सात साल की कैद और 60 हजार के जुर्माने से 30 लाख रुपए की भरपाई कैसे।
भोपाल बैंक ऑफ इंडिया की मिसरोद शाखा में 2013-15 में हुई थी गड़बड़ी
₹30 लाख के लोन घोटाले में सीनियर ब्रांच मैनेजर समेत 2 को 7 साल सजा
भोपाल से महादण्ड संवाददाता पल्लवी की रपट टिप्पणी के साथ – इस प्रकरण में न्याय प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह नहीं है परंतु अपराधियों को सजा और 60 हजार रुपए जुर्माना से 30 लाख रुपए की भरपाई हो गई।
मेरा मत कहता है कि आरोपियों की प्रापर्टी जप्त कर उसका विक्रय कर राशि की वसूली होनी चाहिए यदि ऐसा होता है तो अन्य भ्रष्टाचारियों को सबक मिलता और इस तरह के प्रकरणों में कमी आ सकती है।
बैंक ऑफ इंडिया की मिसरोद शाखा के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर पियूष चतुर्वेदी और साथी मोहन सिंह सोलंकी को 7 साल की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) नीलम शुक्ला ने 30 लाख रुपए का फर्जी लोन घोटाला मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पियूष पर 40 हजार और मोहन पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। दरअसल आरोपियों ने लोन की राशि को दूसरे खाते में ट्रांसफर कर गबन किया था।
मामला 20 अप्रैल 2013 से 3 जनवरी नों की 2015 के बीच का है, जब बैंक ऑफ इंडिया की कया। मिसरोद शाखा में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के पद अपनी पर पियूष चतुर्वेदी पदस्थ था। उसने बिचौलिए मोहन सिंह सोलंकी के साथ मिलकर मेसर्स सनी इंटरप्राइजेस के प्रोपराइटर इशविंदर सिंह गोगी के नाम पर 30 लाख रुपए का कैश क्रेडिट लोन ।
क्रेडाई व उद्योग संगठन बोले-
तकनीकी खराबी का हवाला देकर निकाले थे ₹50 हजार सीबीआई की जांच में सामने आया कि 30 नवंबर 2013 को मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी ने खुद एक विड्रॉल वाउचर भरा। क्लर्क को कहा कि ग्राहक का फोन आया है और वह लेट हो जाएगा। मैनेजर के निर्देश पर क्लर्क ने मेसर्स सनी इंटरप्राइजेस के लोन खाते से 50 हजार रुपए डेबिट कर कैश पीयष चतुर्वेदी को सौंप दिया। जब इशविंर सिंह ने खाते से पैसे कटने की लिखित और मौखिक शिकायत की, तो मैनेजर इसे तकनीकी खराबी बताते रहे।
स्वीकृत किया। लोन पास होने के ठीक उसी दिन 21 नवंबर 2013 इशविन्दर सिंह की जानकारी और बिना किसी वैध मैडेट के स्वीकृत राशि में से 22 लाख रुपए इलाहाबाद बैंक की कोतवाली रोड शाखा में गोल्ड फ्लाय एश फर्म के खाते में
मोहन के पास मिले साइन किए हुए ब्लैंक चेक
जांच में खुलासा हुआ कि गोल्ड फ्लाय एश फर्म कागजों पर रचना तोमर के नाम थी। उन्होंने अमरीश मालवीय के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी कर रखी थी। लेकिन, यह व्यवस्था सिर्फ औपचारिक थी। सीबीआई ने मोहन सिंह सोलंकी के घर छापेमारी की, तो वहां से इस खाते के अमरीश मालवीय द्वारा साइन कई ब्लैंक चेक और मूल पावर ऑफ अटॉर्नी बरामद हुई। इससे सिद्ध हुआ कि खाते का असली नियंत्रण और ट्रांसफर कर दिए गए। जांच में सामने आया कि पैसों का उपयोग मोहन सोलंकी ही कर रहा था। गोल्ड फ्लाय एश खाते का संचालन आरोपी मोहन सिंह सोलंकी ही कर रहा था। इशविंदर को इसकी भनक तब लगी जब उसने अपना अकाउंट स्टेटमेंट निकाला।
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