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नागौर में मिर्धा परिवार के दो नेता एक दूसरे को चुनौती दे रहे

1984  जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की प्रचंड लहर थी। इसके बावजूद राजीव गांधी को राजस्थान के नागौर से एक ऐसे मजबूत उम्मीदवार की तलाश थी जो नाथूराम मिर्धा को का मात दे सके। आखिरकार उन्होंने रामनिवास मिर्धा को टिकट दिया और मिर्धा परिवार के दो दिग्गजों के उस मुकाबले में नाथूराम मिर्धा को शिकस्त मिली।

 

1984 में नाथूराम मिर्धा ने लोकदल से नागौर सीट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन रामनिवास मिर्धा ने इससे पहले कभी लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। वे 1967 से लगातार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते रहे थे। लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ा और 48 हजार से ज्यादा वोटों से नाथूराम मिर्धा को हरा दिया। वह पहला मौका था जब जाटलैंड के इस रसूखदार राजनीतिक घराने के दो दिग्गज आमने-सामने थे और अब 39 साल बाद उसी नागौर में मिर्धा परिवार के दो नेता एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं।

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