर के परिवार के सदस्यों को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दोषी ठहराया है।
मामले का विवरण: मुख्य आरोपी सूर्यकांत गौर, जिनका मामले की सुनवाई के दौरान निधन हो गया था, ने अपने कार्यकाल के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से लगभग ₹90,85,901 की अवैध संपत्ति अर्जित की थी।
दोषी पाए गए: अदालत ने सूर्यकांत गौर की पत्नी विनिता गौर, पुत्र शिशिर गौर और पुत्रवधू सुनीता गौर को दोषी पाया है।
सजा: अदालत ने तीनों को तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर उन्हें छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
फैसले का महत्व: यह जबलपुर की ईडी विशेष अदालत का पहला फैसला है जिसमें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दोषसिद्धि हुई है। यह फैसला इस बात का उदाहरण है कि अगर भ्रष्टाचार से अर्जित की गई काली कमाई का उपभोग परिवार के सदस्य करते हैं, तो उन्हें भी सजा मिल सकती है।
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