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रायपुर के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी पर शिकंजा: आय से अधिक संपत्ति और अस्पतालों में अवैध निवेश की गंभीर शिकायत दर्ज*

*रायपुर के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी पर शिकंजा: आय से अधिक संपत्ति और अस्पतालों में अवैध निवेश की गंभीर शिकायत दर्ज*

बिलासपुर से महादण्ड संवाददाता की रपट

*राजनांदगांव से लेकर रायपुर तक फैला है संपत्तियों और मेडिकल कारोबार का जाल*
*दोपहिया वाहनों में डीजल खर्च और संविदाकर्मियों को वेंडर बनाकर शासन को चूना लगाने का सनसनीखेज आरोप*
*आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), छत्तीसगढ़ को सौंपी गई उच्चस्तरीय जांच की मांग*
जितेंद्र जैन जीतू
रायपुर/ 29 अक्टूबर 26
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक भूचाल आ गया है। रायपुर जिले के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी के खिलाफ पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की गंभीर शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), छत्तीसगढ़ के समक्ष दर्ज कराई गई है। इस खुलासे के बाद चिकित्सा जगत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
शिकायत के अनुसार, डॉ. मिथिलेश चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का भारी दुरुपयोग करते हुए आय के ज्ञात स्रोतों से कई गुना अधिक संपत्ति जुटाई है। जांच पत्र में मुख्य रूप से यह बात सामने आई है कि जिला राजनांदगांव के कई प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों में उनका भारी पैसा लगा हुआ है। जिनमें श्री कृष्णा हॉस्पिटल (पी.टी.एस. ग्राउंड, तुमड़ीबोड़, राजनांदगांव)
मां गंगा डायग्नोस्टिक एवं रिसर्च सेंटर (कमला कॉलेज चौक, स्टेडियम रोड, राजनांदगांव)
इसके अलावा, राजनांदगांव और मोहला-मानपुर क्षेत्रों में भी परिवार के सदस्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर अचल संपत्ति (प्रॉपर्टी) और अस्पताल-पैथोलॉजी लैब के संचालन की जानकारियां सामने आई हैं।
*डीजल घोटाला और फर्जी वेंडर का सनसनीखेज मामला*
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि डॉ. चौधरी के कार्यकाल के दौरान दोपहिया (टू-व्हीलर) वाहनों में भारी-भरकम डीजल खर्च दिखाने और संविदाकर्मियों को फर्जी वेंडर बनाकर शासन को आर्थिक चूना लगाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इन घोटालों का प्रसारण प्रतिष्ठित मीडिया चैनलों द्वारा भी किया जा चुका है। राजनांदगांव में पदस्थापना के दौरान भी उनके खिलाफ इसी तरह की शिकायतें दर्ज की गई थीं, जो वर्तमान में भी लंबित हैं।
EOW से निष्पक्ष और गोपनीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से पुरजोर मांग की है कि डॉ. मिथिलेश चौधरी और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, आय-व्यय, अस्पतालों/पैथोलॉजी लैब की ओनरशिप, वित्तीय गतिविधियों और संपत्ति खरीदने के स्रोतों की निष्पक्ष एवं गोपनीय जांच की जाए। साथ ही, संबंधित दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल कर दोषियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।

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