आरएसएस के मिशन पर बोले मोहन भागवत , बता दी एक-एक बात, कहा- अभी बहुत दूर तक जाना है
दिल्ली से वेदप्रकाश रस्तोगी के द्वारा संपादित रपट
मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम सिर्फ चरित्र निर्माण की मिसाल पेश करने तक ही सीमित नहीं है। आरएसएस का सफर लगातार जारी है, हमें बहुत दूर तक जाना है। उन्होंने कहा कि पांच महाद्वीपों के लोग चाहते हैं कि आरएसएस जैसी ट्रेनिंग उन्हें मिले।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस के चरित्र निर्माण मॉडल ने दुनिया भर में लोगों का ध्यान खींचा है। भारत और पांचों महाद्वीपों से आए लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता उन्हें भी वैसी ही मूल्य-आधारित ट्रेनिंग दे सकते हैं, जैसी वे अपने देशों में युवाओं को देना चाहते हैं। मोहन भागवत, आरएसएस प्रचारकों के जीवन और उनके योगदान को दिखाने वाली सीरीज के 100वें यूट्यूब वीडियो लॉन्च पर बोल रहे थे। संघ प्रमुख ने इस मौके पर कहा कि आरएसएस का मिशन सिर्फ अच्छे चरित्र वाले लोग तैयार करने से कहीं आगे तक जाता है।
आर एस एस की ट्रेनिंग पर बोले मोहन भागवत
भागवत ने बताया आरएसएस का महत्व
भागवत ने कहा कि संघ का यह सफर अभी जारी है। अभी बहुत दूर तक जाना है। संघ का काम सिर्फ चरित्र निर्माण की मिसाल पेश करने तक ही सीमित नहीं है। संघ के सिद्धांतों को सिर्फ किताबें पढ़कर या भाषण सुनकर नहीं समझा जा सकता, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारकर ही समझा जा सकता है। मोहन भागवत के अनुसार, स्वयंसेवक का मुख्य गुण सिर्फ सक्रियता नहीं, बल्कि एक संगठित, अनुशासित और मूल्यों पर आधारित जीवन जीना है। उन्होंने इस धारणा को भी दूर करने की कोशिश की कि आरएसएस अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों को सीधे तौर पर नियंत्रित करता है।
आरएसएस की ट्रेनिंग पर कह दी बड़ी बात
मोहन भागवत ने कहा कि संघ में ट्रेनिंग पाने वाले स्वयंसेवक समाज की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से काम करते हैं।
आरएसएस का मुख्य ध्यान ऐसे लोगों को तैयार करने पर होता है जिनमें चरित्र, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की भावना हो।
उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी ऐसा कोई असरदार तरीका नहीं है जिससे इंसानों को उस तरह ढाला जा सके जैसा संघ करना चाहता है।
भारत और विदेशों से लोग संगठन के कामकाज को समझने के लिए नियमित रूप से आते हैं।
उन्होंने कहा कि पांचों महाद्वीपों से लोग आए हैं और पूछा है कि क्या संघ के लोग उन्हें ट्रेनिंग दे सकते हैं, ताकि वे अपने देशों के युवाओं को भी वैसी ही ट्रेनिंग दे सकें।
भारत में मानवता को सही राह दिखाने की क्षमता : भागवत
संगठन के विकास पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि कार्यकर्ताओं की मौजूदा पीढ़ी उन लोगों को श्रद्धांजलि दे रही है जिन्होंने संघ की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि भले ही संगठन का विस्तार हुआ है और समाज में उसे ज्यादा भरोसा, स्नेह और सम्मान मिला है, लेकिन हालात बदलने के बावजूद उसका मूल स्वरूप और बुनियादी मूल्य नहीं बदलने चाहिए। भारत की वैश्विक भूमिका का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया का अब भी मानना है कि भारत में मानवता को सही राह दिखाने की क्षमता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा तभी संभव होगा जब भारत खुद अपने सभ्यतागत मूल्यों के आधार पर आगे बढ़े और सर्वोच्च गौरव और सर्वोच्च शक्ति वाले राष्ट्र के रूप में उभरे।
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