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नवाचार , सततता और वैश्विक साझेदारी से बदलेगा भविष्य – अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में गूंजे विकास के नए सूत्र

नवाचार , सततता और वैश्विक साझेदारी से बदलेगा भविष्य – अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में गूंजे विकास के नए सूत्र

[ श्री वैष्णव कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सम्पन्न ] ( डॉ.श्याम सुन्दर पलोड की रिपोर्ट )

……वहां दुनिया भर के लोग जुटे थे दुनिया की तस्वीर बदलने के लिए….कुछ नएपन के साथ , निरन्तरता की फलश्रुति में वैश्विक साझा तकदीर बदलने के लिए…..किसी ने नवोन्मेषी विचार की पैरवी करते हुए दुनिया को बेहतर देने का यही एकमात्र मार्ग सुझाया…..तो किसी ने भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों के निमित्त संसाधन सुरक्षित रखने हेतु स्थायित्व को श्रेष्ठ मार्ग बताया….कोई वैश्विक साझेदारी से समग्र मानव जाति के विकास की नई राह की वकालत कर रहा था…..तो कोई कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में इंसान की कम्प्यूटर से प्रतियोगिता को चुनौती की संज्ञा दे रहा था…..वहां सभी की चिंता और चिंतन के स्वर भविष्य के बदलाव को स्वीकार कर उस दिशा में अभी से बढ़ने को , नया इतिहास गढ़ने को , और मुक्ताकाश की सीढ़ियां चढ़ने को आतुर और प्रबल दिखाई दिए…..वर्तमान का सम्मान और भविष्य का दृष्टिकोण शोधकर्ताओं के निष्कर्ष और सुझाव का प्रतिबिम्ब बने…..इस तरह एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के सार की तरफ संसार के विद्वजन चले……अवसर था श्री वैष्णव कॉलेज ऑफ आर्ट्स एन्ड कॉमर्स द्वारा इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के आयोजन का । कॉन्फ्रेंस का विषय था – ” नवाचार , सततता और वैश्विक साझेदारी के साथ भविष्य को बदलना । ”
कॉन्फ्रेंस में देश विदेश से अनेक शोधार्थियों , विद्वानों , प्राध्यापकों , शिक्षाविदों और मार्गदर्शकों ने हिस्सा लिया ।
प्रारम्भ में शुभारम्भ समारोह के मुख्य अतिथि इंदौर के प्रथम नागरिक महापौर पुष्यमित्र भार्गव थे । अतिथि के रूप में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरु डॉ.राजेश वर्मा और देअविवि , इंदौर के डीसीडीसी डॉ.सचिन शर्मा उपस्थित थे ।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि –
नवाचार की बात करें तो तकनीक हर क्षण बदल रही है । भारत जैसे देश में जहां जनसंख्या दुनिया मे सबसे ज्यादा है वहां तकनीकी अवेयरनेस बढ़ाने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है । हमें वर्तमान को बदलना होगा । इंदौर देश में आठ बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीत चुका है । हमने कचरे को भी नवाचार से जोडा । हम गीले कचरे व सूखे कचरे जैसे चार प्रकार के कचरे कलेक्ट भी करते हैं , ट्रांसफार्म भी करते हैं और प्रोसेस भी करते हैं । क्या इसको इनोवेशन से जोड़ा जा सकता है ? पूरे शहर में ड्रेनेज के पांच लाख चेम्बर हैं । ये चेम्बर पिछली बार कब साफ हुए थे , कौन सा चेम्बर कहाँ है क्या ये जिओ टेग हो सकता है ? क्या वो आईओपी बेस्ड हो सकता है ? ये नवाचार है । इंदौर शहर में आठ सौ से ज्यादा पब्लिक टॉयलेट हैं ये पिछली बार कब साफ हुए थे ? कितने लोगों ने इसका उपयोग किया ? कितने लोगों ने फीडबेक दिया ? क्या इसको ट्रेक किया जा सकता है ? ये इनोवेशन है ।
यदि हम सतत विकास की बात करें तो नगर निगम ने देश का पहला 60 मेगा वाट का पहला सोलर पार्क बनाया जो चार सौ करोड़ रुपये साल के बिजली बिल की बचत करता है । इंदौर में 900 मेगावाट बिजली लगती है । हमने लोगों से आग्रह करके 30 हजार घरों में सोलर रूफ टॉप लगवाया । चार साल में इंदौर में बीस लाख पौधे लगाए जो जिन्दा है ये सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट है ।
ग्लोबल पार्टनरशिप की बात करें तो निश्चित तौर पर आज भारत अनेक देशों के साथ ये कर रहा है । कई देशों ने सीमित साधनों व अभावों के बावजूद अपने खुद के सिस्टम बनाये । सबसे ज्यादा चावल का उत्पादन इजरायल में होता है जबकि वहां बिल्कुल पानी नहीं है । ग्लोबल पार्टनरशिप के जरिये हम अपने भविष्य में बदलाव ला सकते हैं । मास्को में 3 करोड़ आबादी है जहां सबसे ज्यादा समय बर्फबारी होती है लेकिन वो दिन में तीन बार सड़कों से बर्फ हटा देते हैं । ग्लोबल पार्टनरशिप भारत जैसे देश के शहरों के लिए बहुत जरूरी है हम दुनिया में देखें तो सही क्या बदलाव हो रहा है , फिर उसको खुद करें । जनरेशन बदल रही है , हम जेन जी की बात करते हैं , अब जेन जी अल्फा और गामा भी आ गया है । आज विकसित भारत ने अपने आप को डिजिटली अपडेट कर लिया है । आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमको जकड़ रहा है ।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ.राजेश वर्मा ने कहा कि – हम विकसित भारत की कल्पना कैसे कर सकते हैं यही नवाचार की बात है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नवाचार की शुरुआत हो गई है । हमने नवाचार से डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता दी और जब देश को यूपीआई ट्रांजेक्शन से जोड़ा तो 2016 – 17 में जो 2 करोड़ का ट्रांजेक्शन था वो आज यूपीआई ट्रांजेक्शन 24162 करोड़ रुपये का हो गया है । एआई ने हमको आपरेशन सिंदूर में सफलता दी याने नवाचार हमारी ताकत बन गया है ।
हम अपनी आध्यात्मिक शक्ति , नैतिकता व चरित्र निर्माण के बल पर विकसित भारत के स्वप्न को साकार नवाचार से करेंगे । हम कालाबाजारी को रोकने के उपाय बताने के बजाय नैतिकता सिखाएं ये भारतीय दर्शन व मूल्य है जिसमें नकारात्मकता नहीं सकारात्मकता होती है यही हमारा 2047 का विकसित भारत स्वप्न है ।
दे.अ.विश्वविद्यालय के डीसीडीसी डॉ.सचिन शर्मा ने कहा कि – नवाचार के लिए हम युवाओं को तकनीक से जोड़ें । ग्लोबल पार्टनरशिप हमारे जीवन का हिस्सा हो । हमने विद्यार्थियों के बीच छोटे छोटे प्रयोग किये
हमारे एनएसएस के बच्चों से हमने नवाचार व शोध की शुरुआत करवाई । हमने उनसे ग्राम सम्पर्क में तीन प्रश्न लोगों से करने व उनके उत्तर लाने हेतु बोला ।
कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री पुरुषोत्तमदास पसारी , महाविद्यालय प्रबन्ध समिति के श्री अरविंद गुप्ता , श्री महेश चिमनानी भी मंच पर उपस्थित थे । प्रारम्भ में प्राचार्य डॉ.परितोष अवस्थी ने अतिथि परिचय दिया । कार्यक्रम में शोध पत्र से सम्बंधित सोविनियर का विमोचन भी अतिथियों ने किया । संचालन डॉ.मनीष दुबे ने किया ।

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