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भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने आपातकाल संविधान हत्या दिवस पर गुरूवार को जबलपुर में मनाया

*भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने आपातकाल संविधान हत्या दिवस पर गुरूवार को जबलपुर, उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला सागर, कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ग्वालियर, पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तानसिंह सोलंकी इंदौर, राज्य वित आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया उज्जैन एवं वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने रीवा में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर मीसाबंदियों का किया सम्मान*
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भोपाल से राधावल्लभ शारदा के साथ दीप्ति कौर की रपट

*-आपातकाल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था*
*-कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोटकर देश पर आपातकाल थोपा*
*-अंग्रेजों से भी अधिक यातनाएं आपातकाल में कांग्रेस सरकार ने दी*
*-डॉ. महेन्द्र सिंह*
*-आपातकाल की घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक है*
*-श्री राजेन्द्र शुक्ल*
*-इंदिरा गांधी और संजय गांधी ने आपातकाल लगाकर न्यायालय और संविधान का अपमान किया था*
*-श्री प्रहलाद पटेल*
*-इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने के लिए कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी की परंपरा को नष्ट किया*
*-प्रो. कप्तानसिंह सोलंकी*
*-इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी ने अपने निज स्वार्थों के लिए संविधान में कई संशोधन किए*
*-श्री जयभान सिंह पवैया*
*-आपातकाल केवल इतिहास की घटना नहीं, कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का आईना है*
*-डॉ. नरोत्तम मिश्रा*
भोपाल/जबलपुर/सागर/ग्वालियर/इंदौर/उज्जैन/रीवा, 25/06/2026। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने आपातकाल संविधान हत्या दिवस पर गुरूवार को जबलपुर, उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल सागर, कैबिनेट मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ग्वालियर, पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तानसिंह सोलंकी इंदौर, राज्य वित आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया उज्जैन एवं वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने रीवा में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर मीसाबंदियों का सम्मान किया। पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने कहा कि आपातकाल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था। कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटकर देश पर आपातकाल थोपा था। उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने सागर में कहा कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटा था। यह घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक घटनाओं में से एक है। प्रदेष शासन के कैबिनेट मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने ग्वालियर में कहा कि इंदिरा गांधी और संजय गांधी ने आपातकाल लगाकर न्यायालय और संविधान का अपमान किया था। पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तानसिंह सोलंकी ने इंदौर में कहा कि इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने के लिए कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी की परंपरा को भी नष्ट किया था। राज्य वित आयोग के अध्यक्ष श्री जयभानसिंह पवैया ने उज्जैन में कहा कि इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी ने अपने निज स्वार्थों के लिए संविधान में कई संशोधन किए। पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने रीवा में कहा कि आपातकाल केवल इतिहास की एक घटना नहीं, बल्कि कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का आईना है।
*लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने की मानसिकता से देश पर आपातकाल थोपा-डॉ. महेन्द्र सिंह*
पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित हुई, लेकिन कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार सत्ता पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने से भी पीछे नहीं हटे। इसी मानसिकता के कारण 25 जून 1975 को देश पर आपातकाल थोपा गया, जो भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था। उन्होंने कहा कि उस समय देश न तो किसी युद्ध की स्थिति में था और न ही कोई आंतरिक परिस्थिति थी, जिसके कारण आपातकाल लगाना आवश्यक हो। वास्तव में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित किए जाने के बाद सत्ता हाथ से निकलती दिखाई देने लगी थी। इसी कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलते हुए देश पर आपातकाल थोपा गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र है तो हम हैं, लोकतंत्र नहीं होता तो हम भी नहीं होते। लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान के कारण ही आज देश लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ मजबूती से खड़ा है। भारत सदियों से संस्कृति, शिक्षा, आध्यात्म, चिकित्सा और ज्ञान का केंद्र रहा है, लेकिन लंबे समय तक विदेशी आक्रमणों और गुलामी का सामना करना पड़ा। लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हुआ, किंतु स्वतंत्रता के बाद भी जनता के सपनों का भारत साकार नहीं हो पाया।
*आपातकाल में निर्दोषों को जेल में डाल दिया गया*
भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने बिना व्यापक लोकतांत्रिक विमर्श और जनभावनाओं का सम्मान किए 25 जून 1975 की रात देश में आपातकाल लागू कर दिया। इसके बाद हजारों निर्दाेष लोगों को जेलों में डाल दिया गया। कांग्रेस का विरोध करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के सदस्यों और पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया। प्रेस की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप लगा दी गई, समाचार पत्रों की बिजली काट दी गई तथा विदेशी पत्रकारों पर भी प्रतिबंध लगाए गए। जेलों की स्थिति अत्यंत भयावह थी। जहां एक हजार बंदियों की क्षमता थी, वहां तीन से चार हजार लोगों को रखा गया। लगभग 19 महीनों तक देशभर में एक लाख से अधिक लोगों को जेलों में बंद रखा। जितनी यातनाएं अंग्रेजों ने नहीं दीं, उससे कहीं अधिक यातनाएं आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार ने दीं।
*लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से बचा संविधान*
भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान की मूल भावना को निलंबित कर लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले हजारों लोगों को जेलों में डाल दिया गया। जनसंघ के कार्यकर्ताओं, राष्ट्रवादी संगठनों के सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया। प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाकर सच्चाई को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी उस समय भूमिगत रहकर गांव-गांव कांग्रेस की सच्चाई पहुंचाने तथा लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों की सहायता करने का कार्य कर रहे थे। लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही देश को लोकतांत्रिक अधिकार पुनः प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए संविधान में अनेक संशोधन किए और एक परिवार को संविधान से ऊपर रखने का प्रयास किया। आज कांग्रेस के नेता स्वयं को संविधान का रक्षक बताने का प्रयास करते हैं, जबकि उनका इतिहास संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाला रहा है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के बाद गठित शाह आयोग की रिपोर्ट में भी स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि देश में आपातकाल लगाए जाने की कोई संवैधानिक आवश्यकता नहीं थी। मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में हजारों लोकतंत्र सेनानियों को जेलों में बंद किया गया और उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं। इसके बावजूद लोकतंत्र के रक्षकों ने संघर्ष जारी रखा और अंततः देश में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हुई।
*प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में लोकतंत्र और संविधान हुए सशक्त*
भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन पहुंचकर संविधान को नमन किया था और तभी से संविधान की मर्यादा तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने का कार्य निरंतर जारी है। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी दिन-रात कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य उन लाखों लोकतंत्र सेनानियों और देशभक्तों के संघर्षों से प्रेरित है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान कठिन यातनाएं झेलीं। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री जॉर्ज फर्नांडिस सहित हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद किया गया था। लाखों नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई थी और सैकड़ों पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया था। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे आपातकाल के काले अध्याय की सच्चाई को जन-जन तक पहुंचाएं ताकि नई पीढ़ी लोकतंत्र की रक्षा के महत्व को समझ सके।
*आपातकाल के काले सच को जनता तक पहुंचाएं कार्यकर्ता-राजेन्द्र शुक्ल*
उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने सागर में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटा था। यह घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक घटनाओं में से एक है। यह केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था। आपातकाल लगाने का उद्देश्य नेहरू-गांधी परिवार का सत्ता पर वर्चस्व बनाए रखने की लालसा में संविधान को रौंदने का कुत्सित प्रयास था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश भारत माता के गौरव को परम वैभव पर पहुंचाने के लिए आगे बढ़ रहा है।
*कांग्रेस ने हमेशा संविधान का अपमान किया -श्री प्रहलाद पटेल*
मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने ग्वालियर में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश पर आपातकाल लगाकर संविधान की हत्या की थी। आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी और संजय गांधी ने जिस तरह से न्यायालय और संविधान का अपमान किया आज भी उस परिवार के लोग वही कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते समय कहा था कि इस सरकार के पीछे कई पीढ़ियों का बलिदान है, संघर्ष है, त्याग और तपस्या है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए कष्ट सहने वाले, अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाले ऐसे सभी सेनानियों को मैं प्रणाम करता हूं।
*कांग्रेस ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर संविधान की हत्या की थी-प्रो कप्तानसिंह सोलंकी*
भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यपाल श्री प्रो कप्तानसिंह सोलंकी ने इंदौर में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाकर संविधान की हत्या की थी। इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने के लिए कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी की परंपरा को भी नष्ट किया। जेल के अंदर लोकतंत्र सेनानियों को तरह-तरह की यातनाएं दी गईं, बीमार होने पर उनका इलाज नहीं कराया गया। कई राष्ट्रवादी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। आपातकाल के बाद शाह आयोग बनाया गया था। शाह आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा था कि देश में आपातकाल लगाए जाने की कोई संवैधानिक जरूरत नहीं थी।
*इंदिरा गांधी और कांग्रेस ने अपने स्वार्थ के लिए संविधान में कई संशोधन किए-श्री जयभान सिंह पवैया*
राज्य वित आयोग के अध्यक्ष श्री जयभानसिंह पवैया ने उज्जैन में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आपातकाल दिवस देश की जनता को यह याद दिलाता है कि संविधान का गला घोंटने वाली ताकतों से कैसे लड़ना चाहिए। इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी ने अपने निज स्वार्थों के लिए संविधान में कई संशोधन किए। आपातकाल लगाने के लिए कुछ परिस्थितियां होती हैं, लेकिन जब कांग्रेस की श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया तब न तो देश युद्ध लड़ रहा था और न ही कोई आंतरिक समस्या थी। यह आपातकाल सिर्फ इसलिए लगाया गया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया था। कांग्रेस और इंदिरा गांधी को हाथ से देश की सत्ता जाते हुए दिखी, इसलिए देश में आपातकाल लगा दिया गया।
*कांग्रेस ने हमेशा स्वयं को संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से ऊपर माना-डॉ. नरोत्तम मिश्रा*
पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि आपातकाल केवल इतिहास की एक घटना नहीं, बल्कि कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का आईना है। कांग्रेस हमेशा स्वयं को संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से ऊपर मानती रही है। कांग्रेस को जब भी सत्ता मिली, उसने लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने और सत्ता को सर्वाेपरि रखने का प्रयास किया, जो देश और लोकतंत्र दोनों के लिए घातक है। 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। सत्ता बचाने के लिए संविधान की आत्मा को कुचल दिया गया, नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए और लोकतंत्र को बंधक बना दिया गया। लाखों लोगों की आवाज दबाई गई, विपक्षी नेताओं और लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में ठूंस दिया गया तथा प्रेस की स्वतंत्रता पर अभूतपूर्व हमला किया गया। आपातकाल को हमेशा याद रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह केवल अतीत का एक अध्याय नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए चेतावनी है। जब सत्ता अहंकार में बदल जाती है तो संविधान, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक अधिकार सबसे पहले निशाने पर आते हैं।
*लोकतंत्र सेनानियों का किया सम्मान*
जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मान किया गया। उन्होंने आपातकाल दिवस पर आयोजित प्रदर्शनी का उदघाटन कर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया। संगोष्ठी को सांसद श्री आशीष दुबे, विधायक श्री अशोक रोहाणी, जिला अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर तथा लोकतंत्र सेनानी संघ के जिला अध्यक्ष श्री अंजनी सिंह ने भी संबोधित किया और अपने संस्मरण साझा किए। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री अखिलेश जैन, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अश्विनी परांजपे, जिला प्रभारी श्री आलोक संजर, राज्यसभा सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मीकि, ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार पटेल, जेडीए अध्यक्ष श्री संदीप जैन, उपाध्यक्ष श्री प्रशांत केसरवानी, नगर निगम उपाध्यक्ष श्री रिंकू विज, निःशक्तजन प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री संदीप रजक, श्री दीपांकर बनर्जी, डॉ. स्वाति गोडबोले, पूर्व मंत्री श्री मोती कश्यप एवं श्री शरद जैन, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी श्री श्रीकांत साहू, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वाणी अहलूवालिया सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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