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भारत में श्रम कानून में संशोधन – नए कोड ने पत्रकारों के ‘विशेष दर्जे’ को खत्म कर उन्हें सामान्य श्रमिकों की श्रेणी में ला खड़ा किया है。

भारत में श्रम कानून में संशोधन – नए कोड ने पत्रकारों के ‘विशेष दर्जे’ को खत्म कर उन्हें सामान्य श्रमिकों की श्रेणी में ला खड़ा किया है。

नियुक्ति और वेतन: सभी मीडिया कर्मियों के लिए नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) अनिवार्य कर दिया गया है。 साथ ही, वेतन का समय पर भुगतान अब एक कानूनी गारंटी है。

भारत में मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में काम करने वाले पत्रकारों और अन्य कर्मचारियों के लिए श्रम कानून एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हुए चार नए श्रम कोड (Labour Codes) ने पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह ले ली है, जिसका सीधा असर मीडिया कर्मियों की सेवा शर्तों पर पड़ रहा है।
1. प्रमुख नए बदलाव (नए श्रम कोड 2026 के तहत)
नए नियमों के लागू होने से डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े कर्मचारियों को अब अधिक व्यापक सुरक्षा मिलने का दावा किया जा रहा है:

परिभाषा का विस्तार: अब ऑडियो-विजुअल वर्कर, डबिंग आर्टिस्ट, स्टंट कलाकार और डिजिटल मीडिया पत्रकारों को भी इन श्रम संहिताओं के तहत सुरक्षा प्रदान की गई है।
नियुक्ति और वेतन: सभी मीडिया कर्मियों के लिए नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) अनिवार्य कर दिया गया है。 साथ ही, वेतन का समय पर भुगतान अब एक कानूनी गारंटी है。
ओवरटाइम: ओवरटाइम के लिए कर्मचारी की सहमति आवश्यक है और इसके लिए दोगुना वेतन देने का प्रावधान है。
सामाजिक सुरक्षा: गिग वर्कर्स और फ्रीलांस पत्रकारों को भी अब सामाजिक सुरक्षा (जैसे ईएसआई और बीमा) के दायरे में लाने की योजना है。
2. परंपरागत कानून: वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट (1955)
दशकों से पत्रकारों के अधिकारों के लिए ‘वर्किंग जर्नलिस्ट एंड अदर न्यूजपेपर एम्प्लॉइज (कंडीशन्स ऑफ सर्विस) एक्ट, 1955’ मुख्य कानून रहा है। इसके कुछ प्रमुख प्रावधान इस प्रकार रहे हैं:
काम के घंटे: दिन की शिफ्ट में अधिकतम 6 घंटे और रात की शिफ्ट में 5.5 घंटे का प्रावधान था।
छुट्टियां: साल में 10 राजपत्रित अवकाश, 15 दिन की कैजुअल लीव और एक महीने की अर्जित छुट्टी (Earned Leave) का अधिकार।
वेज बोर्ड (Wage Board): पत्रकारों के वेतन निर्धारण के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर वेज बोर्ड का गठन किया जाता था।

3. नए कानूनों पर विवाद और चुनौतियां
जहाँ सरकार इन्हें ‘सुरक्षा कवच’ बता रही है, वहीं कुछ विशेषज्ञ और पत्रकार संगठन इन बदलावों की आलोचना भी कर रहे हैं:
विशेष श्रेणी का अंत: आलोचकों का मानना है कि नए कोड ने पत्रकारों के ‘विशेष दर्जे’ को खत्म कर उन्हें सामान्य श्रमिकों की श्रेणी में ला खड़ा किया है。
छंटनी के नियम: पहले 300 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों को छंटनी के लिए सरकारी अनुमति चाहिए थी, जिसे अब कुछ मामलों में सरल बना दिया गया है。
सैलरी स्ट्रक्चर: नए नियमों के कारण पीएफ (PF) योगदान बढ़ने से कर्मचारियों की ‘इन-हैंड’ सैलरी में कमी आने की संभावना जताई गई है。
कानून का नाम मुख्य उद्देश्य
मजदूरी संहिता, 2019 न्यूनतम वेतन और बोनस सुनिश्चित करना
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 बीमा, ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ प्रदान करना
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 विवादों का निपटारा और यूनियन को मान्यता ।
व्यावसायिक सुरक्षा संहिता, 2020 कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा मानक

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