C M assam असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व सरमा के निर्णय पर एक घटना याद आ गई। ईंट का जवाब पत्थर से
*आप बीती*
जब मैं कृषि विभाग में कार्यरत था बात 1967 के आगे पीछे की है। राधावल्लभ शारदा कृषि संचालनालय में कार्यरत था
एक दिन सेफिया कालेज के मित्र लंच में कुछ देर से पहुंचे तो शाखा के सुपरिटेंडेंट ने हम पांच लोगों की आधे दिन की गैर हाजिरी लगा दी।
आखिर समस्या का हल निकालना था। क्योंकि जिनने हमें दंड दिया वो भी इबादत के लिए दफ्तर से बाहर रहते थे।
तब हम सबने मिलकर तय किया कि अब हम लोग भी देर से आयेंगे और कहेंगे कि मंदिर गए थे।
हम सबने रोज का नियम बना लिया था।
कृषि विभाग के संचालक हुककु साहब से हमारी शिकायत की,
शिकायत पर हमारी पेशी हुई और कारण पूछा कि रोज रोज कहां जाते हैं।
तब हमने एक ही बात कही कि हमारे 64 कोटी देवी देवता हैं हिंदू है मंदिर गए थे।
उस दिन की घटना के बाद आदेश हुए थे कि कार्यालयीन समय में कोई छुट्टी नहीं लेगा।
भगवान की पूजा करनी है तो छुट्टी लेकर जायें।
एक दिन हमने मिलकर छुट्टी का आवेदन पत्र लिखा और उसमें लिखा था कि भगवान की पूजा के लिए जाना है।
हमारे आवेदन पत्र पर कार्यवाही करते हुए सभी पर नियम बना दिया कि कोई भी त्योहार है तो छुट्टी लेकर जायें।
राधावल्लभ शारदा
प्रांतीय अध्यक्ष
एम पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन, मुख्यालय भोपाल
9425609484
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